जाने क्यों बंद हो रहे हैं देश के सैंकड़ों ATM

जाने क्यों बंद हो रहे हैं देश के सैंकड़ों ATM
जाने क्यों बंद हो रहे हैं देश के सैंकड़ों ATM

नई दिल्ली। एक तरफ जहां सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तमाम कोशिशें कर रह रही हैं वहीं ज़्यादातर लोग अभी भी कैश की लेनदेन पर निर्भर हैं। यही वजह है कि ज़्यादातर लोग एटीएम से कैश निकालते हैं वहीं अब एटीएम मशीनों की संख्या भी पहले से काफी कम होती जा रही है। सख्त नियमों के कारण देश में ATM चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है और यही वजह है कि अब सैकड़ों ATM के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर पूरे देश पर होगा और लोगों को कैश निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

Number Of Atm In India Reduces As Transaction Continue To Grow :

RBI की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में ATM से ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी के बावजूद पिछले दो सालों में ATM की संख्या घटी है। बताया जा रहा है कि एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को लेकर जो नए नियम आए हैं उनके चलते पुराने ATM को चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड और कैश लोडिंग को लेकर भी नियम जारी हुए हैं। इससे एटीएम कंपनियां, ब्राउन लेबल और व्हाइट लेबल एटीएम प्रदाता पहले ही नोटबंदी के दौरान हुए घाटे से जूझ रहे हैं।

ATM की घटती संख्या के पीछे सरकारी बैंकों द्वारा ब्रांचों को कम करने को भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। गौरतलब है कि 2018 के शुरुआती 6 महीनों में पांच असोसिएट बैंकों और एक लोकल बैंक को खरीदने के बाद एसबीआई ने अपनी 1000 ब्रांच बंद कर दीं थी।

नई तकनीकों की मशीनों के कैश लॉजिस्टिक और कैसेट स्वैम मेथड में बदलाव करने में ही 3,500 करोड़ का खर्च आ सकता है। अगर बैंक इस खर्च का बोझ नहीं उठाते हैं तो एटीएम सर्विस देने वाली कंपनियों को इन्हें बंद करने का फैसला लेना पड़ेगा।

नई दिल्ली। एक तरफ जहां सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए तमाम कोशिशें कर रह रही हैं वहीं ज़्यादातर लोग अभी भी कैश की लेनदेन पर निर्भर हैं। यही वजह है कि ज़्यादातर लोग एटीएम से कैश निकालते हैं वहीं अब एटीएम मशीनों की संख्या भी पहले से काफी कम होती जा रही है। सख्त नियमों के कारण देश में ATM चलाना ज्यादा महंगा पड़ रहा है और यही वजह है कि अब सैकड़ों ATM के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। अगर ऐसा होता है तो इसका असर पूरे देश पर होगा और लोगों को कैश निकालने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। RBI की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, देश में ATM से ट्रांजेक्शन में बढ़ोतरी के बावजूद पिछले दो सालों में ATM की संख्या घटी है। बताया जा रहा है कि एटीएम के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर अपग्रेड को लेकर जो नए नियम आए हैं उनके चलते पुराने ATM को चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा कैश मैनेजमेंट स्टैंडर्ड और कैश लोडिंग को लेकर भी नियम जारी हुए हैं। इससे एटीएम कंपनियां, ब्राउन लेबल और व्हाइट लेबल एटीएम प्रदाता पहले ही नोटबंदी के दौरान हुए घाटे से जूझ रहे हैं। ATM की घटती संख्या के पीछे सरकारी बैंकों द्वारा ब्रांचों को कम करने को भी एक बड़ी वजह बताई जा रही है। गौरतलब है कि 2018 के शुरुआती 6 महीनों में पांच असोसिएट बैंकों और एक लोकल बैंक को खरीदने के बाद एसबीआई ने अपनी 1000 ब्रांच बंद कर दीं थी। नई तकनीकों की मशीनों के कैश लॉजिस्टिक और कैसेट स्वैम मेथड में बदलाव करने में ही 3,500 करोड़ का खर्च आ सकता है। अगर बैंक इस खर्च का बोझ नहीं उठाते हैं तो एटीएम सर्विस देने वाली कंपनियों को इन्हें बंद करने का फैसला लेना पड़ेगा।