पाकिस्तान चलेगा एक और चाल, करतारपुर कॉरीडोर के उद्घाटन पर मनमोहन सिंह को भेजेगा न्योता

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पाकिस्तान चलेगा एक और चाल, करतारपुर कॉरीडोर के उद्घाटन पर मनमोहन सिंह को भेजेगा न्योता

नई दिल्ली। करतारपुर कॉरीडोर के उद्घाटन समारोह की आंड़ में पाकिस्तान ने फिर से एक चाल चली है। दरअसल पाकिस्तान इस मौके पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को आमंत्रित करने का प्लान बना रहा है। हालाकि इस मामले में कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि मनमोहन सिंह पाकिस्तान के बुलावे पर वहां नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि सिंह सिख समुदाय का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर 9 नवंबर को खोला जाना है।

Pakistan Will Play Another Trick Will Invite Manmohan Singh To Inaugurate Kartarpur Corridor :

बता दें कि कुरैशी ने कहा कि ‘हम पूर्व भारतीय पीएम मनमोहन सिंह को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के लिए निमंत्रण देना चाहते हैं। वह सिख समुदाय का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। हम उन्हें औपचारिक निमंत्रण भी भेजेंगे।’

गौरतलब है कि करतारपुर कॉरिडोर सिखों के लिए पवित्र जगहों में से एक है। ये वहीं जगह है जहां सिखों के धर्मगुरु गुरुनानक ने अपनी जिंदगी के 17 साल 7 महीने 9 दिन यहां गुजारे थे और फिर सपरिवार यहीं बस गए। कहा जाता है कि उनके माता—पिता का देहान्त भी यहीं हुआ था। अभी तक लोग भारतीय सीमा के अंदर से ही दूरबीन के सहारे इसके दर्शन करते हैं।

नई दिल्ली। करतारपुर कॉरीडोर के उद्घाटन समारोह की आंड़ में पाकिस्तान ने फिर से एक चाल चली है। दरअसल पाकिस्तान इस मौके पर भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह को आमंत्रित करने का प्लान बना रहा है। हालाकि इस मामले में कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि मनमोहन सिंह पाकिस्तान के बुलावे पर वहां नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि सिंह सिख समुदाय का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। बता दें कि करतारपुर कॉरिडोर 9 नवंबर को खोला जाना है। बता दें कि कुरैशी ने कहा कि 'हम पूर्व भारतीय पीएम मनमोहन सिंह को करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह के लिए निमंत्रण देना चाहते हैं। वह सिख समुदाय का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। हम उन्हें औपचारिक निमंत्रण भी भेजेंगे।' गौरतलब है कि करतारपुर कॉरिडोर सिखों के लिए पवित्र जगहों में से एक है। ये वहीं जगह है जहां सिखों के धर्मगुरु गुरुनानक ने अपनी जिंदगी के 17 साल 7 महीने 9 दिन यहां गुजारे थे और फिर सपरिवार यहीं बस गए। कहा जाता है कि उनके माता—पिता का देहान्त भी यहीं हुआ था। अभी तक लोग भारतीय सीमा के अंदर से ही दूरबीन के सहारे इसके दर्शन करते हैं।