सिर्फ सीएमओ की हत्याओं में नहीं उजागर हुई अधिकारियों की मनमानी, इन मामलों में भी पुलिस पर बना दबाव

ips brijlal
सिर्फ सीएमओ की हत्याओं में नहीं उजागर हुई अधिकारियों की मनमानी, इन मामलों में भी पुलिस पर बना दबाव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल के उस बयान जिसमें उन्होने कहा कि बसपा सरकार में भ्रष्टाचार के कारण की तीन सीएमओं की हत्याएं हुई थी। यही नहीं सरकार के दबाव में पुलिस ने इन मामलों के गलत खुलासे करके निर्दोषों को जेल भेज दिया। हालाकि बाद में सीबीआई को जांच मिलने पर निर्दोशों को बरी किया गया और दोषियों को जेल हुई। बता दें कि तत्कालीन बसपा सरकार के मंत्री ने अफसरों के साथ मिलकर एनआरएचएम में लूटपाट का कीर्तिमान बनाया था, जिस पर पर्दा डालने के लिए ये तीनों हत्याकांड हुए और फिर पुलिस पर दबाव डालकर गलत खुलासे भी कराए।

Only The Officers Of The Cmo Are Not Arbitrarily Exposed The Pressure On The Police In These Cases Also :

इस मामले में अभी भी वाईएस सचान की जिला कारागार में हुई संदिग्ध हालात में मौत का अभी भी खुलासा नहीं हो सका है। जानकारों का कहना है कि इसी तरह प्रदेश में कई अन्य हाई प्रोफाइल मामलों में भी सरकार के दबाव में पुलिस ने या तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, या फिर निर्दोश लोगों को फंसाकर मामलों के फर्जी खुलासे कर दिए।

बानगी के तौर पर हाल ही में हुए बुलंदशहर कांड में राजनीति से प्रेरित था। घटना में एक इंस्पेक्टर को मौत के घाट उतार दिया है। जिसके बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरना शुरु किया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्दे के पीछे मौजूद लोगों के चेहरे बेनकाब करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन समय के साथ ही वो मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

वहीं लखनऊ स्थिती एटीएस मुख्यालय में करीब एक वर्ष पहले डिप्टी एसपी राजेश साहनी ने खुद को गोली मार ली। उनकी मौत के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही सरकार पर उंगलियां उठने लगी तो मामले की जांच के आदेश दिए गए। इस मामले में जानकारों का कहना है कि सरकार ने अपनी साख बचाने के लिए मामले में दबवा दिया और कुछ ही समय में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

वहीं वर्ष 2017 में हजरतगंज के मीराबाई मार्ग स्थित वीआइपी गेस्ट हाउस के बाहर कर्नाटक कैडर के आईएएस अनुराग तिवारी की संदिग्ध हालात में मौत के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो कई खुलासे हुई। वो कर्नाटक में खनन से जुड़े कई मामलों की जांच कर रहे थे। इस मामले की भी जांच सीबीआई को दी गई। इस मामले में भी जांच टीम में हाल में इसे हादसा करार देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी बृजलाल के उस बयान जिसमें उन्होने कहा कि बसपा सरकार में भ्रष्टाचार के कारण की तीन सीएमओं की हत्याएं हुई थी। यही नहीं सरकार के दबाव में पुलिस ने इन मामलों के गलत खुलासे करके निर्दोषों को जेल भेज दिया। हालाकि बाद में सीबीआई को जांच मिलने पर निर्दोशों को बरी किया गया और दोषियों को जेल हुई। बता दें कि तत्कालीन बसपा सरकार के मंत्री ने अफसरों के साथ मिलकर एनआरएचएम में लूटपाट का कीर्तिमान बनाया था, जिस पर पर्दा डालने के लिए ये तीनों हत्याकांड हुए और फिर पुलिस पर दबाव डालकर गलत खुलासे भी कराए।

इस मामले में अभी भी वाईएस सचान की जिला कारागार में हुई संदिग्ध हालात में मौत का अभी भी खुलासा नहीं हो सका है। जानकारों का कहना है कि इसी तरह प्रदेश में कई अन्य हाई प्रोफाइल मामलों में भी सरकार के दबाव में पुलिस ने या तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, या फिर निर्दोश लोगों को फंसाकर मामलों के फर्जी खुलासे कर दिए।

बानगी के तौर पर हाल ही में हुए बुलंदशहर कांड में राजनीति से प्रेरित था। घटना में एक इंस्पेक्टर को मौत के घाट उतार दिया है। जिसके बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार को घेरना शुरु किया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्दे के पीछे मौजूद लोगों के चेहरे बेनकाब करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन समय के साथ ही वो मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

वहीं लखनऊ स्थिती एटीएस मुख्यालय में करीब एक वर्ष पहले डिप्टी एसपी राजेश साहनी ने खुद को गोली मार ली। उनकी मौत के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही सरकार पर उंगलियां उठने लगी तो मामले की जांच के आदेश दिए गए। इस मामले में जानकारों का कहना है कि सरकार ने अपनी साख बचाने के लिए मामले में दबवा दिया और कुछ ही समय में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

वहीं वर्ष 2017 में हजरतगंज के मीराबाई मार्ग स्थित वीआइपी गेस्ट हाउस के बाहर कर्नाटक कैडर के आईएएस अनुराग तिवारी की संदिग्ध हालात में मौत के बाद जब मामले की जांच शुरू हुई तो कई खुलासे हुई। वो कर्नाटक में खनन से जुड़े कई मामलों की जांच कर रहे थे। इस मामले की भी जांच सीबीआई को दी गई। इस मामले में भी जांच टीम में हाल में इसे हादसा करार देते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी।