फेक न्यूज पर स्मृति ईरानी के फैसले को पीएम मोदी ने रद्द किया

Smriti Irani, स्मृति ईरानी
फेक न्यूज पर स्मृति ईरानी के फैसले को पीएम मोदी ने रद्द किया

नई दिल्ली। फेक न्यूज चलाने वाले चैनलों और अखबारों पर सिकंजा कसने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया था। मंत्रालय के इस फैसले के पीछे केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की भूमिका होने की बात सामने आ रही थी। नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही कई बड़े मीडिया हाउसों ने नोटिफिकेशन पर आपत्ति जताई और इसे प्रेस की आजादी को सीमित करने का प्रयास करार दिया। जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने आनन फानन में फैसला लेते हुए इस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया।

सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में मुताबिक गलत न्यूज का कवरेज और प्रसारण करते हुए दोषी पाए जाने की स्थिति में पत्रकारों की मान्यता रद्द की जा सकेगी। पहली बार दोषी पाए जाने पर छह माह, दूसरी बार दोषी पाए जाने पर एक साल और तीसरी बार दोषी पाए जाने पर आजीवन मान्यता रद्द करने का जिक्र किया गया था। फेक न्यूज के मामलें सामने आने पर प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल आॅफ इंडिया और न्यूज चैनलों के लिए न्यूज ब्रॉडकस्टर्स एसोसिएशन मामले की सुनवाई करेंगे। प्रक्रिया को पूरा करने के लिए इस संस्थाओं के पास 15 दिनों का समय होगा, जिससे जांच का सामना करने वाले पत्रकारों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

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पत्रकारों और मीडिया हाउसों द्वारा इस नोटिफिकेशन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया।

क्या उठे थे सवाल —

पत्रकारों ने मंत्रालय के फैसले पर आपत्ति दर्ज करवाते हुए कहा था कि यह कौन निर्धारित करेगा कि न्यूज फेक है या सही। आम तौर पर ऐसी खबरें ऐसे श्रोतों से आती हैं, जिनक पत्रकारिता की मुख्यधारा से कोई सरोकार नहीं होता। जिन पत्रकारों पर कार्रवाई होगी वे पीआईबी से मान्यता प्राप्त हैं, जबकि जो खबर चलाते हैं वे पीआईबी की मान्यता के दायरे में नहीं आते। संभव है इस नियम का प्रयोग मुख्यधारा से जुड़े पत्रकारों पर पाबंदी लगाने के लिए होगा।

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नई दिल्ली। फेक न्यूज चलाने वाले चैनलों और अखबारों पर सिकंजा कसने के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सोमवार को नोटिफिकेशन जारी कर पत्रकारों की मान्यता रद्द करने का फैसला लिया था। मंत्रालय के इस फैसले के पीछे केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की भूमिका होने की बात सामने आ रही थी। नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही कई बड़े मीडिया हाउसों ने नोटिफिकेशन पर आपत्ति जताई और इसे प्रेस की आजादी को सीमित करने का प्रयास करार दिया। जिसके बाद…
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