PM नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन पर लोगों से मांगी माफी, कहा- आपको बचाने के लिए बस यही तरीका था

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15 अप्रैल को लॉक डाउन खुलने के आसार कम, मोदी सरकार कर रही विचार

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की गंभीरता और दुनियाभर के विकसित देशों की त्रासदी को देखते हुए सरकार ने रिस्क लेते हुए लॉकडाउन का बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में जनता से इसके लिए माफी भी मांगी है। मगर उन्होंने यह भी कहा कि देशवासियों को बचाने के लिए यह जरूरी था और बस यही एकमात्र तरीका था। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीवन और मृत्यु के बीच की लड़ाई है।  

Pm Narendra Modi Mann Ki Baat Live Updates Mann Ki Baat Live Coverage On Coronavirus Lockdown Covid19 India Corona Lockdown Exodus :

पीएम मोदी ने कहा, ‘दुनिया के हालात देखने के बाद लगता है कि आपके परिवार को सुरक्षित रखने का यही एक रास्ता बचा है। बहुत से लोग मुझसे नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है। आपको जो असुविधा हुई है, इसके लिए क्षमा मांगता हूं।’

लॉकडाउन के बाद देशभर से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो कि किसी का भी दिल पिघला सकती हैं। शहरों में दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने वाले लोग गांवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। लोग हजार किलोमीटर की भी दूरी की परवाह किए बिना छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पैदल ही निकल पड़े हैं। ऐसे में मीडिया में लगातार ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जो बेहद संवेदनशील हैं।

शनिवार से ही दिल्ली के आनंदविहार और धौला कुआं में लोगों का बड़ा हुजूम देखने को मिला। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों ने कुछ बसों का इंतजाम किया है, जिससे कि लोगों को उनके गांवों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, इसमें खतरा यह है कि भीड़ की वजह से संक्रमण आक्रामक हो सकता है। राज्य सरकारें लगातार लोगों को समझा रही हैं कि जहां हैं वहीं रहें, क्योंकि लोगों के भोजन और रहने का प्रबंध किया जाएगा।

‘हमें जीतनी है जीवन-मृत्यु के बीच की लड़ाई’

पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं आपकी परेशानी समझता हूं देश के सामने कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई के लिए, ये कदम उठाये बिना कोई रास्ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई, जीवन और मृत्य के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है।’ मोदी ने कहा, ‘बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना चाहिए, बाद में रोग असाध्य हो जाते हैं, तब इलाज भी मुश्किल हो जाता है। आज पूरा हिंदुस्तान, हर हिन्दुस्तानी यही कर रहा है।’

‘रिश्तों को तरोताजा करने का समय’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग जो कोरोना के संदिग्ध हैं, उनके साथ भी बुरा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल डिस्टैंसिंग बनाने की जरूरत है न कि इमोशनल डिस्टैंस बनाने की। वे लोग आपको बचाने के लिए ही क्वारंटाइन में हैं। इसलिए उनके प्रति हमारी भी जिम्मेदारी है। उनका सहयोग करने की आवश्यकता है। कोरोना से लड़ने का तरीका सोशल डिस्टैंसिंग है, लेकिन इसका मतलब सोशल इंटरैक्शन को खत्म करने का नहीं है। यह समय रिश्तों को तरोताजा करने का है। यह समय हमें बताता है कि सोशल डिस्टैंसिंग बढ़ाओ और इमोशनल डिस्टैंसिंग घटाओ।  

 

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की गंभीरता और दुनियाभर के विकसित देशों की त्रासदी को देखते हुए सरकार ने रिस्क लेते हुए लॉकडाउन का बड़ा फैसला लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में जनता से इसके लिए माफी भी मांगी है। मगर उन्होंने यह भी कहा कि देशवासियों को बचाने के लिए यह जरूरी था और बस यही एकमात्र तरीका था। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीवन और मृत्यु के बीच की लड़ाई है।   पीएम मोदी ने कहा, 'दुनिया के हालात देखने के बाद लगता है कि आपके परिवार को सुरक्षित रखने का यही एक रास्ता बचा है। बहुत से लोग मुझसे नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है। आपको जो असुविधा हुई है, इसके लिए क्षमा मांगता हूं।' लॉकडाउन के बाद देशभर से ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं जो कि किसी का भी दिल पिघला सकती हैं। शहरों में दिहाड़ी मजदूरी पर काम करने वाले लोग गांवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। लोग हजार किलोमीटर की भी दूरी की परवाह किए बिना छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ पैदल ही निकल पड़े हैं। ऐसे में मीडिया में लगातार ऐसी कहानियां सामने आ रही हैं, जो बेहद संवेदनशील हैं। शनिवार से ही दिल्ली के आनंदविहार और धौला कुआं में लोगों का बड़ा हुजूम देखने को मिला। उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों ने कुछ बसों का इंतजाम किया है, जिससे कि लोगों को उनके गांवों तक पहुंचाया जा सके। हालांकि, इसमें खतरा यह है कि भीड़ की वजह से संक्रमण आक्रामक हो सकता है। राज्य सरकारें लगातार लोगों को समझा रही हैं कि जहां हैं वहीं रहें, क्योंकि लोगों के भोजन और रहने का प्रबंध किया जाएगा। 'हमें जीतनी है जीवन-मृत्यु के बीच की लड़ाई' पीएम मोदी ने कहा, 'मैं आपकी परेशानी समझता हूं देश के सामने कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई के लिए, ये कदम उठाये बिना कोई रास्ता नहीं था। कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई, जीवन और मृत्य के बीच की लड़ाई है और इस लड़ाई में हमें जीतना है।' मोदी ने कहा, 'बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना चाहिए, बाद में रोग असाध्य हो जाते हैं, तब इलाज भी मुश्किल हो जाता है। आज पूरा हिंदुस्तान, हर हिन्दुस्तानी यही कर रहा है।' 'रिश्तों को तरोताजा करने का समय' प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ लोग जो कोरोना के संदिग्ध हैं, उनके साथ भी बुरा व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल डिस्टैंसिंग बनाने की जरूरत है न कि इमोशनल डिस्टैंस बनाने की। वे लोग आपको बचाने के लिए ही क्वारंटाइन में हैं। इसलिए उनके प्रति हमारी भी जिम्मेदारी है। उनका सहयोग करने की आवश्यकता है। कोरोना से लड़ने का तरीका सोशल डिस्टैंसिंग है, लेकिन इसका मतलब सोशल इंटरैक्शन को खत्म करने का नहीं है। यह समय रिश्तों को तरोताजा करने का है। यह समय हमें बताता है कि सोशल डिस्टैंसिंग बढ़ाओ और इमोशनल डिस्टैंसिंग घटाओ।