आगरा के ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी पार्ट-3

आगरा के ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी पार्ट-3
आगरा के ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी पार्ट-3

लखनऊ। अब तक हम आपको आगरा के नामी बिल्डर ओपी चेंस ग्रुप की धोखाधड़ी शीर्षक के तहत पार्ट-1 और पार्ट-2 में अपने पाठकों को बता चुके हैं कि किस तरह से इस बिल्डर ने आगरा शहर में आवास विकास सेक्टर 12 डी और सेक्टर 15 में सरकारी अधिकारियों की मिली भगत से गैरकानूनी तरीके जमीन कब्जा कर एंथेला और एंथम नाम से प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। आगरा शहर के पार्श इलाके में बन रहे इन प्रोजेक्ट्स की बड़े स्तर पर बुकिंग हो चुकी है, जिसे कानूनी लिहाज से ठगी कहना जायज होगा। ओपी चेंस ग्रुप की इस ठगी का शिकार वे लोग बन रहे हैं जिन्होंने आगरा के एंथेला और एंथम ग्रुप में अपना आशियाना बसाने का सपना देखते हुए फ्लैट की बुकिंग करवाई है। ओपी चेंस ग्रुप की इस ठगी का शिकार वे बैंक भी हुए हैं जो इन प्रोजेक्टस में बुकिंग करवाने वाले ग्राहकों को लोन की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

क्या है ओपी चेंस ग्रुप की ठगी का फार्मूला —

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जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि ओपी चेंस ग्रुप ने जिस 144869.3 वर्गमीटर की जमीन पर एंथेला और एंथम प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, उस जमीन को लेकर 45 सालों तक आवास विकास परिषद् और आगरा के किसानों की भारत नगर सहकारी आवास समिति के बीच विवाद था। इसी विवाद का फायदा ओपी चेंस ग्रुप ने उठाया और कानूनी आधार को नजरंदाज कर इस जमीन की नीलामी का षड्यंत्र तैयार किया गया।

इस षड्यंत्र का मुख्य सूत्रधार ओपी चेंस ग्रुप के प्रमोटर्स का बेहद करीबी आवास विकास परिषद् आगरा का एक इंजीनियर है। इसी इंजीनियर ने ओपी चेंस ग्रुप के लिए आगरा कमिश्नर के कार्यालय से लेकर लखनऊ सचिवालय तक कनेक्शन बैठाए। ओपी चेंस ग्रुप को यह जमीन दिलाने के लिए नीचे से लेकर ऊपर तक बैठे अधिकारियों को उनकी हैसियत के हिसाब से उपकृत किया गया। सारे कानूनी पेंचों को नोटों की गड्डियों के नीचे दबाते हुए, 144869.3 वर्गमीटर जमीन की नीलामी का शासनादेश तैयार हुआ। जिसकी शर्तें ओपी चेंस ग्रुप के फायदे को ध्यान में रखकर तैयार की गईं।

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आगरा से लेकर लखनऊ तक बैठे सभी अधिकारियों को मालूम था कि यह काम गैरकानूनी है, लेकिन सोने की चमक से चौंध में अंधे इन जिम्मेदार लोगों सबकुछ नजरंदाज कर दिया। आनन फानन में जमीन की नीलामी करवाई गई, और आवास विकास परिषद् ने जमीन पर कानूनी कब्जा ओपी चेंस ग्रुप के सहयोगी शोभिक गोयल की कंपनी के नाम कर दिया।

पर्दाफाश के सूत्रों की माने तो ये इंजीनियर अपने सेवानिवृत्त होने की तैयारी कर रहा है और आजकल ओपी चेंस ग्रुप के निर्माणाधीन इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर अपना अधिकांश समय व्यतीत करता है।

आवास विकास की नीलामी से मिले कागजी कब्जे ने अवैध को बना दिया वैध —

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कहते हैं कि सरकारी कागज में बहुत ताकत होती है। इतनी ताकत कि किसी जिन्दा को मुर्दा और मुर्दा को जिन्दा साबित किया जा सकता है। ओपी चेंस ग्रुप ने भी यही फार्मूला अपनाया। सरकारी नीलामी में जमीन की कीमत चुकाई और सरकारी रुक्का लेकर रातों रात प्रोजेक्ट शुरू कर दिए।

जब सरकारी मोहर लगा कागज ​हाथ में हो और हाथ ओपी चेंस ग्रुुप के मालिकन का हो तो आगरा जैसे शहर में न कोई बैंक पड़ताल करती है और ना ही कोई सरकारी दफ्तर। परिणाम स्वरूप ओपी चेंस ग्रुप के दोनों प्रोजेक्ट्स को एक के बाद एक सरकारी प्रमाणपत्र और अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलते गए। इन प्रोजेक्टों को मिले सरकारी अनुमतियों और अनापत्तियों को देखते हुए बैंकों ने भी एंथेला और एंथम प्रोजेक्ट्स में फ्लैट बुक करवाने वालों को लोन की सुविधा देना शुरू कर दिया।

आवास विकास परिषद् की एक फर्जी नीलामी के कारण हजारों निवोशकों की पूंजी दांव पर —

एक छोटे परिवार वाला आम नौकरीपेशा करने वाला शहरी आदमी आज किन परिस्थितियों में अपने घर का सपना देखता है यह किसी से छुपा नहीं है। खून पसीने की गाढ़ी कमाई, सालों तक अपनी छोटी छोटी जरूरतों का गला घोट कर एक आदमी अपने परिवार के लिए अपनी छत का जुगाड़ करता है। जिसके लिए अपनी सालों की बचत और बैंकों के लोन लेता है।

सालों का सपना जब हकीकत में बदलता नजर आ रहा हो तभी पता चले कि उसकी चुकाई कीमत चंद ठगों के हाथों में चली गई है, तो अंदाजा लगाईये कि उस पर क्या बीतेगी? शायद ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके बारे में आवास विकास परिषद् के उन अधिकारियों ने नहीं सोचा होगा जिन्होंने ओपी चेंस ग्रुप की योजना पर चलते हुए किसानों की जमीन को बिना किसी कानूनी अधिकार के नीलमा कर दिया।

इस फर्जी नीलामी ने अपना पहला शिकार उन किसानों को बनाया जिनकी 500 करोड़ की जमीन 50 करोड़ में अप्रत्यक्ष रूप से ओपी चेंस ग्रुप को मिली। अब इसका दूसरा शिकार वे ग्राहक हो रहे हैं हजारों करोड़ रूपए का निवेश उस जमीन पर खड़े हो रहे प्रोजेक्ट्स में कर धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं।

पर्दाफाश अपनी इस मुहिम के अगले अंक में उस भ्रष्टाचार का खुलासा करेगा जिसने ओपी चेंस ग्रुप के लिए हजारों करोड़ के मुनाफे का रास्ता तैयार किया।

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