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पंचांग 9 जून 2021 : देखें आज की तिथि, मुहूर्त और शुभ योग

राष्ट्रीय मिति ज्येष्ठा 19, शक संवत् 1943 ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी बुधवार विक्रम संवत् 2078। सौर ज्येष्ठ मास प्रविष्टे 27, शव्वाल 27, हिजरी 1442 (मुस्लिम) तदनुसार अंग्रेजी तारीख 09 जून 2021 ई॰।

By प्रीति कुमारी 
Updated Date

Panchang 9 June 2021 See Todays Date Muhurta And Auspicious Yoga

हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदू मास एवं पक्ष आदि की जानकारी देते हैं। आइए जानते हैं आज का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय।

पढ़ें :- 23 जून का पंचांग: जानिए शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय तथा नक्षत्र, साथ ही आज अच्छे और बुरे समय कब आदि

विक्रम संवत – 2078, आनन्द
शक सम्वत – 1943, प्लव
पूर्णिमांत – ज्येष्ठ
अमांत – बैशाख
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि है, सूर्य वृषभ राशि में रहेंगे और चन्द्रमा वृषभ राशि में संचरण करेंगे

आज का पंचांग

ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी

नक्षत्र: कृत्तिका

पढ़ें :- 22 जून का पंचांग: आइये जाने शुभ मुहूर्त, राहुकाल का समय, तिथि, नक्षत्र, अच्छा और बुरा समय आदि

आज का दिशाशूल:उत्तर दिशा ।

आज का राहुकाल: 12:26 PM – 2:06 PM

सूर्य और चंद्रमा का समय

सूर्योदय – 5:44 AM
सूर्यास्त – 7:07 PM
चन्द्रोदय – Jun 09 4:42 AM
चन्द्रास्त -Jun 09 4:42 AM
चन्द्रास्त – Jun 09 6:22 PM

शुभ काल

पढ़ें :- पंचांग, ​​21 जून, 2021: देखें सोमवार के लिए तिथि, शुभ मुहूर्त, राहु काल और अन्य विवरण

अभिजीत मुहूर्त – Nil
अमृत काल – 06:01 AM – 07:50 AM
ब्रह्म मुहूर्त – 04:08 AM – 04:56 AM

योग

सुकर्मा – Jun 08 05:41 AM – Jun 09 06:47 AM
धृति – Jun 09 06:47 AM – Jun 10 07:48 AM

नक्षत्र: आकाश मंडल में एक तारा समूह को नक्षत्र कहा जाता है। इसमें 27 नक्षत्र होते हैं और नौ ग्रहों को इन नक्षत्रों का स्वामित्व प्राप्त है। 27 नक्षत्रों के नाम – अश्विन नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, मृगशिरा नक्षत्र, आर्द्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र, मघा नक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, घनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र।

वार: वार का आशय दिन से है। एक सप्ताह में सात वार होते हैं। ये सात वार ग्रहों के नाम से रखे गए हैं – सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।

योग: नक्षत्र की भांति योग भी 27 प्रकार के होते हैं। सूर्य-चंद्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है। दूरियों के आधार पर बनने वाले 27 योगों के नाम – विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।

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करण: एक तिथि में दो करण होते हैं। एक तिथि के पूर्वार्ध में और एक तिथि के उत्तरार्ध में। ऐसे कुल 11 करण होते हैं जिनके नाम इस प्रकार हैं – बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग और किस्तुघ्न। विष्टि करण को भद्रा कहते हैं और भद्रा में शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं।

 

 

 

 

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