अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा, मोदी के सब्र का इम्तहान मत लो वरना दिक्कत में आ जाओगे

वाशिंगटन| जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ पाए जाने के बाद वह पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ता जा रहा हैं| पहले जहां अपने देश में आतंक के खात्मे को लेकर उसे अमेरिका से डांट पड़ी तो वहीँ उसके जिगरी दोस्त चीन ने भी उसका साथ छोड़ने हुए उसे कश्मीर मसला बातचीत के जरिये सुलझाने की सलाह दी| सबसे बड़ा झटका तो पाकिस्तान को तब लगा जब भारत द्वारा सार्क सम्मलेन में हिस्सा लेने से इंकार करने के बाद भूटान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान ने भी इस समिट का बायकाट कर दिया हैं|




इस सदमें से पाकिस्तान उबर भी नहीं पाया था कि अब अमेरिकी समाचार पत्र वाल स्ट्रीट जर्नल ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा हैं कि वह रणनीतिक संयम की भारत की नीति को अधिक समय तक हल्के में लेने की गलती न करे वरना आगे चलकर वह दिक्कत में आ जायेगा| अखबार ने कहा कि यदि इस्लामाबाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग के प्रस्ताव को खारिज कर देता है तो यह देश को ‘अछूत राष्ट्र’ बनाने की दिशा में एक कदम होगा|

‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ में कल एक लेख में कहा गया, “मोदी अभी संयम बरत रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान लगातार इसे हल्के में लेने की गलती न करे| यदि सहयोग का मोदी का प्रस्ताव ठुकरा दिया जाता है तो यह पाकिस्तान को पहले से भी अधिक अछूत राष्ट्र बनाने की दिशा में एक कदम होगा|” इसने आगाह किया, ‘यदि (पाकिस्तान) सेना सीमा पार हथियार एवं आतंकी भेजना जारी रखती है तो भारत के प्रधानमंत्री के पास कार्रवाई करने के लिए मजबूत स्पष्टीकरण होगा|

‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ ने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर नैतिकतापूर्ण व्यवहार करने के लिए भारत का सम्मानजनक दर्जा है लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस एवं भाजपा सरकारों में स्पष्ट रूप से इसे दिखाने का साहस नहीं था| ‘वाल स्ट्रीट जर्नल’ ने कहा कि इसके कारण ‘रणनीतिक संयम’ की नीति बनी जिसका अर्थ यह हुआ कि पाकिस्तान को पर्दे के पीछे की उसकी आतंकवादी गतिविधियों के लिए कभी भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा, भले ही ये आतंकवादी हमले कितने भी जघन्य क्यों न हों|



वाशिंगटन| जम्मू-कश्मीर के उरी में हुए आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ पाए जाने के बाद वह पूरी दुनिया में अलग थलग पड़ता जा रहा हैं| पहले जहां अपने देश में आतंक के खात्मे को लेकर उसे अमेरिका से डांट पड़ी तो वहीँ उसके जिगरी दोस्त चीन ने भी उसका साथ छोड़ने हुए उसे कश्मीर मसला बातचीत के जरिये सुलझाने की सलाह दी| सबसे बड़ा झटका तो पाकिस्तान को तब लगा जब भारत द्वारा सार्क सम्मलेन में हिस्सा लेने से…
Loading...