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झारखंड: बांध टूटने के मामले में निर्दोष साबित हुए ‘चूहे’, 4 इंजीनियर सस्पेंड

Opposition Leaders Question Administration Over Canal Collapse In Hazaribagh

By रवि तिवारी 
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नई दिल्ली। झारखंड के हजारीबाग में बने कोनार डैम की नहर के बांध टूटने के मामले में 4 इंजीनियरों पर गाज गिरी है। जल संसाधन विभाग की जांच रिपोर्ट में इन चारों इंजीनियरों की लापरवाही की बात सामने आई है। रिपोर्ट में इस प्रकरण के लिए चूहों को जिम्‍मेदार ठहराया गया था, जोकि पूरी तरह गलत साबित हुआ।

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सरकार और प्रशासन को घेरा

विपक्षी दलों ने इस घटना पर प्रशासन को घेरा है। कांग्रेस नेता आलोक दुबे ने कहा है, ‘बीजेपी सरकार दूसरे के कार्यों के लिए श्रेय लेती है या कोनार जैसे आधे-अधूरे प्रॉजेक्ट्स का उद्घाटन कर देती है।’ झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है, ‘सरकार ने 42 साल से बंद पड़े प्रॉजेक्ट को शुरू करके अपनी पीठ थपथपाई।’ उन्होंने दावा किया कि प्रॉजेक्ट की कीमत 2200 करोड़ रुपये है। प्रॉजेक्ट 22 घंटे से भी कम में बह गया।’ बागोडर के विधायक नागेंद्र माहतो ने मांग की है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए और मामले की जांच की जाए।

41 साल बाद हुआ था उद्घाटन

मुख्यमंत्री रघुवर दास (Raghubar Das) ने 41 साल बाद बुधवार को हजारीबाग के बिष्णुगढ़ में कोनार सिंचाई परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना से राज्य के तीन जिलों हजारीबाग, बोकारो और गिरिडीह के लगभग 85 गांवों को सिंचाई की सुविधा मिल पाएगी।

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राज्य की यह पहली सिंचाई परियोजना है, जिसके लिए 6 किलोमीटर की सुरंग बनाई गई. वर्तमान में कोनार टनल में पानी छोड़े जाने से 26 गांवों के 3401 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। हालांकि इतने लंबे समय में रख-रखाव के अभाव में कई जगहों पर नहर टूट गई है और इसमें मिट्टी भी भर गई है। इसे सुधारने का काम किया जाएगा, ताकि परियोजना का लाभ किसानों को मिल सके।

1978 में रखी गई थी आधारशिला

इस परियोजना की आधारशिला 1978 में रखी गई थी। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल जगन्नाथ कौशल ने शिलान्यास किया था। तब इसकी अनुमानित लागत 12 करोड़ रुपये बताई गई थी। 41 सालों में यह बढ़कर 2176. 25 सौ करोड़ पहुंच गई।

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