देश के सबसे अमीर मंदिरो में एक है यह मंदिर, कमाई जानकर रह जाओगे हैरान !

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आंध्र प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है जिसकी कमाई जानकर आप हैरान रह जायेंगे। जी हां राज्य के चित्तूर जिले में स्थित श्री कालाहस्ती मंदिर की सालाना कमाई सौ करोड़ रुपए से भी अधिक है। यह मंदिर वास्तव में भगवान शिव का मंदिर है, लेकिन यहां राहुकाल की पूजा के साथ- साथ कालसर्प की भी पूजा होती है।

One Of The Richest Temples In The Country This Temple Will Be Known By Earning :

यह मंदिर दक्षिण भारत में भगवान शिव के तीर्थस्‍थानों में अहम स्‍थान रखता है। लगभगर 2 हजार वर्षो से इसे दक्षिण का कैलाश या दक्षिण काशी नाम से भी जाना जाता हैं। यहां भगवान कालहस्तीश्वर के साथ देवी ज्ञानप्रसूनअंबा भी स्‍थापित है।

इस मंदिर का नाम तीन पशुओं श्री यानी मकड़ी, काल यानी सर्प और हस्ती यानी हाथी के नाम पर किया गया है। ऐसी मान्यता है की तीनों ने ही यहां पर भगवान ‌शिव की आराधना करके मुक्ति पाई थी। मकड़ी ने शिवलिंग पर तपस्या करके जाल बनाया, सांप ने शिवलिंग पर लिपटकर आरधना की और हाथी ने शिवलिंग को जल से स्नान करवाया था।

इस मंदिर में तीन विशाल गोपुरम दक्षिण भारत के मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित होता है है, जो स्‍थापत्य की दृष्टि से अनुपम हैं। यही नहीं मंदिर में सौ स्तंभों वाला मंडप भी है, जो अपने आप में अनोखा है।यहां पर विशेष रूप से राहुकाल और कालसर्प की भी पूजा होती है। यहां पर विशेष रूप से नाग प्रतिष्‍ठा पूजा ‌होती है।

आंध्र प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है जिसकी कमाई जानकर आप हैरान रह जायेंगे। जी हां राज्य के चित्तूर जिले में स्थित श्री कालाहस्ती मंदिर की सालाना कमाई सौ करोड़ रुपए से भी अधिक है। यह मंदिर वास्तव में भगवान शिव का मंदिर है, लेकिन यहां राहुकाल की पूजा के साथ- साथ कालसर्प की भी पूजा होती है।यह मंदिर दक्षिण भारत में भगवान शिव के तीर्थस्‍थानों में अहम स्‍थान रखता है। लगभगर 2 हजार वर्षो से इसे दक्षिण का कैलाश या दक्षिण काशी नाम से भी जाना जाता हैं। यहां भगवान कालहस्तीश्वर के साथ देवी ज्ञानप्रसूनअंबा भी स्‍थापित है।इस मंदिर का नाम तीन पशुओं श्री यानी मकड़ी, काल यानी सर्प और हस्ती यानी हाथी के नाम पर किया गया है। ऐसी मान्यता है की तीनों ने ही यहां पर भगवान ‌शिव की आराधना करके मुक्ति पाई थी। मकड़ी ने शिवलिंग पर तपस्या करके जाल बनाया, सांप ने शिवलिंग पर लिपटकर आरधना की और हाथी ने शिवलिंग को जल से स्नान करवाया था।इस मंदिर में तीन विशाल गोपुरम दक्षिण भारत के मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित होता है है, जो स्‍थापत्य की दृष्टि से अनुपम हैं। यही नहीं मंदिर में सौ स्तंभों वाला मंडप भी है, जो अपने आप में अनोखा है।यहां पर विशेष रूप से राहुकाल और कालसर्प की भी पूजा होती है। यहां पर विशेष रूप से नाग प्रतिष्‍ठा पूजा ‌होती है।