पंजीरी घोटाला: योगीराज में भी अखिलेश सरकार की दागी कंपनियां करेंगी सप्लाई

Panjiri Ghotala Yogiraaj Me Akhilesh Sarkar Ki Dagi Company Karegi Supply

लखनऊ। 700 करोड़ के पंजीरी घोटाले के प्रकाश में आने के बावजूद यूपी में 31 मई 2017 तक पंजीरी की सप्लाई उन्हीं कंपनियों से करवाई जाएगी, जिन्हें इस घोटाले में सीधे तौर पर लाभ पहुंचाया गया। विभाग के अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए इन कंपनियों से सप्लाई लेने को मजबूरी करार दे रहे हैं। विभाग का कहना है कि सरकार अभी तक इन कंपनियों को नए वित्तीय वर्ष के लिए मिले टेंडर पर कोई फैसला नहीं ले सकी है। टेंडरिंग प्रक्रिया पर कानूनी सलाह लेने के बाद नए टेंडर जारी कर सप्लायर्स के चयन तक पुरानी कंपनियों से सप्लाई जारी रखी जाएगी।




एक रिपोर्ट के मुताबिक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान समय में पुराने सप्लायर्स के अलावा कोई और विकल्प विभाग के सामने नहीं है क्योंकि अदालत के आदेश के मुताबिक वर्ष में 300 दिन पंजीरी की सप्लाई करना अनिवार्य है। पुराने टेंडरों की प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद टें​डरिंग की नई प्रक्रिया शुरू करने में कुछ समय लगेगा। नए सप्लायर्स का चुनाव होने में संभवतय: 30 से 45 दिनों का समय लग सकता है। इस दौरान पंजीरी की आपूर्ति के लिए पुराने सप्लायर्स पर निर्भरता मजबूरी है। जब तक नया टें​डरिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती तब तक इन्हीं सप्लायर्स ने पंजीरी खरीदी जाती रहेगी।




आरोप है कि निर्वासित प्रदेश सरकार के कार्यकाल दौरान बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अधिकारियों ने 2016—17 के लिए बिना किसी टेंडर के अपनी चहेती कंपनियों से पंजीरी की सप्लाई करवाई। साल भर के भीतर करीब 700 करोड़ की पंजीरी खरीद कर खपा दी गई और बिना किसी शासकीय मंजूरी के सप्लार्य को भुगतान भी कर दिया गया।

ऐसा करने के पीछे विभागीय अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल उस समय उठा जब सप्लाई की जा रही पंजीरी गुणवत्ता के मानकों पर खरी नहीं उतरने की बात सामने आई। सप्लायर्स की चोरी पकड़े जाने के बावजूद विभाग में अधिकारियों ने उनकी पूरी मदद करते हुए, धोखेबाज कंपनियों को फिर से फायदा पहुंचाने की रणनीति तैयार की। आचार संहिता लागू रहने के दौरान ही आनन फानन में गुपचुप तरीके से निर्वाचन आयोग की अनुमति लेकर टेंडर जारी किया गया और पुराने सप्लायर्स को ही 2017—18 की पंजीरी सप्लाई का काम सौंपने की पूरी तैयारी कर ली गई। ​विभागीय अाधिकारियों की रणनीति सफल हो चुकी थी, लेकिन इस बीच न्याय विभाग द्वारा लगाई गई अनापत्ति को नजरंदाज किए जाने ने पूरी टें​डरिंग प्रक्रिया को खटाई में डाल दिया।

लखनऊ। 700 करोड़ के पंजीरी घोटाले के प्रकाश में आने के बावजूद यूपी में 31 मई 2017 तक पंजीरी की सप्लाई उन्हीं कंपनियों से करवाई जाएगी, जिन्हें इस घोटाले में सीधे तौर पर लाभ पहुंचाया गया। विभाग के अधिकारी सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का हवाला देते हुए इन कंपनियों से सप्लाई लेने को मजबूरी करार दे रहे हैं। विभाग का कहना है कि सरकार अभी तक इन कंपनियों को नए वित्तीय वर्ष के लिए मिले टेंडर पर कोई फैसला…