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पीएफ घोटाला : 8 किस्तों में किया गया था कमीशन का भुगतान, फर्जीवाड़े में एक IAS के रिश्तेदार की फर्म भी शामिल

Pf Scam Commission Was Paid In Eight Installments The Firm Of An Ias Relative Was Also Involved In The Fraud

By शिव मौर्या 
Updated Date

लखनऊ। यूपी पावर कॉर्पोरेशन (यूपीपीसीएल) में हुए पीएफ घोटाले की जांच में हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि सात से आठ किस्तों में कमीशन का भुगतान किया गया है। इसमें प्रवीण कुमार गुप्ता के बेटे अभिनव ने अहम भूमिका निभाई थी। अभिनव ने ही तय किया था कि किस फर्म को कितना कमीशन दिया जाना है। पूछताछ में अभिनव ने फर्मों के बारे में अहम जानकारी दी।

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सूत्रों की माने तो पूछताछ में सामने आया कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के बहुत ही करीबी रिश्तेदार की फर्म भी इस पूरे खेल में शामिल थी। सूत्रों का कहना है कि डीएचएफएल ने ईओडब्ल्यू को यूपीपीसीएल के मामले में हुए सभी ट्रांजेक्शन का ब्योरा सौंप दिया है। बताया जा रहा है ​कि निवेश में ब्रोकर की भूमिका निभाने वाली फर्मों को कमीशन के तौर पर सात से आठ किस्तों में भुगतान किए गए।

ईओडब्ल्यू ने डीएचएफएल से यह भी पूछा है कि कमीशन देने का पैमाना क्या था और जिन फर्मों को बतौर ब्रोकर शामिल किया गया, उनका आधार क्या था? ईओडब्ल्यू बैंकों से पहले ही इन फर्मों के खातों तथा खाता संचालक का ब्योरा तलब कर चुकी है। हालांकि छुट्टियों की वजह से ब्योरा मिलने में देरी हो रही है। उधर, ट्रस्ट के पूर्व सचिव पीके गुप्ता के बेटे अभिनव गुप्ता से ईओडब्ल्यू के अधिकारी लगातार पूछताछ कर रहे हैं।

घोटाले में सफेदपोशों के शामिल होने की आशंका
यूपीपीसीएल में हुए पीएफ घोटाले में सफेदपोशों के शामिल होने की आशंका है। सूत्रों की माने तो शुरूआती जांच में अभी तक की जांच में कुछ सफेदपोश लोगों के नाम भी सामने आए हैं। हालांकि लिखा-पढ़ी में इसका कोई सुबूत जांच एजेंसी को नहीं मिल पा रहा है। सफेदपोशों की पैठ काफी ऊंची बताई जा रही है। ईओडब्ल्यू के अधिकारी मंथन कर रहे हैं कि जांच में किस तरह आगे बढ़ा जाए।

पूर्व चेयरमैन संजय अग्रवाल से भी होगी पूछताछ
यूपीपीसीएल के पूर्व चेयरमैन संजय अग्रवाल से भी पूछताछ की जा सकती है। बताया जा रहा है कि डीओडब्ल्यू पूर्व चेयरमैन को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलायेगी। हालांकि, इस पर भी विचार किया जा रहा है कि दिल्ली जाकर संजय अग्रवाल से पूछताछ की जाए। इसके साथ ही संजय अग्रवाल को डाक से सवाल भेजकर उनके जवाब मांगे जाएं इस पर ईओडब्ल्यू विचार कर रही है।

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