डॉ कफील पर यूपी पुलिस ने जमानत के बाद लगा दिया NSA, नही हो सकी रिहाई

Dr kafil
डॉ. कफील कोरोना मरीजो की करना चाहते हैं मदद, रिहाई की मांग, तीसरे चरण के रोडमैप के लिए PM को लिखा खत

लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ बयान देने के आरोप में गोरखपुर के डॉक्टर कफील खान को उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने मुंबई से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्हे मथुरा जेल में बन्द किया गया है। वहीं सोमवार को जमानत मिलने के बाद जब शु्क्रवार को कफील जेल से रिहा होने वाले थे तो इससे पहले ही यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई कर दी गयी। अब रासुका लगने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Nsa Imposed On Dr Kafeel After Bail Could Not Release :

डॉक्टर कफील खान पर पिछले साल 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) ने कफील खान को 29 जनवरी को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद डॉ. कफील खान को अलीगढ़ लाया गया था। सुरक्षा कारणो का हवाला देते हुए उसे अलीगढ़ जेल से तुरंत मथुरा जेल स्थानांतरित कर दिया गया। बताया गया कि सोमवार को अलीगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत दे दी थी लेकिन गुरूवार देर शाम मथुरा जेल कागजात पंहुचे थे इस वजह से शुक्रवार सुबह उसकी जमानत होनी थी।

मथुरा जिला कारागार के जेलर अरुण पाण्डेय ने बताया था कि कफील खान की रिहाई का आदेश देर शाम मिला है इसलिए उनकी रिहाई गुरुवार न होकर शुक्रवार की सुबह हो पाएगी। लेकिन अब उनकी रिहाई से पहले ही यूपी पुलिस ने उन पर रासुका लगा दिया। जिससे उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई है। पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे में कहा गया कि एएमयू में अपने भाषण में डॉ. कफील खान ने कथित तौर पर कहा था कि ‘मोटा भाई’ सबको हिंदू और मुसलमान बनने की सीख दे रहे हैं, इंसान बनने की नहीं। यही नही कफील ने कहा था कि सीएए के खिलाफ संघर्ष हमारे अस्तित्व की लड़ाई है।

आपको बता दें कि 2017 में अगस्त माह में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. कफील खान उस समय मीडिया की सुर्खी बन गए थे जब वहां एक साथ बड़ी तादाद में बच्चों की मौत हो गई थी। जिसका कारण ऑक्सीजन की कमी बताया गया था और इस मामले में राज्य सरकार द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

लखनऊ। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ बयान देने के आरोप में गोरखपुर के डॉक्टर कफील खान को उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स ने मुंबई से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद उन्हे मथुरा जेल में बन्द किया गया है। वहीं सोमवार को जमानत मिलने के बाद जब शु्क्रवार को कफील जेल से रिहा होने वाले थे तो इससे पहले ही यूपी पुलिस ने उनके खिलाफ रासुका यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई कर दी गयी। अब रासुका लगने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। डॉक्टर कफील खान पर पिछले साल 12 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) ने कफील खान को 29 जनवरी को मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद डॉ. कफील खान को अलीगढ़ लाया गया था। सुरक्षा कारणो का हवाला देते हुए उसे अलीगढ़ जेल से तुरंत मथुरा जेल स्थानांतरित कर दिया गया। बताया गया कि सोमवार को अलीगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत दे दी थी लेकिन गुरूवार देर शाम मथुरा जेल कागजात पंहुचे थे इस वजह से शुक्रवार सुबह उसकी जमानत होनी थी। मथुरा जिला कारागार के जेलर अरुण पाण्डेय ने बताया था कि कफील खान की रिहाई का आदेश देर शाम मिला है इसलिए उनकी रिहाई गुरुवार न होकर शुक्रवार की सुबह हो पाएगी। लेकिन अब उनकी रिहाई से पहले ही यूपी पुलिस ने उन पर रासुका लगा दिया। जिससे उनकी मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई है। पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमे में कहा गया कि एएमयू में अपने भाषण में डॉ. कफील खान ने कथित तौर पर कहा था कि 'मोटा भाई' सबको हिंदू और मुसलमान बनने की सीख दे रहे हैं, इंसान बनने की नहीं। यही नही कफील ने कहा था कि सीएए के खिलाफ संघर्ष हमारे अस्तित्व की लड़ाई है। आपको बता दें कि 2017 में अगस्त माह में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रवक्ता एवं बाल रोग विशेषज्ञ डा. कफील खान उस समय मीडिया की सुर्खी बन गए थे जब वहां एक साथ बड़ी तादाद में बच्चों की मौत हो गई थी। जिसका कारण ऑक्सीजन की कमी बताया गया था और इस मामले में राज्य सरकार द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था।