विपक्ष के झूठ की इमारत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी: पीएम मोदी

नई दिल्ली। संसद में लगातार तेज होते जा रहे विरोधियों के हमलों पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने टिप्पणी करते हुए कहा की झूठ की नींव पर टिकी इमारत ज्यादा दिन खड़ी नहीं रह सकती। ऐसा ही कुछ हाल नोटबंदी का विरोध कर रहे विपक्षी दलों का है, जिनकी समस्या कुछ और है लेकिन वे झूठे तर्कों के आधार पर सदन नहीं चलने दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि लोग कितना भी हंगामा करें लेकिन वह किसी बेईमान को छोड़ने वाले नहीं है, खास तौर पर ऐसे लोग जिन्होंने 8 नवम्बर के बाद से नए पाप किए हैं।




कालाधन खपाने वालों की खैर नहीं

शनिवार को गुजरात के डीसा में किसान रैली को संबोधित करने के दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों को ये भरोसा दिलाया कि नोटबंदी के बाद लोगों को जो भी परेशानियां हुई, उसका अंदाजा उन्हें भी है। देश के आम आदमी को सिर्फ 50 दिनों तक दिक्कतें उठानी हैं, इसके बाद उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी नही होंगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने बड़ी मात्रा में कालाधन खपाया है उन्हें किसी भी सूरत में छोड़ा नहीं जाएगा।

राजनीति से ऊपर है राष्ट्रनीति, दल से बड़ा है देश

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि राजनीति से ऊपर राष्ट्रनीति होती है, कोई दल देश से बड़ा नहीं हो सकता। विरोधी नोटबंदी के खिलाफ नहीं बल्कि उनके तरीके पर सवाल उठा रहे है। संसद में विपक्ष के हंगामे पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार कहती है पीएम बोलने के लिए तैयार हैं, लेकिन हंगामा करने वालों को मालूम है संसद में उनका झूठ टिक नहीं पाता है इसलिए वो चर्चा से भाग जाते हैं। इसलिए उन्हें लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया और उन्होंने जनसभा में बोलने का रास्ता चुन लिया।




नोटबंदी पर पीएम मोदी ने कहा कि देश में 70 साल तक ईमानदारों को लूटा गया है। छोटे नोटों और छोटे लोगों की ताकत बढ़ाने के लिए ही नोटबंदी का फैसला लिया गया है। आज आम आदमी 10, 20, 50 और 100 के नोट की ताकत को समझ पा रहा होगा। कल तक जिस नोट की कोई कीमत नहीं बची थी आज वही 100 का नोट अचानक से बड़ा लगने लगा है।

आपको बता दें कि पीएम नरेन्द्र मोदी ने डीसा में दिए अपने भाषण में नाम लिए बिना कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उस बयान को अपने हमले के केन्द्र में रखा जिसमें उन्होंने पीएम पर लोकसभा से दूर रहने और चुप्पी साधे रहने के आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा। वह एक महीने से बोलने को तैयार है। वह बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा।

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