तख्तापलट की दहलीज तक पहुंचा पाकिस्तान, नवाज शरीफ की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली। भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के भीतर घुसकर किए गए सर्जिकल स्ट्राइक की सफलता ने पाकिस्तान के भीतर सियासी असंतुलन पैदा कर दिया है। भारत विरोधी विचारधारा पर जीवित पाकिस्तानी सियासत में भारतीय सेना के आॅपरेशन को पाकिस्तान में बेज्जती के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तानी में भारत सेना के इस आॅपरेशन को भले ही नकारने की कोशिश कर रही है। सियासी विरोधियों ने नवाज शरीफ सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं पाकिस्तानी सेना भारतीय हमले का बदला लेने की फिराक में बड़ी कार्रवाई करना चाहती है।




सूत्रों से​ मिल रही जानकारी के मुताबिक नवाज शरीफ ने पाकिस्तानी संसद का विशेष सत्र बुलाया है। यह विशेष सत्र 5 अक्टूबर को रखा गया है। नवाज शरीफ को उम्मीद है कि वे विरोधी राजनीतिक दलों को अपने साथ लाकर वर्तमान परिस्थिति में आगे की कार्रवाई के लिए कोई रास्ता निकाल लेंगे। विरोधियों को साथ आने के बाद उनकी सरकार पर पाकिस्तानी सेना का दवाब भी कुछ कम हो जाएगा।

वर्तमान समय में पाकिस्तान के सामने एक गंभीर परिस्थिति खड़ी हो गई है। पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी समस्या अमेरिका की नाराजगी है क्योंकि अमेरिका आतंकवाद के मामले पर पाकिस्तान की नीति को लेकर चेतावनी जारी कर चुका है। जिसकी बहुत बड़ी वजह अमेरिका में होने जा रहे आम चुनाव हैं। क्योंकि वहां सत्तारूढ़ बराक ओबामा के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक पार्टी पर मुस्लिम समर्थक विचारधारा से ग्रसित होने का आरोप लग रहा है। विरोधी दल रिपब्लिकन पार्टी ने मुस्लिम शणार्थियों के विरोध में एक मुहीम चला रखी है। जिसे लेकर रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को अच्छा समर्थन भी मिल रहा है। ट्रंप कई बार खुले मंच से अमेरिका में शरणार्थी मुस्लिमों पर आतंकवाद को लेकर बयानबाजी कर चुके हैं। अमेरिकी चुनाव को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहेंगे जिससे लेकर आतंकवाद के खिलाफ उनके विरोधियों को मुद्दा मिल सके।




वहीं दूसरी ओर नवाज शरीफ की सबसे बड़ी मुसीबत भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीति है। जिसने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को आतंकवाद समर्थक देश का ठप्पा लगाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। जिसकी सबसे बड़ा उदाहरण पाकिस्तान में होने वाले सार्क देशों के शिखर सम्मेलन के बहिष्कार के रूप में सामने आ चुका है।




पाकिस्तान की राजनीतिक को समझने वालों की माने तो पा​किस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका बहुत अहम है। वर्तमान परिस्थितियों में अगर पाकिस्तानी सेना भारत के विरोध में कोई कदम उठाना चाहती है और उसे सरकार की सहमति नहीं मिली तो ऐसे में सेना तख्तापलट कर सत्ता अपने हाथ में ले सकती है।

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