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Pakistan सीधे युद्ध लड़ने में हुआ फेल, इसलिए आतंक की नीति पर कर रहा है काम : Rajnath Singh

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh)  ने सोमवार को स्वर्गीय बलरामजी दास टंडन व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर सम्बोधित किया। इस अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security)  को एक व्यापक दृष्टि से यदि किसी ने पहली बार देखा तो आज से करीब 2200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने देखा। राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को लेकर जिस तरह के विचार उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में रखे हैं वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने पहले रहे हैं।

By संतोष सिंह 
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नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh)  ने सोमवार को स्वर्गीय बलरामजी दास टंडन व्याख्यानमाला के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ विषय पर सम्बोधित किया। इस अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि भारत के इतिहास में राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security)  को एक व्यापक दृष्टि से यदि किसी ने पहली बार देखा तो आज से करीब 2200 साल पहले आचार्य चाणक्य ने देखा। राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को लेकर जिस तरह के विचार उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अर्थशास्त्र’ में रखे हैं वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने पहले रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security)  के प्रति संवेदनशील रहना हर सरकार की पहली आवश्यकता ही नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता भी होती है। श्री सिंह ने कहा कि हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हैं तो सबसे पहले बात सीमाओं की सुरक्षा की आती है, क्योंकि यदि सीमाएं सुरक्षित नही होंगी तो राष्ट्र भी सुरक्षित नहीं होगा।  रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले लगभग 75 सालों में भूमि (Land) और समुद्री सीमाएं (Maritime Boundaries)  पर हमें बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मगर हमारी सेनाओं और सुरक्षा बलों ने, मिलकर, हर चुनौती का न केवल डटकर सामना किया है बल्कि उन पर विजय भी हासिल की है।

उन्होंने कहा कि जब से भारत आजाद हुआ है,कई भारत विरोधी ताकतों की यह लगातार कोशिश रही है कि या तो सीमाओं पर, या फिर सीमाओं के रास्ते से भारत के भीतर अस्थिरता का माहौल बनाया जाये। पाकिस्तान (Pakistan)  की जमीन से इसके लिए बड़े पैमाने पर लगातार कोशिश की गई है। रक्षा मंत्री ने कहा कि 1965 में और 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच दो युद्ध हुए जिनमें पाकिस्तान (Pakistan)  को हार का सामना करना पड़ा। इन युद्धों में मिली पराजय ने पूरी तरह यह साबित कर दिया कि भारत के साथ वे Full Scale War करने की स्थिति में नही है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के साथ सीधे युद्ध न करने की अक्षमता ने पाकिस्तान को दो नीतियों पर काम करने के लिए मजबूर किया। एक तो उन्होंने एटमी रास्ता खोजने की दिशा में कदम बढ़ाए और दूसरी तरफ भारत को ‘Death of thousand cuts’ देने की नीति पर काम प्रारंभ किया। आतंकवाद के सहारे पंजाब में हिंसा का जो दौर चलाया गया उसका खात्मा बहुत बड़ी कीमत देकर हुआ है। अब जम्मू और कश्मीर में इस आतंकवाद को रोकने की दिशा में पिछले सात सालों से सेना और सुरक्षा बलों की प्रभावी कार्रवाई चल रही है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि मेरा मानना है कि कश्मीर में बचा खुचा आतंकवाद भी समाप्त होकर रहेगा। यह विश्वास मुझे इसलिए है क्योंकि धारा 370 और 35A के चलते वहां अलगाववादी ताकतों को जो मजबूती मिलती थी, वह अब खत्म हो गई है। आतंकवाद के खिलाफ भारतीय सुरक्षा बलों के Response में पिछले सात सालों में एक और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वह बदलाव सेना और सुरक्षा बलों के बढ़े हुए मनोबल और उनकी कार्रवाई के बदले हुए तौर-तरीकों का है। उन्होंने कहा कि चूंकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर हम न राजनीति करते है और न होने देते है इसलिए भारतीय सेना और सुरक्षा बलों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि राष्ट्र रक्षा के कर्तव्य पालन में उन्हें खुली छूट रहेगी।

रक्षा मंत्री ने बताया कि चाहे उरी की घटना के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राईक (Surgical Strike) हो या पुलवामा की घटना के बाद की गई बालाकोट एयर स्ट्राईक्स हो, भारतीय सेना ने आतंकवाद के खिलाफ ऐसी कठोर कार्रवाई की है जिसकी मिसाल कम से कम आजाद भारत के इतिहास में नहीं मिलती है। आज भारत आतंकवाद के खिलाफ देश की सीमाओं के भीतर तो कार्रवाई कर ही रहा है, साथ ही जरूरत पड़ने पर सीमा पार जाकर भी आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का काम हमारी सेना के बहादुर जवानों ने किया है। श्री सिंह ने बताया कि इससे सेना और सुरक्षा बलों का आत्मविश्वास और मनोबल कितना ऊंचा हुआ है, इसका अनुमान आप इसी बात से लगा सकते है कि पिछले सात सालों में भारत के Hinterland में एक भी बड़ी आतंकवादी घटना उन्होंने नही होने दी है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है भारत को समृद्ध, सशक्त और सुरक्षित बनाना। एक ऐसा भारत जो अपनी ताकत से लोगों को डराये नहीं बल्कि छोटे-छोटे देशों के अंदर भी एक विश्वास का भाव जगाए कि भारत की बढ़ती ताकत उनके लिए खतरा नहीं है, बल्कि उनके लिए भी सुरक्षा का भाव जगाने वाला है:

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पड़ोस के अफगानिस्तान में जो कुछ भी घटित हो रहा है वह सुरक्षा की दृष्टि से नये सवाल खड़े कर रहा है| वहां के हालात पर हमारी सरकार लगातार नजर बनाये हुए है। भारतीयों की सुरक्षा के साथ-साथ हमारी सरकार यह भी चाहती है कि वहां बन रही परिस्थितियों का फायदा उठाकर देश-विरोधी शक्तियां, सीमापार से आतंकवाद को बढ़ावा न दे सकें।

साथ ही कुछ और चिंताये भी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से चुनौती बन सकती हैं मगर हमारी सरकार सजग है, और हर तरह की परिस्थिति का सामना करने में सक्षम है। नभ, जल, थल, आकाश, पाताल कहीं से भी पैदा होने वाले खतरे से निपटने की हमारी तैयारी हमेशा रहती है।

इस समय देश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में जो सरकार चल रही है, वह राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय स्वाभिमान और राष्ट्र के उत्थान से जुड़े मुद्दों पर समझौता किसी भी सूरत में नहीं करेगी। आप सभी लोगों को मैं इस बात पर आश्वस्त करना चाहता हूं। राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कुछ नए खतरे भी सामने आए है जो आधुनिक तकनीक के विकास के कारण देखने को मिले है। जम्मू में एयरफोर्स स्टेशन की घटना ने इस तरफ हम सबका ध्यान आकर्षित किया है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को नई चुनौतियों के लिए लगातार Update और Upgrade करते रहना है। भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जिस बड़े पैमाने पर काम चल रहा है वह अपने आप में अभूतपूर्व है। सुरक्षा से जुड़े हर विभाग के बीच एक बहुत अच्छा तालमेल देखने को मिल रहा है।

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