पैराडाइज पेपर्स खुलासे में 714 भारतीय, कारोबारियों, नेता और अभिनेताओं के नाम शामिल

पैराडाइज पेपर्स खुलासे में 714 भारतीय, कारोबारियों, नेता और अभिनेताओं के नाम शामिल

नई दिल्ली। साल 2016 में पनामा पेपर्स के जरिए दुनिया के कई ताकतवर लोगों के काले लेनदेन का खुलासा कारने वाले जर्मन अखबार जीटॉयचे साइटुंग ने पैराडाइज पेपर्स के जरिए खुलासा कर एकबार फिर दुनिया को हिलाने का काम किया है। पैराडाइज पेपर्स में 13.4 मिलियन दस्तावेज होने का दावा किया गया है। जिसमें उन फार्मों के ​लेनदेन का ब्यौरा मौजूद हैं जो लोगों का पैसा एक देश से दूसरे देश पहुंचाने का काम करतीं हैं। जीटॉयचे साइटुंग के भारतीय सहयोगी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित लेख के मुताबिक पैराडाइज पेपर्स में 714 भारतीय नागरिकों के नाम सामने आए हैं। जिनमें राजनेता, मनोरंजन की दुनिया से जुड़े लोग और बड़े कारोबारियों के नाम शामिल हैं।

पैराडाइज पेपर्स के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि कैसे लोग बेनामी कंपनियों की मदद से अपना पैसा विदेशों में भेज रहे हैं। पैराडाइज पेपर्स में करीब 13.4 मिलियन दस्तावेज हैं जिनमें कई फर्मों और ऐसी फर्जी कंपनियों के लेन देनों का चिट्ठा मौजूद है जो दुनिया की जानीमानी हस्तियों के पैसे को टैक्स हैवन देशों तक पहुंचाने के लिए माध्यम के रूप में काम कर रहीं हैं।

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पैराडाइज पेपर्स में ऐसी कंपनियों के लेनदेनों को दिखाया गया है जो वैश्विक स्तर पर सक्रिय होकर अंतरदेशीय कानूनों में मौजूद लूप होल्स की मदद से अपना धंधा करतीं हैं। मुख्य रूप से ये कंपनियां बड़े पूंजीपतियों और बड़ी हस्तियों जिनके पास बड़ी रकमें मौजूद हैं को अपनी सेवाएं देती हैं। उन्हें टैक्स और कानूनी संबन्धी पेंचों से बचातीं हैं। इनमें कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं जिनका इतिहास 100 सालों से भी ज्यादा पुराना है।

पैराडाइज पेपर्स मामले में सामने आए नामों में अमिताभ बच्चन और केन्द्रीय विमानन राज्यमंत्री
जयंत सिन्हा के अलावा सत्तारूढ़ दल के नेताओं के नाम शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस खुलासे को विपक्ष सरकार के खिलाफ मुद्दा बना सकती है।

कैसे विदेश जाता है पैसा —

पैराडाइज पेपर्स के खुलासे में बताया गया है कि कुछ कंपनियां जोकि टैक्स हैवन कहलाने वाले देशों में बिना किसी कारोबार के कानूनी रूप से सक्रिय हैं। ये कंपनियां अन्य देशों से पैसा लेकर टैक्स हैवन कहलाने वाले देशों की बैकों में दुनिया भर में मौजूद अपने निवेशकों की रकमें टैक्स हैवन्स में जमा करतीं हैं। इन देशों के कानून के मुताबिक वहां सक्रिय कंपनी के माध्यम से पहुंचने वाले निवेश पर न तो कोई टैक्स लगाया जाता है और न ही निवेशक से जुड़ी कोई जानकारी मांगी जाती है। उस निवेश को किस कारोबार के लिए लाना है यह दिखाने के लिए कंपनी को किसी तरह का भौतिक कारोबार करने की अनिवार्यता भी नहीं है। ऐसे में कंपनियां पूरी तरह से कागजों पर सक्रिय रहतीं हैं, जो कानूनी तौर पर उन्हें एक कंपनी या फर्म के रूप में अस्तित्व प्रदान करता है।

इन कंपनियों के शेयरों के जरिए लोग अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा विदेश भेज देते हैं। शेयरों का खरीदा जाना एक औपचारिकता है जिसके जरिए कंपनी निवेश से पैसा उठाकर सीधे टैक्स हैवन देशों में पहुंचा देते हैं।

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