अभी और रुलाएगा प्याज, दिसम्बर के अंत तक सस्ता होने की उम्मीद

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अभी और रुलाएगा प्याज, दिसम्बर के अंत तक सस्ता होने की उम्मीद

लखनऊ। काफी समय से लगातार रुला रहे प्याज कीमतें जल्द ही काबू में आने की उम्मीद है। ​हालांकि अभी फुटकर कीमतें सौ रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुुंची हैं। इस माह के अंत तक बाजार में नया प्याज आ जाने से हालात काबू होंगे। राजस्थान से प्याज की आमद शुरू होने के अलावा विदेश से आयातित प्याज भी तब तक बाजार पहुंचने लगेगा।

Onion Will Cry More Expected To Be Cheaper By End Of December :

मौसम की मार से गहराए प्याज के संकट से निपटने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा घटाने का निर्णय किया है। केंद्र से मिले निर्देश के अनुसार थोक व्यापारियों के लिए अब मात्र 25 टन प्याज रखने की सीमा तय की गई है। वहीं, फुटकर व्यापारियों के लिए पांच टन की सीमा निर्धारित की गई है। इससे पहले यह स्टॉक सीमा थोक व्यापारियों को लिए 50 टन और फुटकर व्यापारियों के लिए 10 टन निर्धारित थी। स्टाक सीमा घटाने से महंगे प्याज की जमाखोरी पर रोक लग सकेगी।

सूत्रों का कहना है कि प्याज के दाम सौ रुपये से अधिक होने की वजह शादी के मौजूदा सीजन में इसकी मांग बेतहाशा बढ़ना है। प्याज व्यापारियों का कहना है कि प्याज की कमी जरूर है परंतु हालात बहुत गंभीर नहीं हैं। राजस्थान से प्याज की आपूर्ति सामान्य होने और शादी विवाह का सीजन खत्म होते ही बाजार की गर्मी कम हो जाएगी। प्याज संकट को मीडिया में बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करने से भी हालात बिगड़ते हैं। जमाखोरों के सक्रिय होने के साथ मोहल्लों में सब्जी विक्रेताओं की मनमानी भी बढ़ जाती है।

दरअसल मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र से आने वाले प्याज से उत्तर प्रदेश की पूर्ति हो पाती है क्योंकि प्रदेश में साढ़े चार लाख टन प्याज का उत्पादन होता है और खपत करीब दस लाख टन है। इस बार प्याज के क्षेत्रफल में चार हजार हेक्टेयर वृद्धि की उम्मीद है। प्रदेश में केवल रबी सीजन मेे प्याज का उत्पादन होता है। हरा प्याज बाजार में आ रहा है परंतु गांठ वाला प्याज मार्च तक आएगा।

लखनऊ। काफी समय से लगातार रुला रहे प्याज कीमतें जल्द ही काबू में आने की उम्मीद है। ​हालांकि अभी फुटकर कीमतें सौ रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुुंची हैं। इस माह के अंत तक बाजार में नया प्याज आ जाने से हालात काबू होंगे। राजस्थान से प्याज की आमद शुरू होने के अलावा विदेश से आयातित प्याज भी तब तक बाजार पहुंचने लगेगा। मौसम की मार से गहराए प्याज के संकट से निपटने के लिए सरकार ने स्टॉक सीमा घटाने का निर्णय किया है। केंद्र से मिले निर्देश के अनुसार थोक व्यापारियों के लिए अब मात्र 25 टन प्याज रखने की सीमा तय की गई है। वहीं, फुटकर व्यापारियों के लिए पांच टन की सीमा निर्धारित की गई है। इससे पहले यह स्टॉक सीमा थोक व्यापारियों को लिए 50 टन और फुटकर व्यापारियों के लिए 10 टन निर्धारित थी। स्टाक सीमा घटाने से महंगे प्याज की जमाखोरी पर रोक लग सकेगी। सूत्रों का कहना है कि प्याज के दाम सौ रुपये से अधिक होने की वजह शादी के मौजूदा सीजन में इसकी मांग बेतहाशा बढ़ना है। प्याज व्यापारियों का कहना है कि प्याज की कमी जरूर है परंतु हालात बहुत गंभीर नहीं हैं। राजस्थान से प्याज की आपूर्ति सामान्य होने और शादी विवाह का सीजन खत्म होते ही बाजार की गर्मी कम हो जाएगी। प्याज संकट को मीडिया में बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करने से भी हालात बिगड़ते हैं। जमाखोरों के सक्रिय होने के साथ मोहल्लों में सब्जी विक्रेताओं की मनमानी भी बढ़ जाती है। दरअसल मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र से आने वाले प्याज से उत्तर प्रदेश की पूर्ति हो पाती है क्योंकि प्रदेश में साढ़े चार लाख टन प्याज का उत्पादन होता है और खपत करीब दस लाख टन है। इस बार प्याज के क्षेत्रफल में चार हजार हेक्टेयर वृद्धि की उम्मीद है। प्रदेश में केवल रबी सीजन मेे प्याज का उत्पादन होता है। हरा प्याज बाजार में आ रहा है परंतु गांठ वाला प्याज मार्च तक आएगा।