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Parivartini Ekadashi 2022 : इस एकादशी पर श्री हरि शयन करते हुए करवट लेते हैं, लक्ष्मी पूजन भी श्रेष्ठ माना गया है

सनातन धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का बहुत महात्म है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Parivartini Ekadashi 2022: सनातन धर्म में परिवर्तिनी एकादशी का बहुत महात्म है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है। पैराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन निर्जला व्रत रखने से सर्वमनोकामना पूर्ण होती है। इस एकादशी को देश के कई क्षेत्रों में पार्श्व एकादशी के रूप में भी जाना जाता है। इस एकादशी पर श्री हरि शयन करते हुए करवट लेते हैं इसलिए इसे एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत में भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करने से वाजपेय यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है और मनुष्य के समस्त पाप नष्ट होते हैं। यह देवी लक्ष्मी का आह्लादकारी व्रत है इसलिए इस दिन लक्ष्मी पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है

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एकादशी व्रत
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 06 सितंबर मंगलवार को प्रातरू 05 बजकर 54 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और इस तिथि का समापन अगले दिन 07 ​सितंबर बुधवार को सुबह 03 बजकर 04 मिनट पर होगा। इस साल रिवर्तिनी एकादशी व्रत 06 सितंबर को रखा जाएगा।

ऋतु फल और तिल का उपयोग करें
व्रत वाले दिन प्रात:काल उठकर भगवान का ध्यान करें और स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष घी का दीप जलाएं।
भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी, ऋतु फल और तिल का उपयोग करें। व्रत के दिन अन्न ग्रहण ना करें। शाम को पूजा के बाद फल ग्रहण कर सकते हैं।

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