हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं दर्ज हुआ किसानों का नाम, ओपी चेंस के रसूख के आगे नतमस्तक आगरा प्रशासन

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आगरा। आगरा के बहुचर्चित रियल स्टेट कारोबारी ओपी चेंस के रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी विवादित जमीन पर लगातार निर्माण कार्य जारी है और कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर एंथम प्रोजेक्ट पर लगातार निर्माण कार्य जारी है। उच्च न्यायालय पहले ही उस जमीन को विवादित करार दे चुका है और उसे यथास्थित रहने के आदेश दे चुका है। इसी के साथ कोर्ट ने उक्त जमीन पर मालिकाना हक रखने वाले गरीब किसानों का नाम दर्ज कराने का भी आदेश दे दिया है। बावजूद इसके आगरा जिला प्रशासन के कान पर जू तक नहीं रेंग रही है। ओपी चेंस ग्रुप की शहर में धमक का अंदाजा इस बात से साफ लगाया जा सकता है कि अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी उक्त मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे है।

Op Chains Group Scam In Agra :

एंथम प्रोजेक्ट की शुरूआत होते ही पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से लेकर कोर्ट तक के चक्कर लगाने शुरु कर दिए थे। मामले का संज्ञान कोर्ट ने लिया और कारोबारी से जमीन के कागजात लेकर पेश होने का आदेश दिया। कारोबारी का कहना था कि उन्होने उक्त जमीन आवास विकास परिषद से खरीदी है। हालांकि ओपी चेंस ग्रुप कोर्ट में कागज पेश नहीं कर सका और समय पर समय मांगते रहे। जिसके बाद कोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश दिया कि 17 अप्रैल 2019 तक उक्त जमीन असली मालिकों का नाम दर्ज कराए। फिर भी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उक्त जमीन किसानों के नाम दर्ज नहीं की।

विदित हो कि जमीन के असली मालिक विजय सिंह, जय सिंह, गुडृडू, प्रदीप सिंह, महेन्द्र सिंह, अजब सिंह, प्रेम सिंह, बंदना हैं।

ये है पूरा मामला-

ओपी चेंस ग्रुप द्वारा सेक्टर 15 की जिस जमीन पर एंथम प्रोजेक्ट खड़ा हो रहा है, उसमें कई किसानों की जमीनें भी शामिल हैं। ये किसान करीब 4 दशकों से अपनी जमीन के मालिकाना हक के लिए आवास विकास परिषद् से कानूनी लड़ाई लड़ते आ रहे हैं और जमीन पर क़ाबिज़ हैं। साल 2016 में आवास विकास परिषद से इस विवादित जमीन को खुली ​नीलामी में खरीदने वाले ओपी चेंस ग्रुप के मालिकान शोभिक गोयल को परिषद की शर्त के मुताबिक इन किसानों से निजी स्तर पर विवाद का निपटारा करना था। जिसके बाद ही परिषद् की ओर से शोभिक गोयल को जमीन का भौतिक कब्जा मिल सकता था।

परिषद की शर्तों को पूरा करने के लिए शोभिक गोयल ने इन किसानों से उनकी जमीन का सौदा किया। जमीन के सौदे को लेकर किसानों के साथ शोभिक गोयल ने अलग—अलग इकरारनामे किए। जिनमें जमीन की कुछ कीमत दिए जाने और सौदा पक्का होने का जिक्र किया गया। इन इकरारनामों के मुताबिक शोभिक गोयल ने किसानों से जमीन की रजिस्ट्री करवाने के लिए कुछ समय की मांगा था। जिसका जिक्र इकरारनामों में भी किया गया है।

किसानों का कहना है कि शोभिक गोयल ने उनकी जमीन पर गेट बनाने और बाउंड्रीवॉल बनाने के लिए मौखिक सहमति मांगी थी। चूंकि दोनों पक्षों के बीच सौदे की बात पक्की थी इसलिए किसानों इस अपनी जमीन की कीमत मिलने का इंतजार करते रहे। वहीं शोभिक गोयल ने उनकी जमीन को अपने ​प्रोजेक्ट के माध्यम से बेंचना भी शुरू कर दिया।

अदालत ने पूछा जब किसानों को मालिक माना तो क्यों नहीं चुकाई कीमत —

अदालत ने किसानों और ओपी चेंस ग्रुप के बीच हुए इकरारनामों के आधार पर शोभिक गोयल का पक्ष रख रहे वकीलों से पूछा कि जिन किसानों को जमीन का मालिक बताकर इकरारनामा किया था, तो एक साल बाद उनके स्वामित्व को नकारने का प्रतिवादी पक्ष के पास क्या आधार है ? जब इकरारनामे में जमीन के बैनामे के लिए एक साल का समय मांगा गया था तो किसानों को जमीन की पूरी कीमत देकर बैनामा क्यों नहीं करवाया ?

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आगरा। आगरा के बहुचर्चित रियल स्टेट कारोबारी ओपी चेंस के रसूख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी विवादित जमीन पर लगातार निर्माण कार्य जारी है और कोर्ट के आदेशों को दरकिनार कर एंथम प्रोजेक्ट पर लगातार निर्माण कार्य जारी है। उच्च न्यायालय पहले ही उस जमीन को विवादित करार दे चुका है और उसे यथास्थित रहने के आदेश दे चुका है। इसी के साथ कोर्ट ने उक्त जमीन पर मालिकाना हक रखने वाले गरीब किसानों का नाम दर्ज कराने का भी आदेश दे दिया है। बावजूद इसके आगरा जिला प्रशासन के कान पर जू तक नहीं रेंग रही है। ओपी चेंस ग्रुप की शहर में धमक का अंदाजा इस बात से साफ लगाया जा सकता है कि अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी उक्त मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे है। एंथम प्रोजेक्ट की शुरूआत होते ही पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन से लेकर कोर्ट तक के चक्कर लगाने शुरु कर दिए थे। मामले का संज्ञान कोर्ट ने लिया और कारोबारी से जमीन के कागजात लेकर पेश होने का आदेश दिया। कारोबारी का कहना था कि उन्होने उक्त जमीन आवास विकास परिषद से खरीदी है। हालांकि ओपी चेंस ग्रुप कोर्ट में कागज पेश नहीं कर सका और समय पर समय मांगते रहे। जिसके बाद कोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश दिया कि 17 अप्रैल 2019 तक उक्त जमीन असली मालिकों का नाम दर्ज कराए। फिर भी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उक्त जमीन किसानों के नाम दर्ज नहीं की। विदित हो कि जमीन के असली मालिक विजय सिंह, जय सिंह, गुडृडू, प्रदीप सिंह, महेन्द्र सिंह, अजब सिंह, प्रेम सिंह, बंदना हैं।

ये है पूरा मामला-

ओपी चेंस ग्रुप द्वारा सेक्टर 15 की जिस जमीन पर एंथम प्रोजेक्ट खड़ा हो रहा है, उसमें कई किसानों की जमीनें भी शामिल हैं। ये किसान करीब 4 दशकों से अपनी जमीन के मालिकाना हक के लिए आवास विकास परिषद् से कानूनी लड़ाई लड़ते आ रहे हैं और जमीन पर क़ाबिज़ हैं। साल 2016 में आवास विकास परिषद से इस विवादित जमीन को खुली ​नीलामी में खरीदने वाले ओपी चेंस ग्रुप के मालिकान शोभिक गोयल को परिषद की शर्त के मुताबिक इन किसानों से निजी स्तर पर विवाद का निपटारा करना था। जिसके बाद ही परिषद् की ओर से शोभिक गोयल को जमीन का भौतिक कब्जा मिल सकता था। परिषद की शर्तों को पूरा करने के लिए शोभिक गोयल ने इन किसानों से उनकी जमीन का सौदा किया। जमीन के सौदे को लेकर किसानों के साथ शोभिक गोयल ने अलग—अलग इकरारनामे किए। जिनमें जमीन की कुछ कीमत दिए जाने और सौदा पक्का होने का जिक्र किया गया। इन इकरारनामों के मुताबिक शोभिक गोयल ने किसानों से जमीन की रजिस्ट्री करवाने के लिए कुछ समय की मांगा था। जिसका जिक्र इकरारनामों में भी किया गया है। किसानों का कहना है कि शोभिक गोयल ने उनकी जमीन पर गेट बनाने और बाउंड्रीवॉल बनाने के लिए मौखिक सहमति मांगी थी। चूंकि दोनों पक्षों के बीच सौदे की बात पक्की थी इसलिए किसानों इस अपनी जमीन की कीमत मिलने का इंतजार करते रहे। वहीं शोभिक गोयल ने उनकी जमीन को अपने ​प्रोजेक्ट के माध्यम से बेंचना भी शुरू कर दिया।

अदालत ने पूछा जब किसानों को मालिक माना तो क्यों नहीं चुकाई कीमत —

अदालत ने किसानों और ओपी चेंस ग्रुप के बीच हुए इकरारनामों के आधार पर शोभिक गोयल का पक्ष रख रहे वकीलों से पूछा कि जिन किसानों को जमीन का मालिक बताकर इकरारनामा किया था, तो एक साल बाद उनके स्वामित्व को नकारने का प्रतिवादी पक्ष के पास क्या आधार है ? जब इकरारनामे में जमीन के बैनामे के लिए एक साल का समय मांगा गया था तो किसानों को जमीन की पूरी कीमत देकर बैनामा क्यों नहीं करवाया ?

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