देश का जवान शहादत से पहले दुश्मन को मार गिराने की सोचे: पर्रिकर

लखनऊ। 18 सितंबर को कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले के जवाब में 28 सितंबर को पीओके(POK) में भारतीय सेना द्वारा किए गए सर्जिकल स्ट्राइक से देश भर में उत्साह का माहौल है। जिसका एक नजारा लखनऊ दौरे पर आए केन्द्रीय रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के सम्मान समारोह में देखने को मिला। मनोहर पर्रिकर ने कहा कि दशकों से हमारी सेना के जवान आतंकवाद के विरूद्ध शहादत देने के लिए तैयार रहा है, लेकिन केन्द्र मे पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में नजरिया बदला है। हम आतंकवाद के खिलाफ पहले अपने रक्षात्मक प्रयासों की वजह से असफल रहे हैं। अब बदलाव आया है। हमने जवानों को कहा है​ कि शहादत की सोच अच्छी है लेकिन इससे पहले अपने दुश्मन को मार गिराने की सोच लानी होगी। जिसे सर्जिकल स्ट्राइक के माध्यम से कर दिखाया गया।




रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर गुरूवार को लखनऊ में राष्ट्र रक्षा संकल्प मंच के तत्वाधान में आयोजित सम्मान समारोह में पहुंचे थे। कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करते हुए पर्रिकर ने आतंकवाद के खिलाफ सेना के बदले नजरिए के लिए पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सोच के बिना सेना ऐसा साहसिक कदम नहीं उठा सकती थी। इसके लिए सबसे जरूरी था राजनीतिक साहस का होना। जो आज साबित हो चुका है। सेना के तेवर भी बदले हैं और देश की जनता की सोच भी बदली है।

इसके आगे उन्होंने कहा जो साहस सेना के जवानों और पीएम मोदी ने दिखाया उसमें उनका सम्मान भी बढ़ गया है। देश भर में वह जहां भी जा रहे हैं उनका सम्मान हो रहा है। उनकी सोच में यह सम्मान देश की सीमा पर डटे जवानों का सम्मान है। जो सियाचीन की विषम परिस्थितियों में भी 90 दिन की ड्यूटी करता है, अपने घर परिवार से दूर छह महीने और साल भर इस सोच के साथ ड्यूटी करता है कि उसके देश, शहर और गांव के लोग चैन की नींद सो रहे होंगे।

उन्होंने कहा कि आज हमारे भीतर अपनी सेना के जवानों को लेकर जो भावना पैदा हुई है उसे बनाए रखना होगा। अगर जवान अपने गांव आता है तो उसे यही भावना मिलनी चाहिए जो आज हमारे भीतर है। देश को अपनी सेना पर विश्वास रखना होगा। हमारी सेना दुश्मन की हर चाल का मुंह तोड़ जवाब देगी।

रक्षा मंत्री ने देश की जनता को विश्वास दिलाते हुए कहा कि उनकी सरकार में देश की सीमाएं अब पहले से ज्यादा सु​रक्षित हुईं हैं। देश भर से उन्हें सेना के जवानों के साहस पर जो प्रतिक्रियाएं मिलीं हैं, उन प्रतिक्रियाओं की भावना को वह सीमा पर डटे जवानों तक पहुंचा देंगे। हालांकि उन्होंने सुरक्षा कारणों के चलते अपने प्लॉन को सार्वजनिक करने से मना कर​ दिया।




इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर होने वाली एक टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोग कहते हैं कि वह एक सिम्पल व्यक्ति हैं। लेकिन सच ये है कि सिम्पल होने के बावजूद वह टेड़ी बातें अच्छी तरह से समझते हैं। अगर वह टेड़ी बातें नहीं समझते तो 25 साल के राजनीतिक कॅरियर में एक राज्य के सीएम और आज केन्द्रीय मंत्री नहीं बन पाता। अगर किसी को लगता है कि वह सरल हैं, तो उसे ये भी समझ लेना चाहिए कि टेड़े फैसले लेना उन्हें आता है।अगर पड़ोसी देश नहीं सुधरा तो आगे भी ऐसे आॅपरेशन होते रहेंगे। कोई भी सख्त कार्रवाई करने से भारत सरकार और भारतीय सेना पीछे नहीं हटेगी।