भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पेरू के राष्ट्रपति कुजिंस्की ने दिया इस्तीफा

President pedro pablo kuczynski
भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे पेरू के राष्ट्रपति कुजिंस्की ने दिया इस्तीफा

नई दिल्ली। पेरू के राष्ट्रपति प्रेडो पाब्लो कुजिंस्की ने अपने खिलाफ महाभियोग से पहले अपना इस्तीफा सौंप दिया है।सूत्रों के मुताबिक, कुजिंस्की ने बुधवार को टेलीविजन पर अपने संबोधन के दौरान कहा कि वह खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से सरकार चलाने में असमर्थ हैं।

Peru President Pedro Pablo Kuczynski Announced His Resignation :

कुजिंस्की ने कहा, “इस मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा हूं, जिसमें मुझे अनुचित तरीके से दोषी ठहराया जा रहा है, वह भी ऐसी गतिविधियों के लिए, जिनमें मेरी कोई भागीदारी नहीं रही। मुझे लगता है कि यह देश के लिए सही होगा कि मैं राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दूं।” उन्होंने कहा, “मैं देश के लिए जरूरी एकता और सौहार्द के लिए बाधा नहीं बन सकता।”

कारोबारी से नेता बने कुजिंस्की ने जुलाई 2016 में राष्ट्रपति पद संभाला था लेकिन वह जल्द ही भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए। उन पर आरोप है कि उन्होंने ब्राजील की कंपनी ओडेब्रेक्ट को ठेके दिलाने में घूस ली। कांग्रेस ने उनके खिलाफ दिसंबर 2017 में महाभियोग चलाया था लेकिन अपर्याप्त वोटों की वजह से यह महाभियोग औंधे मुंह गिर गया था।

नई दिल्ली। पेरू के राष्ट्रपति प्रेडो पाब्लो कुजिंस्की ने अपने खिलाफ महाभियोग से पहले अपना इस्तीफा सौंप दिया है।सूत्रों के मुताबिक, कुजिंस्की ने बुधवार को टेलीविजन पर अपने संबोधन के दौरान कहा कि वह खुद पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से सरकार चलाने में असमर्थ हैं।कुजिंस्की ने कहा, "इस मुश्किल स्थिति का सामना कर रहा हूं, जिसमें मुझे अनुचित तरीके से दोषी ठहराया जा रहा है, वह भी ऐसी गतिविधियों के लिए, जिनमें मेरी कोई भागीदारी नहीं रही। मुझे लगता है कि यह देश के लिए सही होगा कि मैं राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा दे दूं।" उन्होंने कहा, "मैं देश के लिए जरूरी एकता और सौहार्द के लिए बाधा नहीं बन सकता।"कारोबारी से नेता बने कुजिंस्की ने जुलाई 2016 में राष्ट्रपति पद संभाला था लेकिन वह जल्द ही भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गए। उन पर आरोप है कि उन्होंने ब्राजील की कंपनी ओडेब्रेक्ट को ठेके दिलाने में घूस ली। कांग्रेस ने उनके खिलाफ दिसंबर 2017 में महाभियोग चलाया था लेकिन अपर्याप्त वोटों की वजह से यह महाभियोग औंधे मुंह गिर गया था।