पटना रैली: भगानी थी भाजपा, जपते रहे नीतीश-नीतीश

पटना रैली: भगानी थी भाजपा, जपते रहे नीतीश-नीतीश

पटना। बिहार से 2019 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को निर्धारित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के जिस नियत के साथ आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पटना में भाजपा भगाओ देश बचाओ रैली का आयोजन किया वह किसी भी नजरिए से पूरी होती नहीं दिखी। न तो मंच पर केन्द्र की राजनीति के दिग्गज नजर आए और न ही मंच से हुए भाषणों में वो धार नजर आई जिनसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर कोई सवाल खड़ा होता।

लालू सेकुलर दलों के गठबंधन की जिस बयार को अपनी रैली के माध्यम से आंधी बनाना चाहते थे उसे सबसे पहला झटका कांग्रेस ने दिया। बिहार में 27 विधायकों वाली कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से रैली के मंच पर पहुंचे सबसे बड़े चेहरे के रूप में गुलाम नवी आजाद नजर आए। जिसका सीधा मतलब यही निकाला गया कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी की नजर में लालू प्रसाद यादव का सियासी कद गुलाम नवी आजाद से भी छोटा है। इसके अलावा इसका दूसरा अर्थ यह भी निकाला जा रहा है कि लालू के साथ खुद से खड़े होकर गांधी परिवार तीन साल बाद फिर से भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी फजीहत नहीं करवाना चाहता।

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मंच तक पहुंचे नेताओं की बात की जाए तो राष्ट्रीय स्तर के चेहरों में कांग्रेस से गुलाम नवी आजाद, जदयू के बागी शरद यादव, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, झारखंड से हेमंत सोरेन के अलावा मंच पर कोई ऐसा दिग्गज नजर नहीं आया जिसका सियासी कद लालू प्रसाद यादव के सियासी कद के आस पास भी ठहरता हो।

लालू ने जिस रैली का नाम भाजपा भगाओ, देश बचाओ रखा था उसी के मंच से वह नीतीश कुमार से खुन्नस निकालते नजर आए। उन्होंने रैली में आए कार्यकर्ताओं के सामने दिए अपने भाषण का 90 फीसदी हिस्सा नीतीश कुमार के नाम कर दिया बचे हुए समय में वह सुशील मोदी और बिहार की राजनीति तक ही सीमित रह गए।

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लालू ने अपने भाषण में कहा कि नीतीश कुमार ने यहां आए लोगों की पीठ पर लात मारी है। इस रैली की योजना तीन महीने पहले राजगीर में बनी थी। उस समय देश के वर्तमान हालात को देखते हुए इस रैली की तैयारी की गई थी। नीतीश कुमार महागठबंधन सरकार का हिस्सा हुआ करते थे। रविवार का दिन इसलिए तय हुआ कि किसी को कोई समस्या न हो, स्कूलों—कॉलेजों और दफ्तरों की छुट्टी रहेगी।

रैली में भीड़ की ओर इशारा करते हुए लालू ने कहा कि आपकी ताकत अपार है। हमें दिल्ली की गद्दी पर बैठी फासीवादी और कम्युनल ताकत को हटाना होगा। जब हमने नीतीश कुमार के साथ महागठंबधन बनाया था तो हमें मालूम था कि वह ठीक आदमी नहीं है। नीतीश कुमार गंजी पैजामा पहनकर दिल्ली में शरद यादव के यहां घूमा करते थे, आज कहते घूम रहे है​ कि लालू प्रसाद यादव को हमने बनाया है। वह इंजीनियरिंग कालेज में एक कमरे के हास्टल में रहा करते थे, और हम पटना यूनीवर्सिटी के जनरल सिक्रेटरी हुआ करते थे। जिसे सभी जाति और धर्म के लोगों ने वोट दिया था।

इसके साथ ही उन्होने कहा कि नीतीश कुमार की कोई सोच या सिद्धांत नहीं है। मुलायम सिंह यादव के कहने पर हमने नीतीश कुमार को महागठबंधन का नेता बनाया था। सबको अपने आधार वाले क्षेत्र में टिकट दिया गया। हमने घूम घूम कर प्रचार किया। आरजेडी को 80, जदयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटें मिली तो लोगों ने हमसे पूछा भी कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। मैने कहा था कि मैं उसूल का पक्का हूं। गरीबों ने मेरे चेहरे पर वोट दिया है।

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हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाते समय भी कहा था कि आराम से काम करो कोई परेशानी नहीं आएगा। तेजस्वी को भी कहा था कि कोई गलती नहीं होनी चाहिए इस तरह से काम करना। तेजस्वी ने अच्छा काम किया इसी बात से नीतीश कुमार को जलन हो गई।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार मेरे घर आया और कहने लगा कि एक बार अशीर्वाद दे ​दीजिए। इस बार मुख्यमंत्री बना दीजिए। हमने बना दिया। मुख्यमंत्री बनते ही पैंतराबाजी करने लगा। उसे तेजस्वी से डर लगने लगा था। इसीलिए नरेन्द्र मोदी और अमित शाह से मिलकर इसने सीबीआई का छापा डलवाया और मीराकुमार को भी अपमानित किया।

नीतीश कुमार की भाजपा के साथ सांठ गांठ चल रही थी, लेकिन हमको ऐसा लग रहा था कि नीतीश ऐसा नहीं करेगा। बाद में वही हुआ बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना लिया। जिस शरद यादव ने कभी उसे मंत्री बनाया था आज वही नीतीश शरद यादव को गाली दे रहा है।

नीतीश कुमार के शराबबंदी के फैसले पर लालू ने कहा कि हमने मना किया था कि शराब बंदी लागू कैसे होगी। हमारे पड़ोसी राज्यों में तो शराब बिक रही है। लेकिन वह नहीं माना और शराबबंदी लागू कर दी। अब देखो आज घर घर शराब पहुंच रही है। ताड़ी पर भी रोक लगा दिया। ताड़ी तो गरीब आदमी की आमदनी का जरिया थी, हमने मुख्यमंत्री रहते ताड़ी पर बसूले जाने वाले टैक्स मे छूट दी थी।

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उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले नीतीश कुमार सृजन घोटाले पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे, जबकि अब उनके उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को इस घोटाले की पूरी जानकारी थी। अब वह जांच नहीं करवा रहे। सृजन घोटाले में जिस विपिन का नाम सामने आया है वह बीजेपी के किसान मोर्चे का अध्यक्ष है। बीजेपी के सारे नेता इस घोटाले में शामिल हैं। इस घोटाले में मंडल एक गवाह था उसे मार दिया गया। अब हम मांग करते हैं कि इस घोटाले की जांच एक रिटायर्ड जज की निगरानी में सीबीआई से करवाई जाए। सब बीजेपी के नेता इस घोटाले में फंसेगे।

लालू प्रसाद यादव ने कहा कि उन्होंंने जो लड़ाई शुरू की है वह खत्म नहीं होगी। देश के हर कोने में जाकर वह रैली करेंगे और भाजपा को उखाड़ फेंकने का काम करेंगे।