सपा कार्यकाल में आंखे मूंदे रहे खनन विभाग के अफसर, करोड़ों रुपये राजस्व की लगी चपत

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सपा कार्यकाल में आंखे मूंदे रहे खनन विभाग के अफसर, करोड़ों रुपये राजस्व की लगी चपत

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान खनन विभाग के अफसरों की घोर लापरवाही उजागर हुई है। यह लापरवाही कैग की रिपोर्ट आने के बाद सामने आयी है। सरकार में अफसरों की लापरवाही से 656.70 करोड़ के राजस्व की चपत लगी है। कैग ने समय-समय पर प्रतिवेदन भेजकर विभाग के अधिकारियों को इन गड़बड़ियों के लिए चेताया भी था। बावजूद इसके लापरवाह अफसर इसको लेकर ध्यान नहीं दिए।

Officers Of The Mining Department Were Blinded During Sps Tenure Revenue Worth Crores Was Hit :

कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भाजपा सरकार में भी यह सिलसिला जारी है। अलग-अलग मामलों में अधिकारियों की अनदेखी के चलते सरकार को 45.21 करोड़ के राजस्व की चपत लग चुकी है। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि सपा सरकार के कार्यकाल 2012 से 2017 के बीच अवैध रूप से किए गए खनन के खनिज मूल्य की वसूली न किए जाने के 5,219 मामले सामने आए।

इसके चलते 698.30 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। इसी तरह पर्यावरण मंजूरी के बगैर खनन के आठ मामले सामने आए, जिनसे 100.85 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई। पर्यावरण मंजूरी के बिना ईंट मिट्टी के खनन के 4,040 मामले सामने आए। इनसे 129.07 करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लगी। इसी तरह 3,889 ईंट भट्ठा मालिकों से रॉयल्टी व लाइसेंस शुल्क की वसूली नहीं की गई।

इससे सरकार को 27.84 करोड़ के राजस्व की हानि हुई। वहीं बैरियर पर जरूरी शुल्क के कम करने या नहीं जमा होने के 40 मामलों के चलते 84 लाख रुपये का नुकसान हुआ। बता दें कि, 2012 से 2017 के बीच हुई इन गड़बड़ियों के बारे में कैग ने कई बार चेतााया था लेकिन बावजूद खनन विभाग ने वर्ष 2017—18 से 334 मामलों (जिनमें अवैध खनन किया गया) में 26.27 करोड़ के खनिज मूल्य की वसूली ठेकेदारों से नहीं की।

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के कार्यकाल के दौरान खनन विभाग के अफसरों की घोर लापरवाही उजागर हुई है। यह लापरवाही कैग की रिपोर्ट आने के बाद सामने आयी है। सरकार में अफसरों की लापरवाही से 656.70 करोड़ के राजस्व की चपत लगी है। कैग ने समय-समय पर प्रतिवेदन भेजकर विभाग के अधिकारियों को इन गड़बड़ियों के लिए चेताया भी था। बावजूद इसके लापरवाह अफसर इसको लेकर ध्यान नहीं दिए। कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भाजपा सरकार में भी यह सिलसिला जारी है। अलग-अलग मामलों में अधिकारियों की अनदेखी के चलते सरकार को 45.21 करोड़ के राजस्व की चपत लग चुकी है। कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि सपा सरकार के कार्यकाल 2012 से 2017 के बीच अवैध रूप से किए गए खनन के खनिज मूल्य की वसूली न किए जाने के 5,219 मामले सामने आए। इसके चलते 698.30 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। इसी तरह पर्यावरण मंजूरी के बगैर खनन के आठ मामले सामने आए, जिनसे 100.85 करोड़ रुपये के राजस्व की क्षति हुई। पर्यावरण मंजूरी के बिना ईंट मिट्टी के खनन के 4,040 मामले सामने आए। इनसे 129.07 करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लगी। इसी तरह 3,889 ईंट भट्ठा मालिकों से रॉयल्टी व लाइसेंस शुल्क की वसूली नहीं की गई। इससे सरकार को 27.84 करोड़ के राजस्व की हानि हुई। वहीं बैरियर पर जरूरी शुल्क के कम करने या नहीं जमा होने के 40 मामलों के चलते 84 लाख रुपये का नुकसान हुआ। बता दें कि, 2012 से 2017 के बीच हुई इन गड़बड़ियों के बारे में कैग ने कई बार चेतााया था लेकिन बावजूद खनन विभाग ने वर्ष 2017—18 से 334 मामलों (जिनमें अवैध खनन किया गया) में 26.27 करोड़ के खनिज मूल्य की वसूली ठेकेदारों से नहीं की।