PM मोदी ने किया अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन का उद्घाटन, कहा- सभी को न्यायपालिका पर है आस्था

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PM मोदी ने किया अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन का उद्घाटन, कहा- सभी को न्यायपालिका पर है आस्था

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने शनिवार को दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, ”ये कॉन्फ्रेंस 21वीं सदी के तीसरे दशक के शुरुआत में हो रही है। ये दशक भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का है। ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी हर क्षेत्र में होंगे। ये बदलाव तर्क संगत और न्याय संगत होने चाहिए। ये बदलाव सभी के हित में होने चाहिए।

Pm Modi Inaugurates International Judicial Conference Said Everyone Has Faith In Judiciary :

उन्होने कहा कि पूज्य बापू का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं और हमारे बापू खुद भी तो वकील थे। अपने जीवन का जो पहला मुकदमा उन्होंने लड़ा, उसके बारे में गांधी जी ने बहुत विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है।

उन्होंने कहा, हर भारतीय की न्यायपालिका पर बहुत आस्था है। हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी। फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। लेकिन हुआ क्या? सभी ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया।

पीएम मोदी ने कहा, तमाम चुनौतियों के बीच कई बार देश के लिए संविधान के तीनों पिलर ने उचित रास्ता ढूंढा है। हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है। बीते 5 वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है।

पीएम ने कहा कि वे भारत की न्यायपालिका का भी आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जिसने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता को समझा है, उसमें निरंतर मार्गदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डाटा सुरक्षा, साइबर क्राइम न्यायपालिका के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इनसे निपटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों को शीघ्र न्याय देने में तकनीक एक हद तक रोल अदा कर सकता है।

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने शनिवार को दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, ''ये कॉन्फ्रेंस 21वीं सदी के तीसरे दशक के शुरुआत में हो रही है। ये दशक भारत सहित पूरी दुनिया में होने वाले बड़े बदलावों का है। ये बदलाव सामाजिक, आर्थिक, और तकनीकी हर क्षेत्र में होंगे। ये बदलाव तर्क संगत और न्याय संगत होने चाहिए। ये बदलाव सभी के हित में होने चाहिए। उन्होने कहा कि पूज्य बापू का जीवन सत्य और सेवा को समर्पित था, जो किसी भी न्यायतंत्र की नींव माने जाते हैं और हमारे बापू खुद भी तो वकील थे। अपने जीवन का जो पहला मुकदमा उन्होंने लड़ा, उसके बारे में गांधी जी ने बहुत विस्तार से अपनी आत्मकथा में लिखा है। उन्होंने कहा, हर भारतीय की न्यायपालिका पर बहुत आस्था है। हाल में कुछ ऐसे बड़े फैसले आए हैं, जिनको लेकर पूरी दुनिया में चर्चा थी। फैसले से पहले अनेक तरह की आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं। लेकिन हुआ क्या? सभी ने न्यायपालिका द्वारा दिए गए इन फैसलों को पूरी सहमति के साथ स्वीकार किया। पीएम मोदी ने कहा, तमाम चुनौतियों के बीच कई बार देश के लिए संविधान के तीनों पिलर ने उचित रास्ता ढूंढा है। हमें गर्व है कि भारत में इस तरह की एक समृद्ध परंपरा विकसित हुई है। बीते 5 वर्षों में भारत की अलग-अलग संस्थाओं ने, इस परंपरा को और सशक्त किया है। पीएम ने कहा कि वे भारत की न्यायपालिका का भी आभार व्यक्त करना चाहते हैं, जिसने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की गंभीरता को समझा है, उसमें निरंतर मार्गदर्शन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि डाटा सुरक्षा, साइबर क्राइम न्यायपालिका के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से इनसे निपटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों को शीघ्र न्याय देने में तकनीक एक हद तक रोल अदा कर सकता है।