आपसी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबन्ध बलात्कार नहीं: हाईकोर्ट

नई दिल्ली। हमारा समाज कितनी तेजी से बदल रहा है इसकी बानगी आजकल अदालतों में आए दिन देखने को मिल जाती है। ताजा मामला नई दिल्ली का है जहां एक महिला ने पहले अपने प्रेमी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करवाकर शादी की और शादी के बाद तलाक लेने के लिए घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवा दिया। नए मामले के साथ शादी से पूर्व के बलात्कार के मामले को भी जोड़ दिया और अदालत का दरवाजा खटखटा दिया।

इस मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली हाईकोर्ट की अदालत ने याचिकाकर्ता महिला के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि दो लोग आपसी सहमति से शारीरिक संबन्ध बनाते हैं और रिश्ते खराब होने पर बलात्कार का आरोप लगा देते हैं। जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। आपसी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबन्ध को बलात्कार का मामला नहीं माना जा सकता।

मिली जानकारी के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ एक महिला द्वारा दाखिल की गई याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्र​तिभा रानी की अदालत ने आरोपी अधिकारी को बरी कर दिया। इससे पूर्व में निचली अदालत भी इस मामले में आरोपी बनाए गए व्यक्ति को बरी कर चुकी है।

बताया जाता है कि याचिकाकर्ता महिला और आरोपी शादी से पूर्व शारीरिक रिश्ते थे। 2015 में महिला ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करवाया, जिसके बाद आरोपी ने उससे विवाह कर लिया। शादी के कुछ समय बाद महिला ने अदालत में पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का मामला दर्ज करवाकर पुराने मामले को भी अदालत के सामने आगे बढ़ा कर आरोपी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था।