खबर का असर: 1000 करोड़ की बंद अमृत योजनाओं की पुनर्समीक्षा करेगा जल निगम

लखनऊ। नगर विकास विभाग की ओर से अमृत योजना के तहत वर्ष 2015—16 व 2016—17 में पारित की गई करीब 1000 करोड़ की लागत वाली योजनाओं को बंद करने को लेकर पर्दाफाश द्वारा प्रकाशित खबर को जल निगम ने गंभीरता से लिया है। जल निगम के एनयूआरएम के चीफ अभियंता मो0 जुबेर अहमद ने नगर विकास विभाग की ओर से रोकी गई सभी 14 योजनाओं के पुनर्समीक्षा के लिए गुरुवार को बैठक बुलाई है। जिसमें जल निगम के सभी 10 क्षेत्रीय मुख्य अभियंताओं से इन योजनाओं के विषय में औचित्य आख्या मांगी गई है। जिसके आधार पर जल निगम की ओर से नगर विकास विभाग को इन योजनाओं को जारी रखने के लिए प्रस्ताव भेजा जाएगा।

सूत्रों की माने तो केन्द्र सरकार के सहयोग से संचालित अटल नवीनीकरण एवं शहरी रूपांतरण योजना (अमृत) के तहत आने वाली इन योजनाओं के लिए नगर विकास विभाग के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन मौजूद नहीं हैं।

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वहीं जल निगम के लिए इन योजनाओं का खाका खींचने वाले अभियंताओं की माने तो नगर विकास विभाग उनकी मेहनत के साथ ही इन योजनाओं को डिजायन करने में आए करोड़ों के खर्च पर पानी फेर रहा है। ये योजनाएं शहरी आबादी में रहने वाले लाखों परिवारों को प्रभावित करने की नियत से डिजायन की गईं थीं। जिसके तहत करोड़ों की शहरी आबादी को पेय जल और सीवर तंत्र से जोड़ा जाना था।

टीम पर्दाफाश की नगर विकास विभाग और जल निगम के अधिकारियों से अपील है कि ये योजनाएं भले ही निर्वासित सरकार के कार्यकाल में डिजायन हुईं हों और पारित भी लेकिन इनके साथ जुड़ी लोक कल्याण की भावना को नजरंदाज करना गलती होगी।

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