सुप्रीम कोर्ट ने तलब की पनामा दस्तावेज की छह रिपोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को निर्देश दिया है कि पनामा दस्तावेज कांड की जांच के लिए गठित बहु-एजेंसी समूह (मैग) की सभी छह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश की जाएं। जस्टिस दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और एमएम शांतानागौडर की बेंच ने यह निर्देश उस वक्त दिया, जब केन्द्र ने उसे सूचित किया कि बहु-एजेन्सी समूह ने अपनी जांच की छठी रिपोर्ट पूरी कर ली है और सरकार सारी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने के लिए तैयार है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि हम केन्द्र सरकार को सभी छह रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर सीलबंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश देते हैं।



पनामा प्रकरण की जांच के लिए केन्द्र सरकार ने बहु-एजेन्सी समूह गठित किया था, जिसमें केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, भारतीय रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक गुप्तचर इकाई को शामिल किया गया था।केन्द्र की ओर से सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि अदालत को पहले इन रिपोर्ट का अवलोकन करना चाहिए ओर इसके बाद ही उसे इन्हें याचिकाकर्ता के साथ साझा करने या नहीं करने के बारे में निर्णय लेना चाहिए। इससे पहले, याचिकाकर्ता वकील मनोहर लाल शर्मा ने कहा कि ये रिपोर्ट उन्हें भी मिलनी चाहिए ताकि वह इस मामले में आगे बहस कर सकें।

इसके बाद ही सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को यह जानकारी दी। मामले की सुनवाई शुरू होते ही शर्मा ने दलील दी कि सरकारी एजेंसियां सही तरीके से इस मामले की जांच नहीं कर रही हैं और उन्होंने महत्वपूर्ण तय शीर्ष अदालत से छुपाए हैं। इस पर अदालत ने सवाल किया कि आप यह कैसे कह सकते हैं कि वे जांच नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया है कि वे मामले की जांच कर रहे हैं और जब प्रतिवादियों ने यह रुख अपनाया है कि वे जांच कर रहे हैं तो इस चरण में हम कुछ कैसे कह सकते हैं।




सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 24 नवम्बर को बाजार नियामक सेबी की अर्जी पर याचिकाकर्ता से जवाब तलब किया था। सेबी का कहना था कि विदेशों में कथित रूप से बैंक खाते रखने वाले जिन भारतीयों के नामों का पनामा दस्तावेज में उल्लेख है, उनके खिलाफ अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच के लिए दायर जनहित याचिका में उसे एक पक्षकार के रूप में घसीटा गया है।

Loading...