भारत की इस फिल्म को मिला Oscar, कुछ ऐसी है फिल्म की कहानी

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भारत की इस फिल्म को मिला Oscar, कुछ ऐसी है फिल्म की कहानी

लखनऊ। भारत में फिल्मों ने हमेशा से समाज के प्रति एक अहम भूमिका निभाई है। फिर चाहे वो 3 घंटे की फिल्म हो या कुछ मिनट की। ऐसे ही उत्तर प्रदेश स्थित हापुड़ जिले की महिलाओं पर बनी फिल्म ‘पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस’ को अमेरिका में ‘सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र’ श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार मिलने से शहर में बेहद खुशी का माहौल है। बता दें कि इस फिल्म में हापुड़ के गांव काठीखेड़ा की दो महिलाओं ने अभिनय किया है। काठीखेड़ा निवासी सुमन ‘एक्शन इंडिया’ के नाम से एनजीओ चलाती हैं जो कि सैनिटरी पैड बनाती है।

Oscar 2019 First Prize To Indian Documentry :

इस फिल्म ‘पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस’ को ऑस्कर मिलने पर निर्माता ने कहा इससे पीरियड्स के बारे में जागरूकता बढ़ेगी। हापुड़ के इस एनजीओ में महिलाएं ही काम करती हैं। इन महिलाओं को लेकर भारतीय फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा ने फिल्म बनायी है।

फिल्म की कहानी-

बता दें कि ये फिल्म 25 मिनट की है। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कहानी सैनिटरी नैपकिन के ऊपर है। बात उन औरतों की हो रही है जो ये बनाती हैं। दिल्ली के पास यूपी के हापुड़ जिले के एक गांव में पूरी फिल्म शूट हुई है। ये फिल्म उन महिलाओं पर आधारित है जो मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़िवादिता के खिलाफ आवाज बुलंद करती है।

इस फिल्म के ऑस्कर पुरस्कार के लिए चयनित होने के बाद सुमन और स्नेहा को पुरस्कार के लिए अमेरिका बुलाया गया। उन्हें सोमवार को पुरस्कार से नवाजा गया। सुमन के भाई सुमित वर्मा ने बताया कि सुमन और स्नेहा 2 मार्च को अमेरिका से भारत लौटेंगी। उनके लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।

लखनऊ। भारत में फिल्मों ने हमेशा से समाज के प्रति एक अहम भूमिका निभाई है। फिर चाहे वो 3 घंटे की फिल्म हो या कुछ मिनट की। ऐसे ही उत्तर प्रदेश स्थित हापुड़ जिले की महिलाओं पर बनी फिल्म 'पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस' को अमेरिका में 'सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र' श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कार मिलने से शहर में बेहद खुशी का माहौल है। बता दें कि इस फिल्म में हापुड़ के गांव काठीखेड़ा की दो महिलाओं ने अभिनय किया है। काठीखेड़ा निवासी सुमन 'एक्शन इंडिया' के नाम से एनजीओ चलाती हैं जो कि सैनिटरी पैड बनाती है। इस फिल्म 'पीरियड. एंड ऑफ सेंटेंस' को ऑस्कर मिलने पर निर्माता ने कहा इससे पीरियड्स के बारे में जागरूकता बढ़ेगी। हापुड़ के इस एनजीओ में महिलाएं ही काम करती हैं। इन महिलाओं को लेकर भारतीय फिल्म निर्माता गुनीत मोंगा ने फिल्म बनायी है। फिल्म की कहानी- बता दें कि ये फिल्म 25 मिनट की है। जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कहानी सैनिटरी नैपकिन के ऊपर है। बात उन औरतों की हो रही है जो ये बनाती हैं। दिल्ली के पास यूपी के हापुड़ जिले के एक गांव में पूरी फिल्म शूट हुई है। ये फिल्म उन महिलाओं पर आधारित है जो मासिक धर्म से जुड़ी रूढ़िवादिता के खिलाफ आवाज बुलंद करती है। इस फिल्म के ऑस्कर पुरस्कार के लिए चयनित होने के बाद सुमन और स्नेहा को पुरस्कार के लिए अमेरिका बुलाया गया। उन्हें सोमवार को पुरस्कार से नवाजा गया। सुमन के भाई सुमित वर्मा ने बताया कि सुमन और स्नेहा 2 मार्च को अमेरिका से भारत लौटेंगी। उनके लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।