एनआरएचएम घोटाला: ईडी ने मेडिकल कंपनी की 23.54 करोड़ की संपत्ति की कुर्क

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन की अपनी जांच के सिलसिले में 23 करोड़ रुपए से ज्यादा की संपत्ति कुर्क की है। ईडी ने इस सिलसिले में बुधवार को कानुपर सहित कई देश के कई हिस्सों में छापेमारी की। ईडी ने कहा कि धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत इसने मेसर्स सर्जिकॉइन मेडीक्विप प्राइवेट लिमिटेड एवं अन्य की 23.54 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है।

यूपी एसआईसी के तत्कालीन एसपी का फ्लैट व तत्कालीन एमडी का कानपुर का फ्लैट सीज

एजेंसी ने सीबीआई की ओर से दर्ज की गई एक प्राथमिकी के आधार पर 2012 में केंद्र की एनआरएचएम योजना में कथित वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए एक आपराधिक मामला दर्ज किया था। ईडी ने एक बयान में कहा कि उक्त आपूर्तिकर्ता कंपनी, जिसके कारखाने पानीपत में हैं, के नियंत्रण में रहे विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की गई। निदेशकों के आवास की भी तलाशी ली गई और अहम दस्तावेज बरामद किए गए, जिनसे खुलासा हुआ कि आपूर्तिकर्ता ने फर्जी कागजात तैयार कराए और दरों में गड़बड़ी की।




ईडी ने बुधवार एसआईसी के तत्कालीन एसपी का फ्लैट, तत्कालीन एमडी अभय कुमार वाजपेयी का कानुपर का फ्लैट और सर्जिकॉइन मेडीक्विप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का मकान व फैक्ट्री सीज किए हैं। इसी तरह की कार्रवाई में एजेंसी ने चेन्नई की एक कंपनी की 150 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की। इस कंपनी पर धन के अवैध प्रसार और लोगों को चूना लगाने के आरोप हैं।

उल्‍लेखनीय है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के 15 नवंबर 2011 के आदेश पर एनआरएचएम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई को पता चला ने पूर्व मंत्रियों ने निजी आपूर्तिकर्ताओं के साथ साजिश कर दवा, शल्य चिकित्सा उपकरण और अन्य मदों में हेराफेरी की है। अंटू पर आरोप है कि उन्होंने ठेकेदारों और बिचौलियों की मदद से जिलों में सीएमओ की तैनाती में रिश्वत ली। दवा, उपकरण, प्रशिक्षण व निर्माण का आदेश अपने चहेते को दे दिया। मुख्य चिकित्साधिकारियों ने दवा, शल्य चिकित्सा, सर्जिकल आइटम की आपूर्ति का ठेका बिना निविदा कराये उस आपूर्तिकर्ता को दी, जिसने उनकी तैनाती कराने में अहम भूमिका निभाई थी। आपूर्तिकर्ताओं ने बाजार दर से पांच से दस गुना अधिक दर लगाकर आपूर्ति की। विभाग के उच्चाधिकारियों ने इनकी अनदेखी की और वह भी इसमें हिस्सेदार रहे।

सूत्रों की माने तो पूर्व परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने भी चार ठेकेदारों, प्रदीप शुक्ला, रामप्रसाद जायसवाल, डाक्टर कटियार के साथ एनआरएचएम की धनराशि हड़पने का षड्यंत्र किया। बाबू सिंह ने जिलों में एनआरएचएम धन को खर्च करने के लिए बतौर प्रभारी नियुक्त किये। अधिकारियों को लूट खसोट की खुली छूट भी दे दी। जिला परियोजना अधिकारी परिवार कल्याण के पद पर उन्हीं अधिकारियों की तैनाती की जाती थी, जो मंत्री के इशारे पर उनके चहेतों को ही ठेके आवंटित करते थे।




इसके एवज में तत्कालीन विधायक आरपी जायसवाल व एमएलसी डाक्टर अशोक कटियार भी अवैध तरीके से उपकृत होते रहे। आपराधिक षड्यंत्र के तहत स्वास्थ्य विभाग के दो टुकड़े करने का प्रस्ताव किया गया, जिसे केन्द्र सरकार के एनआरएचएम के लिए तय मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए स्वीकृति दी गयी। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक डाक्टरों को सीएमओ बनाने के एवज में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, अनंत कुमार मिश्र अंटू, तत्कालीन बसपा विधायक आरपी जायसवाल और एमएलसी अशोक कटियार ने डाक्टरों से करोड़ों रुपये वसूले। इस काम में उनकी मदद पूर्व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रदीप शुक्ल और महानिदेशक स्वास्थ्य एसपी राम ने की। घूस की रकम का एक हिस्सा प्रदीप शुक्ल तक भी पहुंचने के सुबूत सीबीआई के हाथ लग चुके हैं।

पैसा देकर तैनाती पाये सीएमओ उन्हीं सप्लायर्स को दवाइयों और उपकरणों की सप्लाई, प्रशिक्षण और निर्माण कार्य के ठेके देते थे जो सीएमओ बनने के लिए उनकी मदद करते थे। सीबीआई ने ऐसे चार सप्लायर्स को भी अपनी एफआईआर में नामजद किया है, जिन्होंने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ अपने संबंधों का लाभ उठाकर उन तक घूस की रकम पहुंचायी। इसके एवज में मनचाहे डाक्टरों को जिलों में तैनात करवाया।