NHAI के वित्‍तीय संकट से PMO चिंतित, कहा- बंद कर दो राजमार्गों का निर्माण

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NHAI में वित्‍तीय संकट से PMO चींतित, कहा- बंद कर दो राजमार्गों का निर्माण

नई दिल्ली। देश में राजमार्गों व सड़कों का निर्माण करने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कर्ज के बोझ तले दब गया है। अथॉरिटी की इस स्थिति के बाद मोदी सरकार ने उसे पत्र लिखकर राजमार्गों के निर्माण पर रोक लगाने को कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने परिवहन सचिव संजीव रंजन को 17 अगस्त को लिखे पत्र में कथित तौर पर एनएचएआई की विस्तार योजना की आलोचना की है, क्योंकि इसकी वजह से प्राधिकरण वित्तीय संकट में फंस गया है।

Pmo Worried Over Financial Crisis In Nhai Said Stop Construction Of Two Highways :

खबर के अनुसार पिछले 5 साल के दौरान प्राधिकरण के कर्ज सात गुना अधिक बढ़ गया है। पीएमओ की तरह से 17 अगस्त को लिख गए पत्र में कहा अथॉरिटी से कहा गया कि अनियोजित और सड़कों के अधिक विस्तार के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में पूरी तरह से गतिरोध पैदा हो गया है। इसमें कहा गया कि एनएचएआई ने भूमि की लागत का कई गुना अधिक भुगतान करने के लिए बाध्य किया।

इसके द्वारा निर्माण की जा रही सड़कों की लागत में वृद्धि हुई। इससे सड़क का बुनियादी ढांचा आर्थिक रूप से अस्थिर हो गया है।” ब्लूमबर्ग के मिले दस्तावेजों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी के कार्यालय ने एनएचएआई को रोड असेट्स मैनेजमेंट कंपनी के रूप में बदलने का प्रस्ताव किया है। खबर के अनुसार पीएमओ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से इस बारे में एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

पीएमओ ऑफिस का यह निर्णय पीएम मोदी के पहले कार्यकाल के बिल्कुल विपरीत है। मालूम हो कि पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश में हाईवे के तेजी से निर्माण के लिए एनएचएआई की तारीफों के पुल बांध रही थी। सरकार का कहना था कि प्राधिकरण ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने में मदद की है।

गडकरी ने बताया अफवाह

पत्र पर जवाब देते हुए गडकरी ने कहा कि एनएचएआई में किसी भी तरह का वित्तीय संकट नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़कों के अनियोजित विस्तार की वजह से भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों में एनएचएआई का बहुत धन खर्च हुआ है। गडकरी ने कहा कि पत्र को लेकर मीडिया में जो कुछ भी आया है वह गलत है। पीएमओ की ओर से सिर्फ सुझाव आया है। इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट गलत और वास्तविकता से दूर है।

केंद्रीय मंत्री ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को बताया कि मिश्रा ने रंजन को पत्र लिखकर एनएचएआई के परिचालन प्रदर्शन में सुधार लाने के सुझाव दिए हैं। गडकरी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एएए रेटिंग वाली इकाई है और पैसे की कोई कमी नहीं है। पिछले 20 दिनों में सिर्फ मुझे विभिन्न वित्तीय संस्थानों से 1,750 अरब रुपए की वित्तीय प्रतिबद्धता मिली है। एलआईसी ने 1,250 अरब रुपए की वित्तीय प्रतिबद्धता, जबकि बैंकों ने 50,000 करोड़ रुपए देने की सहमति जताई है। अत: पर्याप्त पूंजी मौजूद है।

नई दिल्ली। देश में राजमार्गों व सड़कों का निर्माण करने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) कर्ज के बोझ तले दब गया है। अथॉरिटी की इस स्थिति के बाद मोदी सरकार ने उसे पत्र लिखकर राजमार्गों के निर्माण पर रोक लगाने को कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा ने परिवहन सचिव संजीव रंजन को 17 अगस्त को लिखे पत्र में कथित तौर पर एनएचएआई की विस्तार योजना की आलोचना की है, क्योंकि इसकी वजह से प्राधिकरण वित्तीय संकट में फंस गया है। खबर के अनुसार पिछले 5 साल के दौरान प्राधिकरण के कर्ज सात गुना अधिक बढ़ गया है। पीएमओ की तरह से 17 अगस्त को लिख गए पत्र में कहा अथॉरिटी से कहा गया कि अनियोजित और सड़कों के अधिक विस्तार के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में पूरी तरह से गतिरोध पैदा हो गया है। इसमें कहा गया कि एनएचएआई ने भूमि की लागत का कई गुना अधिक भुगतान करने के लिए बाध्य किया। इसके द्वारा निर्माण की जा रही सड़कों की लागत में वृद्धि हुई। इससे सड़क का बुनियादी ढांचा आर्थिक रूप से अस्थिर हो गया है।” ब्लूमबर्ग के मिले दस्तावेजों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी के कार्यालय ने एनएचएआई को रोड असेट्स मैनेजमेंट कंपनी के रूप में बदलने का प्रस्ताव किया है। खबर के अनुसार पीएमओ ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से इस बारे में एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। पीएमओ ऑफिस का यह निर्णय पीएम मोदी के पहले कार्यकाल के बिल्कुल विपरीत है। मालूम हो कि पहले कार्यकाल में मोदी सरकार ने देश में हाईवे के तेजी से निर्माण के लिए एनएचएआई की तारीफों के पुल बांध रही थी। सरकार का कहना था कि प्राधिकरण ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने में मदद की है। गडकरी ने बताया अफवाह पत्र पर जवाब देते हुए गडकरी ने कहा कि एनएचएआई में किसी भी तरह का वित्तीय संकट नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सड़कों के अनियोजित विस्तार की वजह से भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्यों में एनएचएआई का बहुत धन खर्च हुआ है। गडकरी ने कहा कि पत्र को लेकर मीडिया में जो कुछ भी आया है वह गलत है। पीएमओ की ओर से सिर्फ सुझाव आया है। इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। मीडिया रिपोर्ट गलत और वास्तविकता से दूर है। केंद्रीय मंत्री ने एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को बताया कि मिश्रा ने रंजन को पत्र लिखकर एनएचएआई के परिचालन प्रदर्शन में सुधार लाने के सुझाव दिए हैं। गडकरी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एएए रेटिंग वाली इकाई है और पैसे की कोई कमी नहीं है। पिछले 20 दिनों में सिर्फ मुझे विभिन्न वित्तीय संस्थानों से 1,750 अरब रुपए की वित्तीय प्रतिबद्धता मिली है। एलआईसी ने 1,250 अरब रुपए की वित्तीय प्रतिबद्धता, जबकि बैंकों ने 50,000 करोड़ रुपए देने की सहमति जताई है। अत: पर्याप्त पूंजी मौजूद है।