कभी फूलपुर लोकसभा सीट था कांग्रेस का गढ़, अब लड़ रही है अस्तित्व की लड़ाई

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कभी फूलपुर लोकसभा सीट था कांग्रेस का गढ़, अब अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट कभी कांग्रेस गढ़ था। कांग्रेस इस सीट से 1984 के बाद से गायब है। 35 वर्षों से कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कई चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार यहां से अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये। तीर्थराज प्रयाग की फूलपुर लोकसभा सीट को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु को पहला सांसद बनाने का तमगा हासिल है।

Phulpur Lok Sabha Seat :

देश में 1951—52 में पहली बार लोकसभा चुनाव के समय पंडित नेहरु फूलपुर से ही सांसद चुने गए थे। बाद में 1957 और 1962 में भी वह यहीं से निर्वाचित हुए। पंडित नेहरु की मृत्यू के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने कांग्रेस की विरासत को आगे बढ़ाया था। वर्ष 1964 में जब यहां उपचुनाव हुए तो उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने जीत दर्ज की। आखिरी बार 1984 में राम पूजन पटेल ने यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता।

हालांकि, पंडित नेहरु के बाद रामपूजन पटेल ने भी फूलपुर सीट से हैट्रिक लगाने का रिकॉर्ड बनाया था लेकिन, वर्ष 1984 में ही वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में यहां चुनाव जीते थे। इसके बाद वह जनता दल में शामिल हो गए और 1989 व 1991 का चुनाव जनता दल के टिकट पर जीता था। इस तरह 1984 के बाद कांग्रेस अपने इस गढ़ पर फिर कब्जा न कर सकी।

इन दिग्गजों को मिली थी हार
पंडित जवाहर लाल नेहरु के कट्टर राजनीति विरोधी राम मनोहर लोहिया भी यहां से 1962 में चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह कांशीराम को यहां उन्हीं के शिष्य जंगहादुर पटेल ने 1966 के चुनाव में हराया था। जंग बहादुर इस सीट से दो बार सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र भी यहां से 1964 का उपचुनाव और 1967 का आम चुनाव हार चुके हैं। विजयलक्ष्मी पंडित जब संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की प्रतिनिधि चुनी गईं और 1969 में यहां जब उप चुनाव हुआ तो जनेश्वर मिश्र ने कांग्रेस के केशव देव मालवीय को हरा दिया।

उपचुनाव में मिली थी सपा को जीत
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी फूलपुर से एक बार सांसद चुने गये थे। इस बार कांग्रेस ने पंकज निरंजन पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की तरफ से यह सीट सपा के खाते में है। सपा ने अपने निवर्तमान सांसद का टिकट काटकर पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष पंधारी यादव को मैदान में उतारा है। भाजपा की तरफ से जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष केशरी देवी पटेल हैं।

अब तक सात बार जीत चुकी है कांग्रेस
फूलपुर सीट के लिए अब तक 16 आम चुनाव और तीन उपचुनाव हो चुके हैं, जिसमें सात बार कांग्रेस, पांच बार सपा, दो बार जनता दल और एक-एक बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय लोक दल, जनता पार्टी (सेक्युलर), भाजपा और बसपा चुनाव जीती है।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट कभी कांग्रेस गढ़ था। कांग्रेस इस सीट से 1984 के बाद से गायब है। 35 वर्षों से कांग्रेस अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। कई चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार यहां से अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये। तीर्थराज प्रयाग की फूलपुर लोकसभा सीट को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु को पहला सांसद बनाने का तमगा हासिल है। देश में 1951—52 में पहली बार लोकसभा चुनाव के समय पंडित नेहरु फूलपुर से ही सांसद चुने गए थे। बाद में 1957 और 1962 में भी वह यहीं से निर्वाचित हुए। पंडित नेहरु की मृत्यू के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने कांग्रेस की विरासत को आगे बढ़ाया था। वर्ष 1964 में जब यहां उपचुनाव हुए तो उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने जीत दर्ज की। आखिरी बार 1984 में राम पूजन पटेल ने यहां से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। हालांकि, पंडित नेहरु के बाद रामपूजन पटेल ने भी फूलपुर सीट से हैट्रिक लगाने का रिकॉर्ड बनाया था लेकिन, वर्ष 1984 में ही वह कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में यहां चुनाव जीते थे। इसके बाद वह जनता दल में शामिल हो गए और 1989 व 1991 का चुनाव जनता दल के टिकट पर जीता था। इस तरह 1984 के बाद कांग्रेस अपने इस गढ़ पर फिर कब्जा न कर सकी। इन दिग्गजों को मिली थी हार पंडित जवाहर लाल नेहरु के कट्टर राजनीति विरोधी राम मनोहर लोहिया भी यहां से 1962 में चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसी तरह कांशीराम को यहां उन्हीं के शिष्य जंगहादुर पटेल ने 1966 के चुनाव में हराया था। जंग बहादुर इस सीट से दो बार सपा के टिकट पर चुनाव जीते थे। छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र भी यहां से 1964 का उपचुनाव और 1967 का आम चुनाव हार चुके हैं। विजयलक्ष्मी पंडित जब संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की प्रतिनिधि चुनी गईं और 1969 में यहां जब उप चुनाव हुआ तो जनेश्वर मिश्र ने कांग्रेस के केशव देव मालवीय को हरा दिया। उपचुनाव में मिली थी सपा को जीत पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह भी फूलपुर से एक बार सांसद चुने गये थे। इस बार कांग्रेस ने पंकज निरंजन पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है। सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की तरफ से यह सीट सपा के खाते में है। सपा ने अपने निवर्तमान सांसद का टिकट काटकर पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष पंधारी यादव को मैदान में उतारा है। भाजपा की तरफ से जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष केशरी देवी पटेल हैं। अब तक सात बार जीत चुकी है कांग्रेस फूलपुर सीट के लिए अब तक 16 आम चुनाव और तीन उपचुनाव हो चुके हैं, जिसमें सात बार कांग्रेस, पांच बार सपा, दो बार जनता दल और एक-एक बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय लोक दल, जनता पार्टी (सेक्युलर), भाजपा और बसपा चुनाव जीती है।