OPEC ने बढ़ाई मोदी सरकार की मुसीबत, फिर से बढ़ सकते हैं तेल के दाम

opec and pm modi
OPEC ने बढ़ाई मोदी सरकार की मुसीबत, फिर से बढ़ सकते तेल के दाम

नई दिल्ली। ओपेक सदस्यों समेत 10 अन्य तेल उत्पादक देशों ने कच्चे तेल की गिरती कीमत थामने के मकसद से तेल उत्पादन में रोजाना 1.2 मिलियन बैरल कटौती का फैसला किया हैं। जिससे मोदी सरकार की मुसीबतें फिर से बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि इससे तेल की कीमते एक बार फिर से बढ़ सकती है।

Opec Agrees Oil Output Cut To Prop Up Prices In Fresh Challenge For Modi Govt Ahead :

बता दें कि ओपेक देशों के बीच हुआ समझौता यूं तो एक जनवरी से प्रभावी होगा, लेकिन पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी अभी से शुरु हो गई है। ओपेक के इस फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब पांच फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। अब ओपेक के फैसले के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने वाला है, जो आगामी लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।

बता दें कि दुनिया भर में तेल उत्पादन का करीब पचास फीसदी हिस्सा ओपेक और उसके साझेदार देशों से ही आता है। ओपेक की हुई अहम बैठक में यह एकराय बनी कि तेल उत्पादन अधिक होने की वजह से पिछले दो महीने में कीमतें 30% से ज्यादा गिरी हैं।

बता दें कि 12 नवंबर 2014 से लेकर 31 जनवरी 2016 तक केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर नौ बार एक्साइज़ में बढ़ोत्तरी की थे, जिससे पेट्रोल की कीमत में 9.94 रुपये तथा डीजल में 11.71 रुपये का इजाफा हुआ था। हालांकि बीते दिनों आम लोगों को तेल की बढ़ती कीमतों से राहत के लिए सरकार ने एक्साइज़ ड्यूट में दो बार कुल 3.50 रुपये की कटौती की थी।

नई दिल्ली। ओपेक सदस्यों समेत 10 अन्य तेल उत्पादक देशों ने कच्चे तेल की गिरती कीमत थामने के मकसद से तेल उत्पादन में रोजाना 1.2 मिलियन बैरल कटौती का फैसला किया हैं। जिससे मोदी सरकार की मुसीबतें फिर से बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि इससे तेल की कीमते एक बार फिर से बढ़ सकती है।बता दें कि ओपेक देशों के बीच हुआ समझौता यूं तो एक जनवरी से प्रभावी होगा, लेकिन पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोत्तरी अभी से शुरु हो गई है। ओपेक के इस फैसले के बाद कच्चे तेल की कीमतों में करीब पांच फीसदी बढ़ोत्तरी हुई है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। अब ओपेक के फैसले के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ने वाला है, जो आगामी लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।बता दें कि दुनिया भर में तेल उत्पादन का करीब पचास फीसदी हिस्सा ओपेक और उसके साझेदार देशों से ही आता है। ओपेक की हुई अहम बैठक में यह एकराय बनी कि तेल उत्पादन अधिक होने की वजह से पिछले दो महीने में कीमतें 30% से ज्यादा गिरी हैं।बता दें कि 12 नवंबर 2014 से लेकर 31 जनवरी 2016 तक केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर नौ बार एक्साइज़ में बढ़ोत्तरी की थे, जिससे पेट्रोल की कीमत में 9.94 रुपये तथा डीजल में 11.71 रुपये का इजाफा हुआ था। हालांकि बीते दिनों आम लोगों को तेल की बढ़ती कीमतों से राहत के लिए सरकार ने एक्साइज़ ड्यूट में दो बार कुल 3.50 रुपये की कटौती की थी।