गाजीपुर पहुंचे पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, इमरजेंसी की दिलाई याद

गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में सोमवार को गाजीपुर कोलकाता एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने पहुंचे पीएम नरेन्द्र मोदी ने परिवर्तन यात्रा के तहत एक रैली को भी संबोधित किया। भोजपुरी भाषा से शुरू किए अपने भाषण में वीर अब्दुल हमीद को नमन करते हुए पीएम ने 70 सालों से गरीबी झेल रहे पूर्वांचल के लिए उठाए अपनी सरकार के कदमों को गिनाया। जिसके बाद उन्होंने नोटबंदी का विरोध कर राजनीतिक दलों विशेष तौर पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए, जनता से 30 दिसंबर तक समर्थन की मांग की और कांग्रेसी नेताओं को इमरजेंसी की याद दिलाई। हालांकि इस दौरान उन्होंने गाजीपुर में शिलान्यास को पंडित जवाहर लाल नेहरू को स​मर्पित किया।




अपने भाषण को शुरु करते हुए पीएम ने कहा कि उन्हें 2 साल में दोबारा गाजीपुर आने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि 2014 में वह मनोज सिन्हा के पक्ष में वोट मांगने गाजीपुर आए थे। अगर उत्तर प्रदेश की जनता पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में मदद नहीं करती तो आज कालाधन रखने वाले परेशान नहीं होते और गरीब चैन की नींद सो रहा होता।




पीएम ने 1962 में पंडित नेहरू की सरकार वाली लोकसभा के सदस्य रहे विश्वना​थ प्रताप सिंह के भाषण की चर्चा करते हुए कहा कि विश्वनाथ जी ने लोकसभा में पूर्वांचल की गरीबी को जिस प्रकार से संसद के सामने रखा था उससे पूरी संसद की आंखों में आंसू आ गए थे। पंडित नेहरू को यूपी का सांसद होने का हवाला देते हुए विश्वनाथ जी के भाषण के बाद एक कमिटी गठित की थी। जिसकी सिफारिशों को तब से लेकर अब तक दबाकर रखा गया। पंडित नेहरू की मृत्यु के बाद यूपी से वह 9वें प्रधानमंत्री हैं जिसने पहली बार उस कमिटी की सिफारिशों को बाहर निकालने का काम किया है।




पिछली सरकारों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 70 सालों से गाजीपुर गांगा नदी को पार नहीं कर पाया है। अब काम शुरू हो गया है तय समय के भीतर पूरा भी होगा। पूर्वांचल का गरीब बीमार होने के बाद इलाज के लिए भटकता था, उसके लिए भी एम्स बनाने का काम शुरू हो गया है।

इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार को जिस काम के लिए जनता ने वोट दिया था वे सारे काम हो रहे हैं। उनकी सरकार गरीब, गांव और किसानों के लिए समर्पित है। अगर चिन्ता करने की जरूरत है तो सिर्फ उन लोगों को जिन्हें नोटों के बिस्तरों पर सोने की आदत है। उनकी सरकार के एक फैसले से अमीरों को नींद की गोलिया लेनी पड़ रहीं हैं जबकि ​गरीब सुकून की नींद सो रहा है।




अपने नोटबंदी के फैसले पर जनता की राय जानने के साथ उन्होंने कहा कि 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद से आम आदमी का हवाला देकर विरोधी राजनीतिक दल उन्हें कोस रहे हैं। उनका फैसला थोड़ा कड़क जरूर है, लेकिन इससे आम आदमी को कोई परेशानी नहीं होगी। परेशानी उन लोगों को है जो आम जनता की आड़ लेकर अपनी पेरशानी बयां करना चाहते हैं। परेशानी उन्हें है जो नोटों की माला पहनते थे, ऐसी माला जिसमें उनकी मुंडी तक नजर नहीं आती थी।




कांग्रेस पर हमला करते हुए पीएम ने कहा कि कांग्रेस की ओर से बड़े बड़े वकील सरकार से सवाल कर रहे हैं कि किस कानून के तहत 500 और 1000 के नोट बंद किए गए तो उनके लिए जवाब है कि जिस कानून से उनकी सरकार ने 25 पैसे बंद किए थे। उनकी हैसियत 25 पैसे तक सीमित थी हमाने अपनी हैसियत के हिसाब से 500 और 1000 का नोट बंद कर​ दिया। लोग इस फैसले को इमरजेंसी बता रहे हैं, उन्हें याद करना चाहिए कि इस देश में 19 महीनों की इमरजेंसी इंदिरा गांधी के पीएम रहते लागू हुई थी। वह ​इमरजेंसी निजी फायदे के लिए लागू की गई थी। सिर्फ इसलिए कि अदालत ने इंदिरा गांधी के लोकसभा निर्वाचन को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। इंदिरा गांधी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के लिए देश को 19 महीनों के लिए जेल में बदल दिया था। क्या क्या नहीं हुआ उस दौर में अखबारों से लेकर अपनी आवाज बुलंद करने वालों तक को जेलों में ठूसा गया। गिरफ्तारी का डर दिखाकर कांग्रेसी नेताओं ने आम आदमी से लाखों की उगाही की। आज उन्हीं इंदिरा गांधी का परिवार देश में इमरजेंसी जैसे हालात होने की बात कर रहा है। उसी कांग्रेस के नेता नोट बंदी को इमरजेंसी करार दे रहे हैं। ये काम उन्होंने निजी लाभ के लिए नहीं किया है। इससे देश को लाभ होगा।