कागजों में चल रही ‘नमामि गंगे’ की योजना, गंगा नदी में सीवेज और गंदा पानी गिरने का सिलसिला जारी

ganga
कागजों में चल रही 'नमामि गंगे' की योजना, गंगा नदी में सीवेज और गंदा पानी गिरने का सिलसिला जारी

लखनऊ। ‘नमामि गंगे’ के नाम पर अरबों रुपये खर्च करने वाली केंद्र की मोदी सरकार की आंख में अफसर धूल झोंक रहे हैं। कागजों पर यह योजना तेजी से दौड़ रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरकार को खुश करने के लिए कागजों में गंगा साफ हो गई है लेकिन आज भी सीवेज और गंदा पानी के गंगा नदी में गिरने का सिलसिल जारी है। वहीं, इस बीच पीएम मोदी, पांच राज्यों के मुख्यमंत्री और दस केंद्रीय मंत्रियों के साथ नमामि गंगे की समीक्षा करने कानपुर आ रहे हैं तो अफसरों ने आनन-फानन में तैयारी शुरू कर दी है।

Plans Of Namami Gange Going On In Paper Dirty Water Fall In Ganges River :

अफसरों की यह तैयारी इस योजना की पोल खोल रही है। पीएम मोदी के दौरे के लिए कानपुर में गंगा की ‘धुलाई’ में बहाया गया कचरा उन्नाव अनवरत बहने वाले कचरे के साथ गंगा में बहता हुआ आगे जा रहा है। ऐसे में गंगा और पांडु के संगम से थोड़ा पहले बक्सर में दोंनो जिलों से बहाए गए कचरे और गंदा पानी उतरा रहे हैं।

दरअसल, पीएम के दौरे से पहले गंगा को निर्मल-अविरल दिखाने की पूरी कवायद की जा रही है। नरौरा से लेकर बैराज तक, हर स्तर पर गंगा में अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। बता दें कि, नमामि गंगे की योजना उन्नाव में दिसंबर 2018 से शुरू की गयी थी। इस योजना को पूर्ण करने के लिए 2021 का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।

उद्योग और गांवों का गंदा व सीवेज का पानी गंगा में गिर रहा
नमामि गंगे के नाम पर अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। पूरे कानपुर को छोड़ दें तो उन्नाव में भी 34 से ज्यादा गांवों के सीवेज और गंदा पानी गंगा नदी में गिर रहा है। कानपुर की सीमा से बांगरमऊ, सफीपुर, सिंकदरपुर सरोसी, सिंकदरपुर कर्ण, बीघापुर और सुमेरपुर ब्लॉक से सटे हुए यह 34 गांव हैं। पीएम मोदी के दौरे से पहले अधिकारियों की आंख खुली है, जो अब इसे रोकने की कोशिश में जुट गए हैं। वहीं, शुक्लागंज और उन्नाव का सीवेज फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी व औद्योगिक कचरा गंगा में जहर घोल रहा है।

लखनऊ। 'नमामि गंगे' के नाम पर अरबों रुपये खर्च करने वाली केंद्र की मोदी सरकार की आंख में अफसर धूल झोंक रहे हैं। कागजों पर यह योजना तेजी से दौड़ रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरकार को खुश करने के लिए कागजों में गंगा साफ हो गई है लेकिन आज भी सीवेज और गंदा पानी के गंगा नदी में गिरने का सिलसिल जारी है। वहीं, इस बीच पीएम मोदी, पांच राज्यों के मुख्यमंत्री और दस केंद्रीय मंत्रियों के साथ नमामि गंगे की समीक्षा करने कानपुर आ रहे हैं तो अफसरों ने आनन-फानन में तैयारी शुरू कर दी है। अफसरों की यह तैयारी इस योजना की पोल खोल रही है। पीएम मोदी के दौरे के लिए कानपुर में गंगा की 'धुलाई' में बहाया गया कचरा उन्नाव अनवरत बहने वाले कचरे के साथ गंगा में बहता हुआ आगे जा रहा है। ऐसे में गंगा और पांडु के संगम से थोड़ा पहले बक्सर में दोंनो जिलों से बहाए गए कचरे और गंदा पानी उतरा रहे हैं। दरअसल, पीएम के दौरे से पहले गंगा को निर्मल-अविरल दिखाने की पूरी कवायद की जा रही है। नरौरा से लेकर बैराज तक, हर स्तर पर गंगा में अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। बता दें कि, नमामि गंगे की योजना उन्नाव में दिसंबर 2018 से शुरू की गयी थी। इस योजना को पूर्ण करने के लिए 2021 का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। उद्योग और गांवों का गंदा व सीवेज का पानी गंगा में गिर रहा नमामि गंगे के नाम पर अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं। पूरे कानपुर को छोड़ दें तो उन्नाव में भी 34 से ज्यादा गांवों के सीवेज और गंदा पानी गंगा नदी में गिर रहा है। कानपुर की सीमा से बांगरमऊ, सफीपुर, सिंकदरपुर सरोसी, सिंकदरपुर कर्ण, बीघापुर और सुमेरपुर ब्लॉक से सटे हुए यह 34 गांव हैं। पीएम मोदी के दौरे से पहले अधिकारियों की आंख खुली है, जो अब इसे रोकने की कोशिश में जुट गए हैं। वहीं, शुक्लागंज और उन्नाव का सीवेज फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी व औद्योगिक कचरा गंगा में जहर घोल रहा है।