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बलूचिस्तान में पाकिस्तान की अंधेरगर्दी , पुरुषों को गायब करने पर महिलाओं ने किया प्रदर्शन

By बलराम सिंह 
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Pakistan Protests In Balochistan Women Protest On Disappearing Men

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत पर कश्मीर में मानवाधिकार हनन का बेबुनियाद आरोप लगा रहा पाकिस्तान खुद अपनी धरती पर मानवाधिकारों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। बलूचिस्‍तान प्रांत के लोग पाकिस्तान सरकार के इस रवैये के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। आए दिन वो पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं और उसकी पोल खोलते हैं। इसी कड़ी में शनिवार को क्वेटा में बलूच महिलाओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने यह प्रदर्शन बलूचिस्तान के लोगों को जबरन गायब होने को लेकर किया।

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बलूचिस्तान के क्वेटा शहर में सरकार के विरोध में महिलाएं भी खुलकर सामने आई हैं। बलूचिस्तान प्रांत में लोगों की गुमशुदगी के विरोध में शनिवार को महिलाओं ने हाथों में तख्ती और बैनर के साथ प्रदर्शन किया। बलूचिस्तान में अराजकता वाली स्थिति के बीच जो लोग संदिग्ध परिस्थितियों मे गायब हुए हैं, महिलाएं उन्हें ढूंढ कर लाए जाने की मांग कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के खिलाफ लामबंद हुए बलूचिस्तानियों की पाकिस्तानी सरकार आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से यहां के लोगों विशेषकर प्रदर्शनकारियों को जबरन गायब करा दिया जा रहा है। गायब हुए लोग कहां और किस हालत में रहते हैं इसकी जानकारी किसी को नहीं है। इसी को लेकर क्वेटा में बलूच की महिलाओं ने प्रदर्शन किया।

आपको बता दें कि पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान भी यूएन मुख्यालय के बाहर भी प्रदर्शन हुआ था। बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार हनन को लेकर लोगों ने प्रदर्शन हुआ था। सितंबर में ही संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान भी न्यूयॉर्क में इमरान खान के भाषण के दौरान प्रदर्शन किया गया था।

बलूचिस्‍तानियों की जिंदगी भी कीमती है

पिछले आठ महीने के दौरान क़रीब चार सौ लोग ग़ायब कर दिए गए। फ़िलहाल, पिछले 10 साल से 40,000 से अधिक बलूच नागरिक लापता हैं। इनमें से 10,000 से अधिक लोगों की “हत्या” कर दी गई और गोली से छलनी शव को बीहड़ क्षेत्रों में फेंक दिया गया। बाकी बलूच नागरिक अब भी सेना की अवैध हिरासत में हैं। इन मासूमों को न तो रिहा किया जा रहा है और न ही इन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है।

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बलूचिस्तान को ‘काला मोती’ कहा जाता है

बलूचिस्तान को ‘ब्लैक पर्ल’ या ‘काला मोती’ भी कहा जाता है। तेल, गैस, तांबे और सोने जैसी प्राकृतिक संपदाओं की यहां भरमार है। इसी पर चीन की नज़र है, जिसका स्थानीय लोग पुरज़ोर विरोध कर रहे हैं। विरोध का स्वर तेज़ करने के लिए बलूच राष्ट्रवादियों के संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने कराची में चीनी वाणिज्य दूतावास पर पिछले साल 23 नवंबर को हमला किया था। हमले के बाद पाक सेना का बलूचिस्तान में “मिशन टॉर्चर” का मुद्दा विश्व स्तर पर सुर्खियों में आ गया।

भारत से है बलूचिस्तान को आस

बहरहाल, विदेशों में पनाह लेने वाले बलूच नेता भारत की ओर हसरत भरी नजर से देखते हैं, कि यह मुल्क उनके लिए कुछ करेगा। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब लाल किले से दिए गए अपने भाषण में बलूचिस्तान में पाकिस्तान सेना के अत्याचार का जिक्र किया तो बलूच लोगों को उम्मीद बंधी थी कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तानी सेना के अत्याचार और मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला उठाएगा क्योंकि बलूचिस्तान इंटरनेशनल सपोर्ट हासिल करने के लिए लंबे समय से कोशिश कर रहा है।

क्या है पृथक बलूचिस्तान आंदोलन

पृथक बलूचिस्तान आंदोलन का लंबा इतिहास रहा है। दरअसल, बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है जो लगभग 44 फ़ीसदी हिस्से को कवर करता है । इस इलाके की आबादी तकरीबन 1.3 करोड़ है, जो पाक की आबादी का महज 7 फ़ीसदी है। यहां रहने वाले लोगों को बलूच कहा जाता है। यह सबसे ग़रीब और उपेक्षित इलाक़ा भी है। पाकिस्तान ने हाल के दिनों में अपनी परियोजनाओं के लिए बाहर से लोगों को लाकर यहां बसाने की नीति शुरू की है। उनकी दलील है कि बलूच आबादी में साक्षरता दर बेहद कम होने और हुनरमंद लोगों की कमी की वजह से ऐसा करना जरूरी है।मगर बलूच राष्ट्रवादियों को शंका है कि उन्हें कई इलाकों में अल्पसंख्यक बना देने और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के लिए पाकिस्तानी सरकार यह खेल खेल रही है।

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