मोदी के विश्वासपात्र ने खोला राज, जल्दबाजी में हुआ नोटबंदी का फैसला

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के फैसले के बाद लागू हुई नोटबंदी इन दिनों देश और दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रधानमंत्री के फैसले का समर्थन करने वालों का कहना है कि इस कदम से देश की अर्थव्यवस्था में स्थायी परिवर्तन आएंगे, तो वहीं विरोधी नोटबंदी को घोटाले से लेकर जल्दबाजी में लिए गया देश की अर्थव्यवस्था के खिलाफ उठाए गए कदम के रूप में देख रहे हैं।




8 नवंबर की शाम करीब 8 बजे जिस तरीके से प्रधानमंत्री ने रातोंरात देश की 86 फीसदी करेंसी को रद्दी बना दिया, उसे लेकर बुद्धिजीवियों ने अपने तर्कों के साथ प्रधानमंत्री के फैसले को लागू किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए। किसी ने तर्क दिया कि नोटबंदी के लागू करने के लिए लोगों को समय दिया जाना चाहिए था, तो किसी ने कहा कि पुराने नोटों को बदलने की प्रक्रिया को सरल बनाए जाने की जरूरत थी।




​तमाम तर्कों को सुनने के बावजूद प्रधानमंत्री ने अपने कड़े फैसले को पूरी कड़ाई से लागू किया और अपनेे विरोधियों के सवालों को अनसुना कर दिया। प्रधानमंत्री ने इस फैसले को लेने से पहले ही देश के सामने कह दिया था कि उनका ये फैसला आने वाले 50 दिनों तक लोगों को परेशानी देगा। जिसका खामियाजा देश की पूरी सवा सौ करोड़ आबादी ने झेला।




आज नोटबंदी को लागू हुए पूरा एक महीना बीत चुका है। इस दौरान हालात तो बहुत ज्यादा नहीं बदले लेकिन लोगों को कुछ सहूलियत मिली है। जो दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। हालांकि राजनीतिक मोर्चे पर यह फैसला सरकार के विरुद्ध बड़ा और गरम मुद्दा बनता दिख रहा है। जिसे केन्द्र सरकार अब तक नोटबंदी पर मिले जनता के समर्थन का हवाला देकर ठंडा करने का प्रयास कर रही है।

इस बीच नोटबंदी की प्रक्रिया पर लंबे समय से काम कर रहे पीएमओ के एक अधिकारी ने भी अपनी जुबान खोल दी है। यह अधिकारी नोटबंदी के पूरी प्रक्रिया में नए नोटों की छपाई से लेकर उन नोटों के वितरण और नोटबंदी लागू होने के बाद दिन प्रतिदिन की रिपोर्ट लेने से लेकर जनता को सहूलियत पहुंचाने तक के नए नियम बनाने वाली टीम का अहम हिस्सा रहा है।




इस अधिकारी ने का भी कहना है कि प्रधानमंत्री ने आनन फानन में इस फैसले को लिया है। जिस बात की जानकारी एकाएक उन्हें भी मिली थी। बकौल एक मीडिया रिपोर्ट इस अधिकारी का कहना है कि नोटबंदी को लागू करने के लिए 18 नवंबर की तारीख निर्धारित थी। पूरी योजना प्रधानमंत्री के अलावा उनके करीबी 4 से 5 आईएएस अधिकारियों के बीच तैयार की गई थी। लागू होने से पहले तक इस बात की जानकारी गिने चुने करीब 100 लोगों तक ही पहुंची थी। जिसमें मोदी की कैबिनेट के सदस्य भी शामिल थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री को अंदेशा हो गया था कि उनकी योजना लीक हो सकती है जिसका लाभ वे लोग उठा सकते हैं जिनके लिए यह योजना खतरा बनेगी। किसी को ये बात नहीं पता थी कि अपनी योजना की गोपनीयता को बरकरार रखने के लिए प्रधानमंत्री इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। उन्होंने कल्पना से परे जाकर 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा कर अपनी टीम तक को सकते में डाल दिया।




नोटबंदी की गोपनीयता को अंत समय तक बनाए रखना मुश्किल मालूम हो रहा था। अगर प्रधानमंत्री की योजना लीक हो जाती तो ​उनकी और इस फैसले को लेने की तैयारी करने वाली टीम की महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता। प्रधानमंत्री ने योजना की सफलता और उनके साथ इस फैसले को सफल बनाने के लिए महीनों से लगे लोगों की मेहनत को साकार करने के लिए नोटबंदी का फैसला नियत दिन से 10 दिन पहले ले लिया।




इस अधिकारी के मुताबिक नरेन्द्र मोदी ने इस नोटबंदी की योजना को गोपनीय रखने के लिए अपने सबसे करीबी आईएएस अधिकारियों की मदद ली है। उन्होंने इस योजना को बनाने के लिए ​अपने सरकारी आवास पर ही वॉर रूम बना रखा है। जहां से वह थोड़ी—थोड़ी देर पर रिपोर्ट लेते रहते हैं। वह इस पूरी प्रक्रिया पर रात दिन एक कर नजर बनाए हुए हैं।