ISI और पाक सेना से बचकर US भागी महिला कार्यकर्ता, मांगी राजनीतिक शरण

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ISI और पाक सेना से बच US भागी महिला कार्यकर्ता, मांगी राजनीतिक शरण

नई दिल्ली। पाकिस्तान भले ही पूरी दुनिया में भारत का विरोध करता घूम रहा हो लेकिन सच तो ये है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान खुद कटघरे में रहता है। पाकिस्तान में कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहीं महिला कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल भागकर अमेरिका पहुंच गई हैं। उन्होंने अमेरिका से राजनीतिक शरण देने की गुहार भी लगाई है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

Pakistani Women Activist Gulalai Ismail Escapes To United States :

कौन हैं गुलाली इस्माइल?

मूल रूप से खैबर पख्तूख्वा प्रांत की रहने वाली हैं। पश्तून समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उच्च शिक्षित हैं और सामाजिक कार्यकर्ता भी। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के जुल्म-ओ-सितम के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। कई विदेशी अखबारों में उनके लेख प्रकाशित होते हैं। बलूचिस्तान और पीओके के हजारों लोग कई साल से गायब हैं। आरोप है कि सेना ने इनकी हत्या कर दी है। सेना और आईएसआई को शक है कि गुलाली के पास सेना के जुल्म के पुख्ता सबूत वीडियो और दस्तावेजों की शक्ल में मौजूद हैं।  

भागने का राज नहीं बता सकती

इस्माइल ने तीन महीने पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में अपने दोस्तों के यहां गुजारे। इस दौरान ज्यादातर वह घर के अंदर ही रही। हालांकि, इस्माइल अभी भी इस्लामाबाद में रह रहे अपने माता-पिता के बारे में चिंतित हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय मदद देने के आरोप और कड़ी नजरबंदी का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने एक समाचार पत्र को साक्षात्कार के दौरान बताया कि ‘मैं आपको पाकिस्तान से बाहर भागने की कोशिश के बारे में बता नहीं सकती…. मेरे वहां से निकलने की कहानी कई लोगों की जिंदगी को जोखिम में डाल देगी।’

क्या है मामला

इमरान खान के सत्ता में आने के एक साल बाद इस्माइल की मुश्किलें शुरू हुई। पश्तून तहफ्फुज आंदोलन (पीटीएम) की कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल पर आतंक निरोधी कानूनों के तहत देशद्रोह का आरोप लगाया गया। इस्माइल ने फरिश्ता मोहम्मद का शव इस्लामाबाद के वुडलैंड में मिलने के बाद पिछले महीने उसकी हत्या के लिए अधिकारियों की भूमिका को उजागर करने के लिए विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था।  

नई दिल्ली। पाकिस्तान भले ही पूरी दुनिया में भारत का विरोध करता घूम रहा हो लेकिन सच तो ये है कि मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर पाकिस्तान खुद कटघरे में रहता है। पाकिस्तान में कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के लिए देशद्रोह के आरोपों का सामना कर रहीं महिला कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल भागकर अमेरिका पहुंच गई हैं। उन्होंने अमेरिका से राजनीतिक शरण देने की गुहार भी लगाई है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शुक्रवार को प्रकाशित रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। कौन हैं गुलाली इस्माइल? मूल रूप से खैबर पख्तूख्वा प्रांत की रहने वाली हैं। पश्तून समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उच्च शिक्षित हैं और सामाजिक कार्यकर्ता भी। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के जुल्म-ओ-सितम के खिलाफ आवाज उठाती रही हैं। कई विदेशी अखबारों में उनके लेख प्रकाशित होते हैं। बलूचिस्तान और पीओके के हजारों लोग कई साल से गायब हैं। आरोप है कि सेना ने इनकी हत्या कर दी है। सेना और आईएसआई को शक है कि गुलाली के पास सेना के जुल्म के पुख्ता सबूत वीडियो और दस्तावेजों की शक्ल में मौजूद हैं।   भागने का राज नहीं बता सकती इस्माइल ने तीन महीने पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में अपने दोस्तों के यहां गुजारे। इस दौरान ज्यादातर वह घर के अंदर ही रही। हालांकि, इस्माइल अभी भी इस्लामाबाद में रह रहे अपने माता-पिता के बारे में चिंतित हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय मदद देने के आरोप और कड़ी नजरबंदी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने एक समाचार पत्र को साक्षात्कार के दौरान बताया कि ‘मैं आपको पाकिस्तान से बाहर भागने की कोशिश के बारे में बता नहीं सकती.... मेरे वहां से निकलने की कहानी कई लोगों की जिंदगी को जोखिम में डाल देगी।’ क्या है मामला इमरान खान के सत्ता में आने के एक साल बाद इस्माइल की मुश्किलें शुरू हुई। पश्तून तहफ्फुज आंदोलन (पीटीएम) की कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल पर आतंक निरोधी कानूनों के तहत देशद्रोह का आरोप लगाया गया। इस्माइल ने फरिश्ता मोहम्मद का शव इस्लामाबाद के वुडलैंड में मिलने के बाद पिछले महीने उसकी हत्या के लिए अधिकारियों की भूमिका को उजागर करने के लिए विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था।