कभी थे कॉलेज के बैकबेंचर आज हैं भारत के सबसे अरबपति युवा

vijay shekhar sharma, भारत के सबसे अरबपति युवा
कभी थे कॉलेज के बैकबेंचर आज हैं भारत के सबसे अरबपति युवा

Paytm Founder Vijay Shekhar Sharma Success Story

नई दिल्ली। आज हम आपको देश के सबसे अरबपति युवा के जीवन के संघर्ष की कहानी बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप भी अपने जीवन में कुछ कर गुजरने की ठान लेंगे। अलीगढ़ के पास एक छोटे से कस्बे हरदुआगंज में जन्मे विजय शेखर शर्मा के पास पढ़ने के लिए मात्र दो किताबें थी और घर की माली स्थिति ठीक न होने की वजह से उन्हे जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा। मोबाइल वॉलेट Paytm के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। विजय ने 14 साल की उम्र में ही इंटर पास कर लिया था जिसके बाद उन्हे इंजिनियरिंग में दाखिला लेने के लिए 4 साल इंतजार करना पड़ा।

कॉलेज के बैकबेंचर बने भारत के सबसे अरबपति युवा

  • पेटीएम के फाउंडर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय की मां हाउसवाइफ और पिता स्कूली टीचर थे और हिंदी मीडियम से शिक्षा हासिल की।
  • हिंदी मीडियम में पढ़ाई करने की वजह से अंग्रेजी में एंट्रेंस एग्जाम देना उनके लिए एक कठिन काम था लेकिन 1994 में उन्होंने एग्जाम पास कर दिखाया।
  • दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में दाखिला लिया हालांकि अंग्रेजी कमजोर होने की वजह से काफी उन्हे समस्या भी हुई। क्लासमेट्स के सामने उन्हें शर्मिंदगी होने लगी और वह बैकबेंचर्स की लिस्ट में आ गए।
  • अंग्रेजी सीखने के लिए वह एक दो किताबें एक साथ पढ़ने लगे। एंटरटेनमेंट मैगजीन के साथ-साथ बिजनेस मैगजीन भी पढ़ने लगे।

संघर्ष से सफलता का सफर

  • IIM की फीस उस वक्त करीब 2-3 लाख थी, उनके पास इतने पैसे नहीं थे। उन्होंने तब खुद से वादा किया कि एक दिन वह IIM ग्रैजुएट्स को अपनी कंपनी में नौकरी देंगे।
  • एक इंटरव्यू में उन्होने बताया, ‘कभी-कभी मेरे पास डिनर के भी पैसे नहीं होते थे। दो कप चाय से ही मेरा काम चल जाता था। 10 रुपए बचाने के लिए मैं बस लेने के बजाए पैदल ही चल लिया करता था।’
  • कॉलेज में रहते हुए ही विजय ने Indiasite.net (XS) नाम की एक वेबसाइट शुरू की और कुछ वर्षों के भीतर उसे एक यूएस इन्वेस्टर को बेच दिया। उस वक्त उनकी उम्र केवल 21 वर्ष थी।
  • हर सप्ताह उन्हें लाखों रुपए मिलने लग गए, यह उनका पहला प्रॉफिटेबल वेंचर था।
  • कॉलेज में वीएसएस के नाम में मशहूर विजय के दोस्तों के लिए यह सब कुछ हैरान करने वाला था।
  • कुछ दूसरे प्रोजेक्ट पर काम करने के बाद विजय को लगा कि वह जैसे ‘सोने की हथकड़ियों’ में बंधकर रह गए हैं यानी उन्हें इतना ज्यादा पैसा मिल रहा था कि वे इसे छोड़ नहीं पा रहे थे।
  • कुछ समय बाद शर्मा ने अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर एक कंपनी बनाई- XS Corps जो फर्म कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम बनाने का काम करती थी।
  • उस समय कंपनी के ऑफिस के नाम पर उनका हॉस्टल रूम और ऑफिस की लैंडलाइन के नाम पर दुकानदार का फोन ही था।
  • इसके बाद उन्होंने पूंजी जुटाकर One97 नाम से एक कंपनी स्टार्ट की जो पेटीएम की पेरेंट कंपनी थी।
  • 2011 में उनकी जिंदगी का सबसे अहम वक्त आया जब उन्होंने बोर्ड के सामने पेटीएम इकोसिस्टम का आइडिया दिया।
  • विजय ने 2011 में मोबाइल वॉलेट पेटीएम के साथ ही ई- कॉमर्स कारोबार पेटीएम मॉल और पेटीएम पेमेंट्स बैंक भी खड़ा किया।
  • अपने जीवन के संघर्ष की कहानी बताते हुए विजय कहते हैं, ‘यह मायने नहीं रखता है कि आप बड़े शहर से हैं या छोटे से कस्बे से, बिल्कुल भी नहीं आपके अंदर बस गंभीरता होनी चाहिए।’
नई दिल्ली। आज हम आपको देश के सबसे अरबपति युवा के जीवन के संघर्ष की कहानी बताने जा रहे हैं जिसे सुनकर आप भी अपने जीवन में कुछ कर गुजरने की ठान लेंगे। अलीगढ़ के पास एक छोटे से कस्बे हरदुआगंज में जन्मे विजय शेखर शर्मा के पास पढ़ने के लिए मात्र दो किताबें थी और घर की माली स्थिति ठीक न होने की वजह से उन्हे जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा। मोबाइल वॉलेट Paytm के फाउंडर और मुख्य…