पंचायत ने सुनाया ऐसा तुगलकी फरमान, जिसे सुनकर गरीब परिवार के पैरों तले खिसक गई जमीन

बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक ऐसा मामला देखने को मिला है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। जी हां घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने व गरीबी के कारण एक व्यक्ति गांव वालों को बेटी की शादी में दावत नहीं दे पाया। यह बात गांव वालों को इतनी बुरी लगी कि उन्होंने गांव में पंचायत बैठा दी। इसके बाद पंचों ने जो फैसला सुनाया उसे सुनकर गरीब परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। पंचों ने गरीब परिवार का हुक्का-पानी बंद करने का फैसला सुना दिया, जिसे लेकर परिवार के लोग सदमे में हैं।




घटना की तहरीर थाने में देकर न्याय की गुहार लगाई गई है। आधुनिक युग में आज भले ही इंसान चांद पर पहुंच गया हो, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोगों की जहनीयत में सुधार नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में आये दिन पंचों द्वारा तुगलकी फरमान सुनाने के मामले सामने आते रहे हैं। ताजा मामला उत्तराखंड सीमा से सटे जनपद के रेहड़ क्षेत्र के गांव जाब्तानगर का है। गांव के रमेश की पुत्री की गत 23 अप्रैल को शादी थी। रमेश की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उसने बेटी की शादी में गरीबी के कारण चंद लोगों को ही न्योता दिया था।




शादी सही निपट गई तथा पूरी बारात खुशी-खुशी शाम को लौट गई। लेकिन जिन लोगों को दावत में नहीं बुलाया गया वह रमेश से रंजिश रखने लगे। बताया जाता है कि 14 मई को गांव में पंचायत बुलाई गई, जिसमें रमेश को भी बुलाया गया था। घंटों तक चली पंचायत के बाद पंचों ने रमेश के परिवार का हुक्का-पानी बंद करने का फैसला सुना दिया जिसे सुनने के बाद रमेश के पैरों तले जमीन खिसक गई। ग्रामीणों के मुताबिक रमेश पंचायत में अपनी गरीबी का हवाला देकर हाथ जोड़ता रहा, लेकिन किसी ने उसकी एक नहीं सुनी। परेशान होकर पीड़ित ग्रामीण अपने परिवार के साथ थाने पहुंचा तथा घटना की तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई।