जकार्ता में PM मोदी ने की पतंगबाजी, इन समझौतों पर हुए हस्ताक्षर

जकार्ता में PM मोदी ने की पतंगबाजी, भारत-इंडोनेशिया ने रक्षा समेत 15 एमओयू पर किए हस्ताक्षर
जकार्ता में PM मोदी ने की पतंगबाजी, भारत-इंडोनेशिया ने रक्षा समेत 15 एमओयू पर किए हस्ताक्षर

जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया दौरे पर हैं। यहां उन्होंने राष्ट्रपति जोको विदोदो से जकार्ता के मर्डेका पैलेस में मुलाकात की। दोनों देशों के संयुक्त बयान में पीएम मोदी ने आतंकवाद पर निशाना साधा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिक्यॉरिटी ऐंड ग्रोथ फॉर ऑल (SAGAR)और ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी का भी जिक्र किया। ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी मोदी सरकार में शुरू की गई, जिसका मकसद एशियाई देशों के साथ संबंधों को प्रमुखता देना है।  इसके बाद दोनों देशों ने 15 MoUs पर हस्ताक्षर किए।

Pm Narendra Modi In Jakarta Indonesia Tour :

शहीदों को श्रद्धांजलि से शुरू की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की आजादी के संघर्ष के शहीदों को आज श्रद्धांजलि देकर अपनी यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने यहां कलीबाता नेशनल हीरोज सिमेट्री में शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इंडोनेशिया की पहली आधिकारी यात्रा पर आए मोदी आज राष्ट्रपति जोको विदोदो से भी मिले। बैठक के बाद  पीएम मोदी ने आज कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। राष्ट्रपति जोको विदोदो से मुलाकात और डेलीगेशन स्तर की बैठक के बाद पीएम मोदी ‘पतंग प्रदर्शनी’ पहुंचे और महोत्सव का उद्घाटन किया।

यह पतंग प्रदर्शनी बेहद खास है। इसे रामायण-महाभारत की थीम पर आयोजित किया गया है। पतंगों को भी उसी अंदाज में डिजायन किया गया है। पीएम मोदी पतंग महोत्सव उद्घाटन के दौरान पतंगबाजी करते भी दिखे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी ने पतंग उड़ाई।

इंडोनेशिया अहम क्यों?

दरअसल चीन का एक न्यू मैरीटाइम सिल्क रूट है, वो इंडोनेशिया के मलक्का से अफ्रीका के जिबूती तक जाता है। यानी एक तरह से ये रूट भारत को घेरता है।

1) भारत इंडोनेशिया से इसी तरह का समझौता करने जा रहा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड-डिफेंस गलियारा बनेगा। अगर इंडोनेशिया के साथ हमारा बेहतर तालमेल होता है तो हम चीन के मैरीटाइम सिल्क रूट को काउंटर कर पाएंगे।

2) चीन पाक, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार-फिलीपींस पर नजर जमाए हुए है। अगर हमारे साथ इंडोनेशिया आ जाता है, तो हम अंडमान-निकोबार के पास चीन के हो रहे जमाव को रोक सकते हैं।

3) इंडोनेशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया में उभरती आर्थिक शक्ति है और मौजूदा वक्त में भारत भी एक वैश्विक ताकत के रूप में सामने आया है। अगर हम इंडोनेशिया के साथ रणनीतिक गठजोड़ बनाते हैं तो चीन से कूटनीतिक सौदेबाजी के वक्त भारत पॉजिटिव साइड में रहेगा।

चीन के सामने चुनौती है सिंगापुर

सिंगापुर एक बड़ी मैन्युफेक्चरिंग पावर है। पूर्वी एशिया में अगर चीन के सामने कोई चुनौती है तो वो सिंगापुर है। चीनी माल के बहिष्कार की बात होती है, लेकिन भारत डब्ल्यूटीओ नॉर्म के चलते ऐसा नहीं कर सकता। दूसरी तरफ भारत को वो सामान तो मंगाना ही है, फिर वो चाहे चीन से मंगाए या कहीं और से। दूसरी जगह से चीजें मंगाने पर उनकी कीमत ज्यादा हो सकती है। इसका हमारे व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।”

जकार्ता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशिया दौरे पर हैं। यहां उन्होंने राष्ट्रपति जोको विदोदो से जकार्ता के मर्डेका पैलेस में मुलाकात की। दोनों देशों के संयुक्त बयान में पीएम मोदी ने आतंकवाद पर निशाना साधा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिक्यॉरिटी ऐंड ग्रोथ फॉर ऑल (SAGAR)और ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी का भी जिक्र किया। ऐक्ट ईस्ट पॉलिसी मोदी सरकार में शुरू की गई, जिसका मकसद एशियाई देशों के साथ संबंधों को प्रमुखता देना है।  इसके बाद दोनों देशों ने 15 MoUs पर हस्ताक्षर किए।

शहीदों को श्रद्धांजलि से शुरू की यात्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की आजादी के संघर्ष के शहीदों को आज श्रद्धांजलि देकर अपनी यात्रा की शुरुआत की। उन्होंने यहां कलीबाता नेशनल हीरोज सिमेट्री में शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इंडोनेशिया की पहली आधिकारी यात्रा पर आए मोदी आज राष्ट्रपति जोको विदोदो से भी मिले। बैठक के बाद  पीएम मोदी ने आज कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। राष्ट्रपति जोको विदोदो से मुलाकात और डेलीगेशन स्तर की बैठक के बाद पीएम मोदी 'पतंग प्रदर्शनी' पहुंचे और महोत्सव का उद्घाटन किया।यह पतंग प्रदर्शनी बेहद खास है। इसे रामायण-महाभारत की थीम पर आयोजित किया गया है। पतंगों को भी उसी अंदाज में डिजायन किया गया है। पीएम मोदी पतंग महोत्सव उद्घाटन के दौरान पतंगबाजी करते भी दिखे। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ पीएम मोदी ने पतंग उड़ाई।

इंडोनेशिया अहम क्यों?

दरअसल चीन का एक न्यू मैरीटाइम सिल्क रूट है, वो इंडोनेशिया के मलक्का से अफ्रीका के जिबूती तक जाता है। यानी एक तरह से ये रूट भारत को घेरता है।1) भारत इंडोनेशिया से इसी तरह का समझौता करने जा रहा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड-डिफेंस गलियारा बनेगा। अगर इंडोनेशिया के साथ हमारा बेहतर तालमेल होता है तो हम चीन के मैरीटाइम सिल्क रूट को काउंटर कर पाएंगे।2) चीन पाक, श्रीलंका, बांग्लादेश और म्यांमार-फिलीपींस पर नजर जमाए हुए है। अगर हमारे साथ इंडोनेशिया आ जाता है, तो हम अंडमान-निकोबार के पास चीन के हो रहे जमाव को रोक सकते हैं।3) इंडोनेशिया, दक्षिण-पूर्वी एशिया में उभरती आर्थिक शक्ति है और मौजूदा वक्त में भारत भी एक वैश्विक ताकत के रूप में सामने आया है। अगर हम इंडोनेशिया के साथ रणनीतिक गठजोड़ बनाते हैं तो चीन से कूटनीतिक सौदेबाजी के वक्त भारत पॉजिटिव साइड में रहेगा।

चीन के सामने चुनौती है सिंगापुर

सिंगापुर एक बड़ी मैन्युफेक्चरिंग पावर है। पूर्वी एशिया में अगर चीन के सामने कोई चुनौती है तो वो सिंगापुर है। चीनी माल के बहिष्कार की बात होती है, लेकिन भारत डब्ल्यूटीओ नॉर्म के चलते ऐसा नहीं कर सकता। दूसरी तरफ भारत को वो सामान तो मंगाना ही है, फिर वो चाहे चीन से मंगाए या कहीं और से। दूसरी जगह से चीजें मंगाने पर उनकी कीमत ज्यादा हो सकती है। इसका हमारे व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा।"