आगरा के ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी का पार्ट-2

OP Chains
ओपी चेंस ग्रुप की चोरी जारी, प्रदेश प्रशासन नतमस्तक.....?

आगरा। इस खबर के पहले हिस्से (पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) में हम आपको बता चुके हैं कि आगरा के नामी बिल्डर, ओपी चेंस ग्रुप ने धोखाधड़ी करके आगरा में अपने दो नए रियल इस्टेट प्रोजेक्ट लांच किए हैं। पहला प्रोजेक्ट एं​थेला के नाम से आवास विकास सेक्टर 12 D में चालू है तो दूसरा सेक्टर 15 में एंथम नाम से।

Op Chains Fraud Part 2 :

एंथम और एंथेला प्रोजेक्ट जिस जमीन पर खड़े किए जा रहे हैं उसे ओपी चेंस ग्रुप ने अपने एक सहयोगी की कंपनी की मदद और आवास विकास परिषद् के अधिकारियों की मिली भगत से कागजी हेरफेर और कानूनी दांव पेंच बैठाकर  हथियाया है। आगरा शहर के बीचो बीच आने वाली यह जमीन पिछले चार दशकों से भारत नगर सहकारी अवास समिति  और आवास विकास परिषद् के बीच कानूनी विवाद में फंसी थी। इसी विवाद को आधार बना कर पूरी साजिश की पटकथा लिखी गई।

धोखाधड़ी कर कब्जाई गई, इस जमीन का क्षेत्रफल 144869.36 वर्गमीटर है, जिसे साल 1970 में आवास विकास परिषद् ने अधिग्रहित किया था। उत्तर प्रदेश के सहकारी कानून के तहत रजिस्टर्ड भारत नगर सहकारी आवास समिति के सदस्यों ने सरकारी मुआवजा अस्वीकार करते हुए आवास विकास के अधिग्रहण के विरोध में अदालत की शरण ली थी। करीब चार दशकों तक आवास विकास परिषद् ने इस जमीन का कोई प्रयोग नहीं किया और साल 2013 में भू अधिग्रहण कानून में हुए संशोधन ने इस विवाद के अंत में अहम भूमिका निभाई। नए संशोधन के मुताबिक सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि 5 सालों तक सरकार द्वारा प्रयोग में न लाए जाने पर अधिग्रहण रद्द माना गया।

एक ओर कानूनी लिहाज से भारत नगर सहकारी आवास समिति के हाथ मजबूत हुए थे, तो दूसरी ओर शहर के बीचों बीच मौजूद सोना बन चुकी इस जमीन पर कई रियल इस्टेट डेवलपर्स की नजरें जम गईं थीं। नियत बहुतों की खराब थी, लेकिन जमीन की असली कीमत चुकाना किसी के बस का नहीं था। जिसका कारण था जमीन की वास्तविक बाजार कीमत जो 2013-14 में करीब 40,000 रुपए प्रति वर्गमीटर थी।

यहीं से यही से शहर के सबसे बड़े कारोबारी ओपी चेंस ग्रुप ने इस जमीन को हासिल करने के लिए कोशिशें शुरू कीं, जिन्हें साजिश कहना ज्यादा बेहतर होगा। ओपी चेंस ग्रुप के मालिकान के एक करीबी शोभिक गोयल को योजनाबद्ध तरीके से भारत नगर सहकारी आवास समिति के प्रबंधन का हिस्सा बनाया गया। करीब दो सालों तक समिति का सचिव रहने के बाद शोभिक गोयल ने समिति की जमीन के भौतिक कब्जे को अपनी कंपनी भारत हाउसिंग के नाम करवाने का षड्यंत्र रचा। धोखाधड़ी करके लिए गए फर्जी भौतिक कब्जे के बूते ही ओपी चेंस ने उक्त जमीन पर 3000 करोड़ के दो प्रोजेक्ट लांच कर बाजार से कई सौ करोड़ रुपए की उगाही कर ली है।

इसके आगे की कहानी हम आपको चरणबद्ध तरीके से तारीखों के साथ समझाते हैं —

  • शोभिक गोयल ने 26 जून 2016 को भारत नगर सहकारी आवास समिति की 144869.36 वर्गमीटर जमीन का भौतिक कब्जा बिना किसी सौदेबाजी या आर्थिक लेनदेन के अपने स्वामित्व वाली भारत नगर हाउसिंग नामक कंपनी के नाम पर प्राप्त कर लिया।
  •  27 जून 2016 को आवास विकास परिषद् ने ओपी चेंस ग्रुप के इशारे पर उक्त जमीन की नीलामी करवाई। जिसमें शर्त रखी गई कि जमीन की अधिकत बोली लगाने वाले को यथा स्थिति कागजी कब्जा दे दिया जाएगा, जबकि भौतिक कब्जा लेने के लिए खरीददार को समिति से नि​जी स्तर पर समझौता करना होगा।
  • नीलामी में शोभिक गोयल के अलावा ओपी चेंस ग्रुप के ही एक कथित सहयोगी कंपनी ने हिस्सा लिया। योजना के मुताबिक 166.01 करोड़ की मूल कीमत से आगे बढ़ते हुए 166.1157 करोड़ की बोली लगाकर शोभिक गोयल कागजी कब्जा प्राप्त करने में कामयाब रहे।
  • 14 जुलाई 2016 को नीलामी की रकम का 30 प्रतिशत यानी करीब 50 करोड़ रुपए का भुगतान और शेष राशि 25 त्रैमासिक किश्तों में चुकाने की छूट मिलने के साथ ही परिषद् ने आधिकारिक रूप से उक्त जमीन का कागजी कब्जा शोभिक गोयल की कंपनी भारत नगर हाउसिंग को दे दिया।
  • 5 अक्टूबर 2016 को शोभिक गोयल की ओर से परिषद् को जानकारी दी गई कि नीलामी की शर्त के मुताबिक उनकी कंपनी ने 26 जून 2016 को एक समझौते के तहत समिति से जमीन का भौतिक कब्जा प्राप्त कर लिया था।
  • 7 अक्टूबर 2016 को आवास विकास परिषद् के संपत्ति अधिकारी ने शोभिक गोयल और भारत नगर सहकारी आवास समिति के बीच हुए भौतिक कब्जे के समझौते को सहकारिता विभाग को भेज कर औपचारिक रिपोर्ट मांगी।
  • 21 अक्टूबर को आगरा के दो सहकारी अधिकारी (आवास) हृदयराम पाल और विजय कुमार सिंह ने आवास विकास परिषद् के संपत्ति अधिकारी को भौतिक कब्जे का समझौता फर्जी होने की जानकारी दी। जिसमें कहा गया कि 26 जून 2017 को भारत नगर सहकारी आवास समिति की प्रबंधक समिति के रिकार्ड में ऐसे किसी प्रस्ताव का जिक्र नहीं है, जो शोभिक गोयल की ओर से पेश किया गया है।
  • सहकारी अधिकारियों ने भौतिक कब्जे के समझौते को अवैध बताते हुए परिषद् को बताया कि यह समझौता नीलामी की तारीख से ठीक एक दिन पहले का है, जबकि नीलामी की शर्त के मुताबिक भौतिक कब्जा नीलामी में सफल होने के बाद लेना था। यानी 27 जून 2016 को हुई नीलामी के बाद लेना था।

ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी के साथ आवास विकास परिषद् के अधिकारियों की मिली भगत के पूरे खेल का पर्दाफाश हम इस स्टोरी के तीसरे पार्ट में करेंगे।

आगरा। इस खबर के पहले हिस्से (पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें) में हम आपको बता चुके हैं कि आगरा के नामी बिल्डर, ओपी चेंस ग्रुप ने धोखाधड़ी करके आगरा में अपने दो नए रियल इस्टेट प्रोजेक्ट लांच किए हैं। पहला प्रोजेक्ट एं​थेला के नाम से आवास विकास सेक्टर 12 D में चालू है तो दूसरा सेक्टर 15 में एंथम नाम से।एंथम और एंथेला प्रोजेक्ट जिस जमीन पर खड़े किए जा रहे हैं उसे ओपी चेंस ग्रुप ने अपने एक सहयोगी की कंपनी की मदद और आवास विकास परिषद् के अधिकारियों की मिली भगत से कागजी हेरफेर और कानूनी दांव पेंच बैठाकर  हथियाया है। आगरा शहर के बीचो बीच आने वाली यह जमीन पिछले चार दशकों से भारत नगर सहकारी अवास समिति  और आवास विकास परिषद् के बीच कानूनी विवाद में फंसी थी। इसी विवाद को आधार बना कर पूरी साजिश की पटकथा लिखी गई।धोखाधड़ी कर कब्जाई गई, इस जमीन का क्षेत्रफल 144869.36 वर्गमीटर है, जिसे साल 1970 में आवास विकास परिषद् ने अधिग्रहित किया था। उत्तर प्रदेश के सहकारी कानून के तहत रजिस्टर्ड भारत नगर सहकारी आवास समिति के सदस्यों ने सरकारी मुआवजा अस्वीकार करते हुए आवास विकास के अधिग्रहण के विरोध में अदालत की शरण ली थी। करीब चार दशकों तक आवास विकास परिषद् ने इस जमीन का कोई प्रयोग नहीं किया और साल 2013 में भू अधिग्रहण कानून में हुए संशोधन ने इस विवाद के अंत में अहम भूमिका निभाई। नए संशोधन के मुताबिक सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि 5 सालों तक सरकार द्वारा प्रयोग में न लाए जाने पर अधिग्रहण रद्द माना गया।एक ओर कानूनी लिहाज से भारत नगर सहकारी आवास समिति के हाथ मजबूत हुए थे, तो दूसरी ओर शहर के बीचों बीच मौजूद सोना बन चुकी इस जमीन पर कई रियल इस्टेट डेवलपर्स की नजरें जम गईं थीं। नियत बहुतों की खराब थी, लेकिन जमीन की असली कीमत चुकाना किसी के बस का नहीं था। जिसका कारण था जमीन की वास्तविक बाजार कीमत जो 2013-14 में करीब 40,000 रुपए प्रति वर्गमीटर थी।यहीं से यही से शहर के सबसे बड़े कारोबारी ओपी चेंस ग्रुप ने इस जमीन को हासिल करने के लिए कोशिशें शुरू कीं, जिन्हें साजिश कहना ज्यादा बेहतर होगा। ओपी चेंस ग्रुप के मालिकान के एक करीबी शोभिक गोयल को योजनाबद्ध तरीके से भारत नगर सहकारी आवास समिति के प्रबंधन का हिस्सा बनाया गया। करीब दो सालों तक समिति का सचिव रहने के बाद शोभिक गोयल ने समिति की जमीन के भौतिक कब्जे को अपनी कंपनी भारत हाउसिंग के नाम करवाने का षड्यंत्र रचा। धोखाधड़ी करके लिए गए फर्जी भौतिक कब्जे के बूते ही ओपी चेंस ने उक्त जमीन पर 3000 करोड़ के दो प्रोजेक्ट लांच कर बाजार से कई सौ करोड़ रुपए की उगाही कर ली है।इसके आगे की कहानी हम आपको चरणबद्ध तरीके से तारीखों के साथ समझाते हैं —
  • शोभिक गोयल ने 26 जून 2016 को भारत नगर सहकारी आवास समिति की 144869.36 वर्गमीटर जमीन का भौतिक कब्जा बिना किसी सौदेबाजी या आर्थिक लेनदेन के अपने स्वामित्व वाली भारत नगर हाउसिंग नामक कंपनी के नाम पर प्राप्त कर लिया।
  •  27 जून 2016 को आवास विकास परिषद् ने ओपी चेंस ग्रुप के इशारे पर उक्त जमीन की नीलामी करवाई। जिसमें शर्त रखी गई कि जमीन की अधिकत बोली लगाने वाले को यथा स्थिति कागजी कब्जा दे दिया जाएगा, जबकि भौतिक कब्जा लेने के लिए खरीददार को समिति से नि​जी स्तर पर समझौता करना होगा।
  • नीलामी में शोभिक गोयल के अलावा ओपी चेंस ग्रुप के ही एक कथित सहयोगी कंपनी ने हिस्सा लिया। योजना के मुताबिक 166.01 करोड़ की मूल कीमत से आगे बढ़ते हुए 166.1157 करोड़ की बोली लगाकर शोभिक गोयल कागजी कब्जा प्राप्त करने में कामयाब रहे।
  • 14 जुलाई 2016 को नीलामी की रकम का 30 प्रतिशत यानी करीब 50 करोड़ रुपए का भुगतान और शेष राशि 25 त्रैमासिक किश्तों में चुकाने की छूट मिलने के साथ ही परिषद् ने आधिकारिक रूप से उक्त जमीन का कागजी कब्जा शोभिक गोयल की कंपनी भारत नगर हाउसिंग को दे दिया।
  • 5 अक्टूबर 2016 को शोभिक गोयल की ओर से परिषद् को जानकारी दी गई कि नीलामी की शर्त के मुताबिक उनकी कंपनी ने 26 जून 2016 को एक समझौते के तहत समिति से जमीन का भौतिक कब्जा प्राप्त कर लिया था।
  • 7 अक्टूबर 2016 को आवास विकास परिषद् के संपत्ति अधिकारी ने शोभिक गोयल और भारत नगर सहकारी आवास समिति के बीच हुए भौतिक कब्जे के समझौते को सहकारिता विभाग को भेज कर औपचारिक रिपोर्ट मांगी।
  • 21 अक्टूबर को आगरा के दो सहकारी अधिकारी (आवास) हृदयराम पाल और विजय कुमार सिंह ने आवास विकास परिषद् के संपत्ति अधिकारी को भौतिक कब्जे का समझौता फर्जी होने की जानकारी दी। जिसमें कहा गया कि 26 जून 2017 को भारत नगर सहकारी आवास समिति की प्रबंधक समिति के रिकार्ड में ऐसे किसी प्रस्ताव का जिक्र नहीं है, जो शोभिक गोयल की ओर से पेश किया गया है।
  • सहकारी अधिकारियों ने भौतिक कब्जे के समझौते को अवैध बताते हुए परिषद् को बताया कि यह समझौता नीलामी की तारीख से ठीक एक दिन पहले का है, जबकि नीलामी की शर्त के मुताबिक भौतिक कब्जा नीलामी में सफल होने के बाद लेना था। यानी 27 जून 2016 को हुई नीलामी के बाद लेना था।
ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी के साथ आवास विकास परिषद् के अधिकारियों की मिली भगत के पूरे खेल का पर्दाफाश हम इस स्टोरी के तीसरे पार्ट में करेंगे।