इंसाफ की आश में यह शख्स माता-पिता को कंधे पर बैठा चला 40 किमी

Odisha Man Walks 40 Km To Court By Carrying His Parents On Shoulders For Justice

भुवनेश्वर। इस देश में आम आदमी को इंसाफ के लिए कितनी मशक्त करनी पड़ती है, किस तरह की तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है इस बात का अंदाज़ा हम तब तक नहीं लगा सकते जब यह खुद पर लागू नहीं होती। हाँ, लेकिन यह बात तो सबको पता ही है कि इस देश में बिना जुगाड़ वाले साधारण इंसान को न्याय मिल पाना रेगिस्तान में पानी ढूढने जैसा है। आए दिन अखबारों व सोशल मीडिया पर तरह-तरह की घटनायें देखने को मिलती है जहां कोई न्याय की उम्मीद में ज़िंदगी की जंग हार जाता है या कोई कोर्ट का चक्कर लगाते-लगाते घनचक्कर बन जाता है। ऐसा ही कुछ उड़ीसा में देखने को मिला है जहां एक शख्स ने इंसाफ की मांग के लिए किन तकलीफ़ों का सामना कर रहा है यह दिखाया है। दरअसल यहां एक शख्स न्याय की खातिर अपने बूढ़े मत-पिता को कावड़ में बैठाकर 40 किलोमीटर तक पैदल चल कोर्ट तक पहुंचा।

श्रवण कुमार की तरह इस शख्स ने पहले एक कावड़ तैयार किया जिसमे अपने बूढ़े माता-पिता को बैठा कोर्ट की तरफ इंसाफ के लिए निकाल पड़ा। यह पूरा मामला राज्य के मयूरभंज का है जहां रहने वाले कार्तिक सिंह का दावा है कि उसके खिलाफ मोरोदा पुलिस ने फर्जी केस लगाते हुए 2009 में 18 दिनों तक जेल में रखा। इस दौरान उसे अपने असहाय माता-पिता को घर में अकेला छोड़ना पड़ा जिस वजह से उनकी तबीयत और खराब हो गयी अब जब इंसाफ के लिए कोर्ट की चौखट तक जाना था वह उन्हें घर में अकेला नहीं छोड़ सकता जिस वजह से उसे ऐसा करना पड़ा।

कार्तिक ने बताया, ‘मैं एक पढ़ा लिखा इंसान हूं, लेकिन मुझे नौकरी नहीं मिल पा रही है और ना ही शादी हो पाई है, क्योंकि मेरे खिलाफ 6-7 साल पहले केस दर्ज किया गया था।’ कार्तिक जब सड़क के रास्ते इस तरह माता-पिता को लेकर जा रहे थे तो उन्हें देखने वाले लोगों का जमावड़ा हो गया

भुवनेश्वर। इस देश में आम आदमी को इंसाफ के लिए कितनी मशक्त करनी पड़ती है, किस तरह की तकलीफ़ों का सामना करना पड़ता है इस बात का अंदाज़ा हम तब तक नहीं लगा सकते जब यह खुद पर लागू नहीं होती। हाँ, लेकिन यह बात तो सबको पता ही है कि इस देश में बिना जुगाड़ वाले साधारण इंसान को न्याय मिल पाना रेगिस्तान में पानी ढूढने जैसा है। आए दिन अखबारों व सोशल मीडिया पर तरह-तरह की घटनायें देखने…