पीके बीच मंझधार कांग्रेस को दे सकते हैं बड़ा झटका

Pk To Part Ways With Congress Just Before Up Polls 2017

लखनऊ। देश के जाने माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके को 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में यूपी की सियासी जमीन पर दोबार पकड़ बनाने की कोशिश में लगी कांग्रेस ने अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने की कोशिश में पीके ने अपनी जो रणनीति तैयार की थी उससे कांग्रेस यूपी के चुनाव प्रचार में सबसे आगे नजर आ रही थी। लेकिन इस बीच खबरें आ रहीं हैं कि पीके और कांग्रेस के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। संभव है कि पीके कांग्रेस को बीच मंझधार में छोड़कर किसी दूसरे दल के लिए मेहनत करते नजर आएं।




मिली जानकारी के मुताबिक पीके ने ​पिछले दिनों सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से अमर सिंह की मौजूदगी में मुलाकात कर कांग्रेस के साथ गठबंधन में यूपी का 2017 चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार की थी। पीके की कोशिशें आगे बढ़ती इससे पहले ही कांग्रेस के भीतर उनके प्रयासों की आलोचनाओं का दौर शुरू हो गया। जिससे पीके आहत बताए जा रहे हैं। यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने भी सपा के साथ किसी भी प्रकार के गठबंधन की संभावनाओं को नकार दिया था।




जानकारों की माने तो पीके को उम्मीद थी कि अगर कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के सम्मान जनक बंटवारे के साथ कोई गठबंधन हो जाता है तो आने वाले चुनावों में कांग्रेस को कम सीटों पर मेहनत कर अच्छे नतीजे मिल सकते हैं। लेकिन गठबंधन की संभावनाओं को क्षीण होता देख पीके को शायद यह अंदाजा लग गया होगा कि ​कांग्रेस यूपी में इस तरह से कमजोर हो चुकी है कि उसे बिना किसी सहारे के खड़ा नहीं किया जा सकता। अगर वह भी कांग्रेस के साथ बने रहे तो संभव है कि आने वाले समय में चुनावी बाजार में उनकी बनी हुई ब्रांड को भी बट्टा लग जाए।

वहीं खबरें ऐसी भी आ रहीं हैं कि पीके की डील बीजेपी से दोबारा हो गई है। वह 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के लिए रणनीतिकार रह चुके। पीके यूपी की सियासी नब्ज से बेहतरी से बाकिफ हैं तो पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए पीके नया नाम नहीं होगा। वहीं बीजेपी यूपी में बेहतर प्रदर्शन करती नजर आ रही है। कोई भी दल हो यूपी में उसका निशाना बीजेपी ही है। यूपी में बीजेपी को पटखनी देने के लिए विरोधी भले ही एक न हो पा रहे हो लेकिन बीजेपी अकेले ही सभी विरोधियों से दो—दो हाथ करने को तैयार है।




आपको बता दें कि कांग्रेस के पुराने नेताओं ने शुरू से ही पीके का विरोध किया है। टीम पीके और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी पहले भी सुर्खियों में रही है। कई मौकों पर टीम पीके और कांग्रेसियों के वैचारिक मतभेद सामने आ चुका है। हाल ही में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई कांग्रेस विधायक रीता बहुगुणा जोशी ने तो यह तक कह दिया था कि यूपी कांग्रेस को ठेके पर दे दिया गया है। उनका इशारा पूरी तरह से पीके के काम करने के तरीकों की ओर था।

लखनऊ। देश के जाने माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके को 2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में यूपी की सियासी जमीन पर दोबार पकड़ बनाने की कोशिश में लगी कांग्रेस ने अहम जिम्मेदारी सौंपी थी। कांग्रेस की डूबती नैया को पार लगाने की कोशिश में पीके ने अपनी जो रणनीति तैयार की थी उससे कांग्रेस यूपी के चुनाव प्रचार में सबसे आगे नजर आ रही थी। लेकिन इस बीच खबरें आ रहीं हैं कि पीके और कांग्रेस के बीच…