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पाक नेता और MQM के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने PM मोदी से भारत शरण मांगी

Pakistan Leader And Mqm Founder Altaf Hussain Seeks Refuge From Pm Modi In India

By रवि तिवारी 
Updated Date

नई दिल्ली। इंग्लैंड में निर्वासित जीवन बिता रहे पाकिस्तानी नेता एवं मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (Muttahida Qaumi Movement, MQM) के प्रमुख अल्ताफ हुसैन (Altaf Hussain) ने भारत से शरण मांगी है। उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) से गुजारिश की है कि वह उनको भारत में शरण दें या फिर आर्थिक मदद प्रदान करें। अल्ताफ अभी लंदन में निर्वासित जीवन गुजार रहे हैं। 67 वर्षीय पाक नेता ने वादा किया कि वह राजनीति में किसी भी तरह से दखल नहीं देंगे।  

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‘भारत में मेरे हजारों रिश्तेदार दफ्न हैं’

आपको बता दें कि ब्रिटेन में 67 वर्षीय हुसैन पाकिस्तान में कुछ साल पहले अपने समर्थकों को दिए भाषण के जरिए आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप में मुकदमे का सामना कर रहे हैं। हुसैन ने 9 नवंबर को जारी भाषण में कहा, ‘अगर आज भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुझे भारत आने की इजाजत देंगे और मुझे समर्थकों के साथ शरण देंगे तो मैं अपने सहयोगियों के साथ भारत आने को तैयार हूं, क्योंकि मेरे दादा वहां दफन हैं, मेरी दादी वहां दफन हैं, मेरे हजारों रिश्तेदार भारत में दफन है। मैं वहां जाना चाहता हूं। मैं उनकी कब्रों पर जाना चाहता हूं। वहां इबादत करना चाहता हूं।’

हुसैन ने किया वादा, भारत में राजनीति नहीं करूंगा

हुसैन ने कहा, ‘मैं शांतिप्रिय इंसान हूं। मैं किसी राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करूंगा। मैं वादा करता हूं। बस मुझे, मेरे साथियों के साथ भारत में रहने के लिए जगह दी जाए। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कुछ बलोच, सिंधी, जिनके नाम मैं दूं उन्हें भी शरण दी जाए।’ भारत से किए अनुरोध में हुसैन ने कहा कि उनके घर और कार्यालय को जब्त कर लिया गया और उनके पास पाकिस्तान के शासन से न्याय के लिए लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। हुसैन ने कहा, ‘अगर आप हमें आश्रय नहीं दे सकते तो कुछ प्रभावी धनवान लोगों को दें जो अंतरराष्ट्रीय अदालत आ जा सके। मेरे पास कोई धन नहीं है, इसलिए आप अपने लोगों से कहिए कि वे अदालत का शुल्क जमा करें। मैं अकेले बलोच, सिंधी और मुहाजिर और अन्य जातीय एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों की लड़ाई अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ूंगा।’

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अल्ताफ हुसैन क्यों भागा पाकिस्तान से?

अल्ताफ हुसैन 27 साल पहले पाकिस्तान से भागकर लंदन आ गए थे। वहीं से वो अपनी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट कंट्रोल करते हैं। 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो ने सेना भेजकर कराची में एमक्यूएम और उसके नेताओं को जमकर ठिकाने लगाया। माना जाता है कि उन दिनों कराची में हजारों लोग मारे गए। 1992 में अल्‍ताफ हुसैन पाकिस्‍तान में अपनी जान को खतरा बताते हुए ब्रिटेन चले गए। 2002 में उनको ब्रिटिश नागरिकता मिल गई। इस शख्स पर एक दो नहीं बल्कि पाकिस्तान में 3576 मामले चल रहे हैं। 2014 में उन्हें एक हत्या के मामले में लंदन में गिरफ्तार किया गया, लेकिन तीसरे दिन ही रिहाई हो गई। कुछ लोग अल्ताफ हुसैन को पीर भी मानते हैं।  

अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हुसैन ने किया स्वागत

भाषण के प्रसारण के दौरान उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की ओर से नई बाबरी मस्जिद के लिए जमीन देने के फैसले का भी स्वागत किया और कहा कि जिन्हें यह स्वीकार नहीं है उसे भारत छोड़ देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा भारत सरकार को पूरा अधिकार है कि वह तथाकथित ‘हिंदू राज’ स्थापित करे। उल्लेखनीय है कि हुसैन इस समय में कठोर शर्तों पर जमानत पर है। लंदन महानगर पुलिस की आतंकवाद निरोधी कमान ने पिछले महीने उनके खिलाफ ब्रिटेन आतंकवाद कानून 2006 की धारा 1(2) के तहत मामला दर्ज किया था। इन शर्तों में सोशल मीडिया के जरिए भाषण पर भी रोक थी। इसके बावजूद हुसैन ने शनिवार को दूसरा भाषण जारी किया।

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