तेजाब हत्याकांड: शहाबुद्दीन की उम्रकैद बरकरार, ये था घटनाक्रम

पटना। बिहार के सीवान के सबसे चर्चित केस तेजाब हत्याकांड मामले में निचली अदालत से उम्र कैद की सजा पा चुके पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन सहित चार लोगों को पटना उच्च न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली। पटना हाई कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई पूरी होने के बाद शहाबुद्दीन के अलावा राजकुमार साह, मुन्ना मियां और शेख असलम की उम्रकैद की सजा भी बरकरार रखी है

शहाबुद्दीन को निचली अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए शहाबुद्दीन के वकील ने पटना उच्च न्यायालय का दरवाज खटखटाया था। सीवान की एक अदालत ने इस मामले में 11 दिसंबर, 2015 को दो भाइयों की तेजाब डालकर हत्या कर देने के मामले में शहाबुद्दीन सहित चार लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी।

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ये था मामला-

बीते 16 अगस्त, 2004 को सीवान के व्यवसायी चंद्रकेश्वर प्रसाद उर्फ चंदा बाबू के बेटों गिरीश, सतीश और राजीव का अपहरण किया गया था। गिरीश और सतीश की तेजाब डालकर हत्या कर दी गई थी, जबकि राजीव उनके चंगुल से भाग निकलने में कामयाब रहा था। इस मामले में गिरीश की मां कलावती देवी के बयान पर मामला दर्ज किया गया था। अदालत ने शहाबुद्दीन को धारा 302, 201, 364 और 120B का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

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हत्याकांड के गवाह और मृतकों के भाई राजीव ने अदालत को बताया था कि वारदात के समय पूर्व सांसद शहाबुद्दीन खुद वहां उपस्थित थे। बाद में राजीव की भी हत्या कर दी गई थी। शहाबुद्दीन इस समय दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। 16 जून 2014 को सीवान के डीएवी कॉलेज मोड़ पर चंदा बाबू के तीसरे बेटे राजीव रौशन की भी गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी। इस मामले में शहाबुद्दीन और उनके पुत्र ओसामा नामजद अभियुक्त हैं।

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