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पारस हॉस्पिटल को मिली क्लीन चिट! तो विपक्ष बोला- योगी जी बताएं ‘पारस’ को छूकर ‘सोना बनाने वाला फॉर्मूला’

यूपी के आगरा जिले में स्थित श्री पारस हॉस्पिटल के संचालक को मॉक-ड्रिल मामले में डॉ. अरिंजय जैन को जांच कमेटी ने क्लीन चिट दे दी है। बता दें कि मॉकड्रिल का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आते हुए अस्पताल को सील किया था। संचालक समेत अन्य के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अस्पताल हुई मॉकड्रिल के दौरान 22 लोगों की मौत होने के आरोप लगे थे। डीएम ने बताया कि जांच में आक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत होने का कोई कारण सामने नहीं आया है।

By संतोष सिंह 
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लखनऊ। यूपी के आगरा जिले में स्थित श्री पारस हॉस्पिटल के संचालक को मॉक-ड्रिल मामले में डॉ. अरिंजय जैन को जांच कमेटी ने क्लीन चिट दे दी है। बता दें कि मॉकड्रिल का वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आते हुए अस्पताल को सील किया था। संचालक समेत अन्य के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हॉस्पिटल में हुई मॉकड्रिल के दौरान 22 लोगों की मौत होने के आरोप लगे थे। हालांकि डीएम ने बताया कि जांच में आक्सीजन की कमी से मरीजों की मौत होने का कोई कारण सामने नहीं आया है।

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बीते सात जून को वायरल हुए वीडियो की शुक्रवार रात आई जांच रिपोर्ट में डॉ. अरिन्जय जैन को ऑक्सीजन बंद, मॉकड्रिल, 22 मरीज छंटनी जैसे आरोपों पर अघोषित क्लीनचिट दे दी है। डॉ. जैन को सिर्फ मरीजों को डिस्चार्ज करने और महामारी फैलाने के आरोप सिद्ध हुए हैं। प्रशासनिक जांच में मरीजों की मौत की वजह ऑक्सीजन की कमी नहीं हुई। जबकि वीडियो में डॉ. अरिन्जय जैन सुबह सात बजे मॉकड्रिल की बात कह रहे थे।

वायरल वीडियो में हॉस्पिटल में ऑक्सीजन संकट में मॉक ड्रिल से पांच मिनट में 22 गंभीर मरीजों की मौत की बात कही जा रही थी। वीडियो में हॉस्पिटल संचालक के सामने एक शख्स बोलता है कि 22 लोग मर गए थे। यह पूरी बातचीत 26/27 अप्रैल को सामने आए ऑक्सीजन संकट के संदर्भ में थी। श्री पारस हॉस्पिटल  में मॉक ड्रिल बीते 26 अप्रैल, 2021 की सुबह सात बजे की गई थी।

डीएम ने बताया कि छह मृतक ऐसे हैं जिनकी मृत्यु का समय मॉकड्रिल के समय से मिल रहा है। डीएम की रिपोर्ट में पीड़ित के बयानों का कहीं भी ज़िक्र नहीं नहीं है। अरिंजय जैन के बयान के आधार पर एकतरफा रिपोर्ट तैयार करने के आरोप लगे हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक 26 व 27 अप्रैल को मरने वाले 16 मरीजों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में 14 ऐसे मिले हैं जिन्हें पुरानी बीमारियां थीं। सिर्फ 2 मृतक ऐसे हैं, जिन्हें कोई बीमारी नहीं थी। 16 मृतकों में 11 आगरा, दो मैनपुरी, दो फिरोजाबाद, एक इटावा से था। कुल नौ मृतक ऐसे थे जिन्होंने अस्पताल में भर्ती होने एक से पांच दिन में दम तोड़ दिया। डीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। जांच रिपोर्ट कई पन्नों की है। जिन लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी उन्हें डेथ समरी दी गई है।

इस मॉकड्रिल के समय हॉस्पिटल में 96 कोरोना मरीज भर्ती थे। जिनमें से केवल 74 मरीज जिंदा बचे। हॉस्पिटल के संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के चार वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें वह ऑक्सीजन के बड़े संकट वाले दिन का किस्सा बयां कर रहे हैं। इसे लेकर हंगामा खड़ा होने पर हॉस्पिटल संचालक वीडियो को तोड़-मरोड़ कर वायरल करने की बात कही थी।

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हॉस्पिटल को जांच कमेटी से क्लीन चिट मिलने के मामले में आगरा जिले जनप्रतिनिधियों ने भी सवाल उठाए हैं। इस मामले की शिकायत अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करने की बात कही है।

समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य सुनील सिंह यादव इस मामले में ट्वीट कर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बड़ा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि बचपन से सुनता आया हूं कि जो “पारस” को छू दे वो सोने का हो जाता था। यादव ने कहा कि आज योगी आदित्यनाथ सरकार की जांच को देख कर यक़ीन हो गया है। खुद एक वीडियो में ऑक्सीजन मॉक ड्रिल के नाम पे 22 मरीज़ों की जान लेने वाले आगरा के “पारस” हॉस्टिपल और उसके मालिक को क्लीन चिट दे दिया गया। जाने पारस ने कितनों को छुआ होगा?

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