नहीं रही मशहूर पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर

नहीं रही मशहूर पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर
नहीं रही मशहूर पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अस्मां जहांगीर
लाहौर। पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता व वकील असमा जहांगीर का यहां रविवार को निधन हो गया। वह 66 साल की थीं। जियो टीवी के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष को दिल का दौरा पड़ने के बाद शनिवार रात एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा के निधन पर राष्ट्रपति ममनून हुसैन, पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश साकिब निसार अहमद, अन्य नेताओं, वकीलों और पत्रकारों ने शोक जताया है। पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान ने मानवाधिकारों की एक जुझारु चैंपियन और लोकतंत्र की सच्ची समर्थक को खो दिया है।”

Pakistani Human Rights Activist Lawyer Asma Jahangir Passes Away :

लाहौर में 27 जनवरी 1952 को जन्मी असमा ने कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने किनेयर्ड कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और 1978 में पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की। ‘द न्यूज इंटरनेशनल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, असमा ने 1987 में पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की सह-स्थापना की और 1993 तक इसकी महासचिव रहीं। इसके बाद वह आयोग की अध्यक्ष बनीं।

असमा दक्षिण एशियाई मानवाधिकार संगठन की सह-अध्यक्ष भी रहीं। असमा को 1983 में लोकंतत्र की बहाली को लेकर हुए आंदोलन में भाग लेने के कारण नजरबंदी में रहना पड़ा और वह जेल भी गईं, जो सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के शासन के खिलाफ था। पाकिस्तान में आपातकालीन नियम लागू होने के बाद नवंबर 2007 में उन्हें फिर नजरबंदी में रहना पड़ा। डॉन न्यूज के अनुसार, वह 2007 में वकीलों के आंदोलन के दौरान भी सक्रिय रहीं, जिसके चलते उन्हें नजरबंदी में रहना पड़ा।

असमा ने कई ऐसे मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व किया, जिन्हें उनका मौलिक अधिकार देने से मना कर दिया गया था। वह जेल में बंद अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों की आवाज बनीं। उन्होंने दो किताबें ‘डिवाइन सैंक्शन? द हडूड ऑर्डिनेंस’ (1988) और ‘चिल्ड्रन ऑफ अ लेसर गॉड : चाइल्ड प्रिजनर्स ऑफ पाकिस्तान’ (1992) लिखीं। असमा को 1995 में सितारा-ए-इम्तियाज सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।  मानव अधिकार के क्षेत्र में काम करने के लिए असमा को 1992 में ‘अमेरिकन बार एसोसिएशन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड’ से नवाजा गया। उन्हें 1995 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार और मार्टिन एनल्स अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।

लाहौर। पाकिस्तान की जानी-मानी मानवाधिकार कार्यकर्ता व वकील असमा जहांगीर का यहां रविवार को निधन हो गया। वह 66 साल की थीं। जियो टीवी के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायालय के बार एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष को दिल का दौरा पड़ने के बाद शनिवार रात एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। असमा के निधन पर राष्ट्रपति ममनून हुसैन, पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश साकिब निसार अहमद, अन्य नेताओं, वकीलों और पत्रकारों ने शोक जताया है। पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्वीट किया, "पाकिस्तान ने मानवाधिकारों की एक जुझारु चैंपियन और लोकतंत्र की सच्ची समर्थक को खो दिया है।"लाहौर में 27 जनवरी 1952 को जन्मी असमा ने कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी से स्कूली शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने किनेयर्ड कॉलेज से स्नातक की डिग्री ली और 1978 में पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी की पढ़ाई की। 'द न्यूज इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, असमा ने 1987 में पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की सह-स्थापना की और 1993 तक इसकी महासचिव रहीं। इसके बाद वह आयोग की अध्यक्ष बनीं।असमा दक्षिण एशियाई मानवाधिकार संगठन की सह-अध्यक्ष भी रहीं। असमा को 1983 में लोकंतत्र की बहाली को लेकर हुए आंदोलन में भाग लेने के कारण नजरबंदी में रहना पड़ा और वह जेल भी गईं, जो सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के शासन के खिलाफ था। पाकिस्तान में आपातकालीन नियम लागू होने के बाद नवंबर 2007 में उन्हें फिर नजरबंदी में रहना पड़ा। डॉन न्यूज के अनुसार, वह 2007 में वकीलों के आंदोलन के दौरान भी सक्रिय रहीं, जिसके चलते उन्हें नजरबंदी में रहना पड़ा।असमा ने कई ऐसे मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व किया, जिन्हें उनका मौलिक अधिकार देने से मना कर दिया गया था। वह जेल में बंद अल्पसंख्यकों, महिलाओं और बच्चों की आवाज बनीं। उन्होंने दो किताबें 'डिवाइन सैंक्शन? द हडूड ऑर्डिनेंस' (1988) और 'चिल्ड्रन ऑफ अ लेसर गॉड : चाइल्ड प्रिजनर्स ऑफ पाकिस्तान' (1992) लिखीं। असमा को 1995 में सितारा-ए-इम्तियाज सहित कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिले।  मानव अधिकार के क्षेत्र में काम करने के लिए असमा को 1992 में 'अमेरिकन बार एसोसिएशन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स अवार्ड' से नवाजा गया। उन्हें 1995 में रेमन मैगसेसे पुरस्कार और मार्टिन एनल्स अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।