कोरोना के चलते RBI द्वारा उठाये कदमों पर PM बोले- मिडिल क्लास, कारोबार को मिलेगी मदद

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कोरोना के चलते RBI द्वारा उठाये कदमों पर PM बोले- मिडिल क्लास, कारोबार को मिलेगी मदद

नई दिल्ली। भारत इस समय कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। सरकार ने इससे बचने के लिए पूरे देश को 21 दिनो के लिए लॉक डाउन कर रखा है। जहां सरकार ने कल स्वास्थ्य कर्मियों, गरीबों, किसानो, महिलाओं के लिए एक लाख 70 हजार करोड़ रूपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है। वहीं आज भारतीय रिर्जव बैंक ने भी देश की जनता को बैंक से जुड़ी चीजों पर राहत दी है। RBI ने लॉकडाउन के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की घोषणा की है। जिसका पीएम मोदी ने भी स्वागत किया है।

Pm Said On Steps Taken By Rbi Due To Corona Middle Class Business Will Get Help :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट में लिखा- “आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को कोरोनावायरस के प्रभाव से बचाने के लिए आज बड़े कदम उठाए हैं। इन घोषणाओं से नकदी की स्थिति में सुधार होगा, पूंजी की लागत कम होगी तथा मध्यम वर्ग एवं कारोबारी इकाइयों को मदद मिलेगी।”

बताया जा रहा है कि नीतिगत ब्याज दर या रेपो रेट कम होने से बैंक होम लोन समेत अन्य कर्ज को सस्ता कर सकते हैं। जहां कोरोना से पहले ही अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी है वहीं लॉक डाउन के समय और भी गिरती चली जा रही है। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए रिजर्व बैंक पहले भी रेपो दर में कटौती कर चुका है और बैंकों को इसका फायदा ग्राहकों को पहुंचाने की बात भी कह चुका है। इसके बाद बैंकों ने सीमांत कोष की लागत आधारित ब्याज दर (MCLR) में कटौती की थी।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार प्रेस वार्ता कर बताया कि आरबीआई ने रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत यानी 75 आधार अंक की कटौती की है। लॉकडाउन के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी। वहीं, रिवर्स रेपो रेट में 90 आधार अंक यानी 0.90 प्रतिशत की कटौती की गई है।

उन्होने यह भी बताया कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया गया है। सीआरआर 3 प्रतिशत पर आ गया है। इस कदम से वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित होगी। कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋण देने वाले संस्थानों को सभी प्रकार के कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक रोक की छूट दी गई है

नई दिल्ली। भारत इस समय कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। सरकार ने इससे बचने के लिए पूरे देश को 21 दिनो के लिए लॉक डाउन कर रखा है। जहां सरकार ने कल स्वास्थ्य कर्मियों, गरीबों, किसानो, महिलाओं के लिए एक लाख 70 हजार करोड़ रूपये के राहत पैकेज का ऐलान किया है। वहीं आज भारतीय रिर्जव बैंक ने भी देश की जनता को बैंक से जुड़ी चीजों पर राहत दी है। RBI ने लॉकडाउन के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की घोषणा की है। जिसका पीएम मोदी ने भी स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट में लिखा- "आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को कोरोनावायरस के प्रभाव से बचाने के लिए आज बड़े कदम उठाए हैं। इन घोषणाओं से नकदी की स्थिति में सुधार होगा, पूंजी की लागत कम होगी तथा मध्यम वर्ग एवं कारोबारी इकाइयों को मदद मिलेगी।" बताया जा रहा है कि नीतिगत ब्याज दर या रेपो रेट कम होने से बैंक होम लोन समेत अन्य कर्ज को सस्ता कर सकते हैं। जहां कोरोना से पहले ही अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ी है वहीं लॉक डाउन के समय और भी गिरती चली जा रही है। अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए रिजर्व बैंक पहले भी रेपो दर में कटौती कर चुका है और बैंकों को इसका फायदा ग्राहकों को पहुंचाने की बात भी कह चुका है। इसके बाद बैंकों ने सीमांत कोष की लागत आधारित ब्याज दर (MCLR) में कटौती की थी। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार प्रेस वार्ता कर बताया कि आरबीआई ने रेपो रेट में 0.75 प्रतिशत यानी 75 आधार अंक की कटौती की है। लॉकडाउन के बीच हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो दर को 5.15 प्रतिशत से घटाकर 4.4 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी। वहीं, रिवर्स रेपो रेट में 90 आधार अंक यानी 0.90 प्रतिशत की कटौती की गई है। उन्होने यह भी बताया कि नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 1 प्रतिशत की कटौती का फैसला लिया गया है। सीआरआर 3 प्रतिशत पर आ गया है। इस कदम से वित्तीय प्रणाली में पर्याप्त पूंजी सुनिश्चित होगी। कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए सभी वाणिज्यिक बैंकों और ऋण देने वाले संस्थानों को सभी प्रकार के कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक रोक की छूट दी गई है