PF घोटाला : EOW की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, IAS अफसरों को बचाने का आरोप

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PF घोटाला : EOW की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, IAS अफसरों को बचाने का आरोप

लखनऊ। यूपी पावर कॉरपोरेशन में हजारों करोड़ रुपए के पीएफ घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के हाथ अब तक बड़े बाबुओं (आईएएस) के गिरेबान तक नहीं पहुंचे हैं। ईओडब्ल्यू ने पावर कारपोरेशन और कर्मचारी ट्रस्ट के चेयरमैन रह चुके आईएएस अफसर संजय अग्रवाल और आलोक कुमार को अब तक पूछताछ का नोटिस तक नहीं दिया है। पावर कॉरपोरेशन की पूर्व एमडी अपर्णा यू से भी पूछताछ नहीं हुई है। कर्मचारियों का आरोप है कि ये अफसर ही डीएचएफएल को पीएफ फंड देने के मुख्य जिम्मेदार हैं। अब इसे लेकर कर्मचारी जांच एजेंसी पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं।

Pf Scam Questions Arising Over The Functioning Of Eow Accused Of Protecting Ias Officers :

ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी और सचिव (ट्रस्ट) पीके गुप्ता को गिरफ्तार कर पूछताछ की और जेल भी भेज दिया। इसके बाद तत्कालीन एमडी एपी मिश्र की गिरफ्तारी हुई। तीनों अधिकारियों के घर छापेमारी तक की गई, लेकिन आश्चर्यजनक यह रहा कि मामले में अब तक किसी आईएएस अफसर से कोई पूछताछ नहीं हुई। डीएचएफएल में जब पहला निवेश किया गया, तो ट्रस्ट के चेयरमैन संजय अग्रवाल ही थे। दरअसल मार्च 2017 में डीएचएफएल में निवेश शुरू हुआ। संजय अग्रवाल मई, 2017 तक ट्रस्ट के चेयरमैन रहे।

पीएफ की रकम का निवेश जब पहली बार डीएचएफएल में किया गया, तो ट्रस्ट के चेयरमैन संजय अग्रवाल थे जबकि पावर कॉरपोरेशन के एमडी एपी मिश्र थे। 23 मार्च, 2017 को एपी मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद आईएएस विशाल चौहान को एमडी बनाया गया। विशाल चौहान इस पद पर करीब सात महीने तक रहे। एमडी ही ट्रस्ट का ट्रस्टी होता है, मगर ईओडब्ल्यू ने अब तक उनसे पूछताछ नहीं की है।

सर्वाधिक निवेश आलोक कुमार और अपर्णा यू के कार्यकाल में
डीएचएफएल में 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आईएएस आलोक कुमार के चेयरमैन रहते किया गया। आलोक कुमार को मई, 2017 में पावर कॉरपोरेशन का चेयरमैन बनाया गया और घोटाला खुलने तक वही चेयरमैन रहे। आईएएस अपर्णा यू भी अक्टूबर, 2017 से 4 नवंबर, 2019 तक पावर कॉरपोरेशन की एमडी रहीं। इस दौरान डीएचएफएल में सबसे ज्यादा निवेश हुआ।

लखनऊ। यूपी पावर कॉरपोरेशन में हजारों करोड़ रुपए के पीएफ घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के हाथ अब तक बड़े बाबुओं (आईएएस) के गिरेबान तक नहीं पहुंचे हैं। ईओडब्ल्यू ने पावर कारपोरेशन और कर्मचारी ट्रस्ट के चेयरमैन रह चुके आईएएस अफसर संजय अग्रवाल और आलोक कुमार को अब तक पूछताछ का नोटिस तक नहीं दिया है। पावर कॉरपोरेशन की पूर्व एमडी अपर्णा यू से भी पूछताछ नहीं हुई है। कर्मचारियों का आरोप है कि ये अफसर ही डीएचएफएल को पीएफ फंड देने के मुख्य जिम्मेदार हैं। अब इसे लेकर कर्मचारी जांच एजेंसी पर ही सवाल खड़े करने लगे हैं। ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन निदेशक (वित्त) सुधांशु द्विवेदी और सचिव (ट्रस्ट) पीके गुप्ता को गिरफ्तार कर पूछताछ की और जेल भी भेज दिया। इसके बाद तत्कालीन एमडी एपी मिश्र की गिरफ्तारी हुई। तीनों अधिकारियों के घर छापेमारी तक की गई, लेकिन आश्चर्यजनक यह रहा कि मामले में अब तक किसी आईएएस अफसर से कोई पूछताछ नहीं हुई। डीएचएफएल में जब पहला निवेश किया गया, तो ट्रस्ट के चेयरमैन संजय अग्रवाल ही थे। दरअसल मार्च 2017 में डीएचएफएल में निवेश शुरू हुआ। संजय अग्रवाल मई, 2017 तक ट्रस्ट के चेयरमैन रहे। पीएफ की रकम का निवेश जब पहली बार डीएचएफएल में किया गया, तो ट्रस्ट के चेयरमैन संजय अग्रवाल थे जबकि पावर कॉरपोरेशन के एमडी एपी मिश्र थे। 23 मार्च, 2017 को एपी मिश्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद आईएएस विशाल चौहान को एमडी बनाया गया। विशाल चौहान इस पद पर करीब सात महीने तक रहे। एमडी ही ट्रस्ट का ट्रस्टी होता है, मगर ईओडब्ल्यू ने अब तक उनसे पूछताछ नहीं की है। सर्वाधिक निवेश आलोक कुमार और अपर्णा यू के कार्यकाल में डीएचएफएल में 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आईएएस आलोक कुमार के चेयरमैन रहते किया गया। आलोक कुमार को मई, 2017 में पावर कॉरपोरेशन का चेयरमैन बनाया गया और घोटाला खुलने तक वही चेयरमैन रहे। आईएएस अपर्णा यू भी अक्टूबर, 2017 से 4 नवंबर, 2019 तक पावर कॉरपोरेशन की एमडी रहीं। इस दौरान डीएचएफएल में सबसे ज्यादा निवेश हुआ।